किडनी रोग और सिकल सेल पर एम्स रायपुर व संबलपुर विश्वविद्यालय मिलकर करेंगे शोध
रायपुर, 11 अगस्त (हि. स.)। छत्तीसगढ़ और ओडिशा में गंभीर स्वास्थ्य समस्याओं के समाधान के लिए एम्स रायपुर और संबलपुर विश्वविद्यालय के बीच समझौता हुआ है।
मंगलवार को दोनों संस्थानों ने संयुक्त रूप से क्लिनिकल रिसर्च, स्वास्थ्य सेवाओं की क्षमता बढ़ाने और नई स्वास्थ्य तकनीक व समाधान विकसित करने के लिए समझौता ज्ञापन (एमओयू) पर हस्ताक्षर किए।
इस साझेदारी में मुख्य रूप से बिना स्पष्ट कारण होने वाली क्रॉनिक किडनी डिजीज और सिकल सेल रोग जैसी क्षेत्रीय स्वास्थ्य समस्याओं पर शोध किया जाएगा।
संबलपुर विश्वविद्यालय के उप पंजीयक (अकादमिक) डॉ. ईश्वर बैथारू ने बताया कि ओडिशा के कई जिलों में किडनी रोग के मामलों में बढ़ोतरी देखी गई है। इन मरीजों में कई लक्षण छत्तीसगढ़ के किडनी डिजीज प्रभावित क्षेत्रों के मरीजों से मिलते-जुलते हैं। ऐसे में दोनों राज्यों में बीमारी के कारणों की पहचान और रोकथाम के लिए संयुक्त शोध को महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
एम्स रायपुर के कार्यकारी निदेशक लेफ्टिनेंट जनरल अशोक जिंदल (सेवानिवृत्त) ने कहा कि, इस समझौते का उद्देश्य केवल शोध पत्र प्रकाशित करना नहीं है, बल्कि शोध से सामने आने वाले निष्कर्षों को व्यावहारिक स्वास्थ्य योजनाओं और जनहित की नीतियों में बदलना है। उन्होंने कहा कि आगे इस साझेदारी का विस्तार सिकल सेल रोग समेत अन्य क्षेत्रीय स्वास्थ्य समस्याओं तक भी किया जाएगा।
समझौता हस्ताक्षर कार्यक्रम में दोनों संस्थानों के वरिष्ठ अधिकारी और शोधकर्ता मौजूद रहे। एम्स रायपुर की ओर से डीन (अकादमिक्स) डॉ. एली मोहापात्रा, एसोसिएट डीन (रिसर्च) डॉ. एकता खंडेलवाल सहित अन्य विशेषज्ञ उपस्थित रहे। संबलपुर विश्वविद्यालय की ओर से उप पंजीयक डॉ. ईश्वर बैथारू और शोधार्थी प्रलय बिस्वास व सावन कुमार साहू मौजूद रहे।
दोनों संस्थानों का मानना है कि, इस साझेदारी से छत्तीसगढ़ और ओडिशा में क्षेत्रीय स्वास्थ्य चुनौतियों को बेहतर तरीके से समझने और उनके प्रभावी समाधान तैयार करने में मदद मिलेगी।
हिन्दुस्थान समाचार / गायत्री प्रसाद धीवर

