कृषि के साथ पशुपालन बनी ग्रामीण अर्थव्यवस्था की मजबूत धुरी
धमतरी, 04 जनवरी (हि.स.)। कभी पशुपालन को गांवों में खेती की केवल सहायक गतिविधि माना जाता था घर के लिए दूध, अंडा या कुछ अतिरिक्त आमदनी तक सीमित। लेकिन आज धमतरी जिले में पशुपालन आत्मनिर्भरता की रीढ़ बन चुका है। यह बदलाव ग्रामीण जीवन की दिशा और दशा दोनों को नई पहचान दे रहा है।
आज धमतरी के गांवों में खेतों के साथ-साथ गोठान, पशु शेड और पोल्ट्री फार्म किसानों की मेहनत और सपनों के प्रतीक बन चुके हैं। पशुपालन अब रोजगार, सम्मान और आर्थिक स्थिरता का मजबूत आधार बन रहा है। जिले में पशुपालन को संगठित और उद्यम आधारित स्वरूप देने के लिए राष्ट्रीय पशुधन मिशन के अंतर्गत उद्यमिता विकास कार्यक्रम में उल्लेखनीय प्रगति हुई है। बैकयार्ड पोल्ट्री एवं हैचरी, भेड़-बकरी पालन तथा पिगरी (सूकर पालन) जैसे क्षेत्रों में कुल 37 आनलाइन प्रकरण प्राप्त हुए, जिनमें से 28 प्रकरण स्वीकृत किए जा चुके हैं। भेड़-बकरी पालन के 28 प्रकरणों में से 24 प्रकरण लंबित रहे, वहीं 15 प्रकरणों को बैंकों द्वारा स्वीकृति प्रदान की गई है।
इन स्वीकृत प्रकरणों की कुल लागत लगभग 10 करोड़ रुपये है, जिससे स्पष्ट है कि पशुपालन अब छोटे स्तर की गतिविधि न रहकर ग्रामीण उद्यमिता का सशक्त मॉडल बन चुका है। पशुपालन क्षेत्र में इतनी बड़ी राशि के ऋण स्वीकृत कराने वाला धमतरी जिला प्रदेश में अग्रणी बनकर उभरा है।
ये आंकड़े केवल फाइलों में दर्ज संख्याएं नहीं, बल्कि गांव-गांव में उम्मीद की नई कहानियां गढ़ रहे हैं। कहीं किसान आधुनिक डेयरी यूनिट स्थापित कर दुग्ध उत्पादन बढ़ा रहे हैं, तो कहीं महिला समूह बकरी पालन के माध्यम से आर्थिक रूप से सशक्त हो रहे हैं। किसानों की सुविधा और आर्थिक संबल के लिए किसान क्रेडिट कार्ड योजना को भी प्रभावी ढंग से लागू किया गया है। जिले में 1700 आवेदन तैयार किए गए, जिनमें से 180 किसानों को स्वीकृति मिल चुकी है। यह योजना किसानों को समय पर वित्तीय सहायता उपलब्ध कराकर उनकी उत्पादन क्षमता बढ़ाने में सहायक बन रही है।
राष्ट्रीय पशुधन मिशन के तहत बैकयार्ड पोल्ट्री, भेड़-बकरी पालन और पिगरी जैसी गतिविधियों से ग्रामीण अर्थव्यवस्था को नई गति मिली है। जिन किसानों के पास कभी सीमित संख्या में पशु थे, वे आज पशुपालन को व्यवसाय के रूप में अपनाकर आत्मनिर्भर बन रहे हैं और बाजार में अपनी पहचान स्थापित कर रहे हैं। कलेक्टर अबिनाश मिश्रा ने बताया कि धमतरी जिले में पशुपालन को पारंपरिक गतिविधि तक सीमित न रखकर इसे रोजगार और उद्यमिता से जोड़ा गया है। विभिन्न योजनाओं के माध्यम से किसानों को प्रशिक्षण, तकनीकी मार्गदर्शन और बैंक ऋण की सुविधा उपलब्ध कराई जा रही है।
उन्होंने कहा कि बैंकों द्वारा लगभग 10 करोड़ रुपये के 15 प्रकरणों की स्वीकृति यह दर्शाती है कि किसान अब पशुपालन को व्यवसाय के रूप में अपनाने के लिए आगे आ रहे हैं। यह जिले के लिए गर्व का विषय है कि पशुपालन क्षेत्र में इतनी बड़ी राशि के ऋण स्वीकृत कराने में धमतरी जिला प्रदेश में अग्रणी बन रहा है।
कलेक्टर ने आगे बताया कि पशुपालन के साथ किसान क्रेडिट कार्ड योजना को भी प्राथमिकता दी जा रही है, ताकि किसानों को समय पर वित्तीय सहायता मिल सके और उनकी आय में स्थायी वृद्धि हो। उन्होंने विश्वास जताया कि महिलाओं और युवाओं की भागीदारी बढ़ाकर गांवों में ही रोजगार के नए अवसर सृजित किए जाएंगे और आने वाले समय में धमतरी जिला पशुपालन के क्षेत्र में प्रदेश के लिए एक आदर्श मॉडल के रूप में स्थापित होगा। यह परिवर्तन प्रशासनिक मार्गदर्शन, बैंक अधिकारियों की सक्रिय भूमिका तथा पंचायतों और समितियों के समन्वित प्रयासों का परिणाम है। जब कोई किसान अपने पशु शेड से निकलते दूध के कनस्तरों को देखता है या महिला समूह अपने पोल्ट्री फार्म में चूजों की चहचहाहट सुनता है, तो वही मुस्कान इस योजना की असली सफलता को दर्शाती है।
हिन्दुस्थान समाचार / रोशन सिन्हा

