समर्थन मूल्य पर धान खरीद के लिए किसानों काे एग्रीस्टेक व बायोमेट्रिक सत्यापन अनिवार्य
जगदलपुर, 03 अगस्त (हि.स.)। राज्य शासन की नीति के अनुरूप बस्तर जिले में खरीफ विपणन वर्ष 2026-27 के दौरान समर्थन मूल्य पर धान खरीद की पूरी प्रक्रिया को सुगम, पारदर्शी और व्यवस्थित बनाने के लिए व्यापक दिशा-निर्देश जारी किए गए हैं।
कलेक्टर आकाश छिकारा के निर्देशानुसार इस वर्ष बस्तर जिले के सभी श्रेणी के किसानों के लिए एग्रीस्टेक पोर्टल पर पंजीयन कराना अनिवार्य कर दिया गया है। शासन का मुख्य उद्देश्य उपार्जन व्यवस्था को आधुनिक तकनीकों से जोड़कर वास्तविक और पात्र किसानों को शासकीय योजनाओं का शत-प्रतिशत लाभ प्रदान करना है।
इस संबंध में जिले के कृषि उपार्जन केंद्रों में धान बेचने के इच्छुक सभी कृषक आगामी 31 अक्टूबर 2026 तक खाद्य विभाग की विभागीय वेबसाइट के ऑनलाइन सोसाइटी मॉड्यूल के माध्यम से अपना पंजीयन और खसरा संशोधन करा सकते हैं। इस वर्ष सबसे बड़ा बदलाव यह किया गया है कि कृषि मंत्रालय, भारत सरकार द्वारा संचालित एग्रीस्टेक पोर्टल से फार्मर आईडी प्राप्त करना अनिवार्य होगा, जिससे किसानों को अलग से एकीकृत किसान पोर्टल पर पंजीयन कराने की दिक्कत से मुक्ति मिलेगी। इसके साथ ही धान उपार्जन केंद्रों पर बायोमेट्रिक आधारित खरीदी प्रणाली को भी निरंतर लागू रखा गया है, ताकि पारदर्शी प्रक्रिया के तहत वास्तविक किसान या उनका नामांकित प्रतिनिधि ही फसल का विक्रय कर सके।
किसानों की सुविधा को ध्यान में रखते हुए प्रक्रिया में कई राहत भरे प्रावधान भी शामिल किए गए हैं। गत वर्ष (2025-26) में पंजीकृत ऐसे किसान जिनके पास किसान कोड और एग्रीस्टेक फार्मर आईडी उपलब्ध है, उन्हें पुनः नया पंजीयन कराने की जरूरत नहीं होगी। हालांकि यदि किसी किसान द्वारा नई भूमि क्रय की गई है, या नामांतरण, बटवारा व फौती के कारण रकबे में परिवर्तन हुआ है, तो वे अपनी समिति में जाकर खसरा नंबर का संशोधन करा सकेंगे। वहीं जो कृषक पहली बार पंजीयन करा रहे हैं, वे एग्रीस्टेक में पंजीयन के बाद अपनी संबंधित समिति में बैंक विवरण और भूमि का ब्योरा दर्ज करवाकर किसान कोड प्राप्त कर सकते हैं।
विशेष श्रेणी के कृषकों जैसे वन अधिकार पट्टाधारी, डूबान क्षेत्र के किसानों और संस्थागत कृषकों के लिए भी एग्रीस्टेक पंजीयन को आवश्यक बनाया गया है। इनके पारदर्शी सत्यापन के लिए संबंधित खसरे का जियो-टैगिंग (अक्षांश एवं देशांतर) दर्ज कर फॉर्म आईडी बनाई जाएगी। इसके अलावा अधिया, रेगहा या लीज के माध्यम से खेती करने वाले किसानों को एग्रीस्टेक पोर्टल के ऑथराइजेशन मॉड्यूल के जरिए अधिकृत किया जाएगा। धान के वास्तविक उत्पादन का सटीक आकलन करने के लिए 15 अगस्त से 31 अक्टूबर तक चलने वाले डिजिटल क्रॉप सर्वे में दर्ज रकबे को ही उपार्जन के लिए मान्य माना जाएगा।
धान खरीद केंद्रों पर सुचारू व्यवस्था बनाए रखने के लिए स्थायी केंद्र प्रभारियों को नामांकित किया जा रहा है और समिति स्तर पर डाटा एंट्री ऑपरेटरों को एग्रीस्टेक आईडी प्रदान कर प्रशिक्षित किया जा रहा है। किसानों को फिंगरप्रिंट या बायोमेट्रिक सत्यापन में आने वाली व्यावहारिक समस्याओं के समाधान के लिए कलेक्टर द्वारा प्रत्येक खरीदी केंद्र में एक अधिकृत प्राधिकारी की नियुक्ति भी की जाएगी।
जिला प्रशासन ने बस्तर जिले के सभी किसान भाइयों से अपील की है कि वे अंतिम तिथि 31 अक्टूबर 2026 का इंतजार किए बिना समय रहते अपने समीपस्थ उपार्जन केंद्र में जाकर पंजीयन, खसरा मैपिंग और बायोमेट्रिक प्रक्रिया को अवश्य पूर्ण कराएं।
हिन्दुस्थान समाचार / राकेश पांडे

