गंगरेल के द्वीप से आकार ले रही अनुभव आधारित पर्यटन की नई पहचान

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गंगरेल के द्वीप से आकार ले रही अनुभव आधारित पर्यटन की नई पहचान


गंगरेल के द्वीप से आकार ले रही अनुभव आधारित पर्यटन की नई पहचान


गंगरेल के द्वीप से आकार ले रही अनुभव आधारित पर्यटन की नई पहचान


गंगरेल के द्वीप से आकार ले रही अनुभव आधारित पर्यटन की नई पहचान


धमतरी, 27 सितंबर (हि.स.)। विश्व पर्यटन दिवस के अवसर पर धमतरी जिले में पर्यटन की नई संभावनाएं आकार ले रही हैं। गंगरेल जलाशय के बीच विकसित किया गया आइलैंड कैंपसाइट जिले में अनुभव आधारित, एडवेंचर और इको-टूरिज्म की दिशा में नई शुरुआत का प्रतीक बन रहा है।

कल्पना कीजिए—चारों ओर शांत जलराशि, दूर तक फैली हरियाली, खुले आसमान से झांकती सुनहरी धूप, ठंडी हवा का स्पर्श और शहर की भागदौड़ से दूर प्रकृति के बीच सुकून के पल। नाव से करीब 40 मिनट की यात्रा के बाद जब खूबसूरत द्वीप सामने आता है, तो सफर महज किसी स्थान तक पहुंचने का नहीं, बल्कि प्रकृति के करीब आने का अनुभव बन जाता है। हर वर्ष 27 सितंबर को मनाया जाने वाला विश्व पर्यटन दिवस पर्यटन के सामाजिक, सांस्कृतिक और आर्थिक महत्व को रेखांकित करता है। वर्ष 2026 की थीम डिजिटल एजेंडा और कृत्रिम बुद्धिमत्ता के माध्यम से पर्यटन के पुनर्गठन पर केंद्रित है।

इसी बदलती पर्यटन अवधारणा के अनुरूप धमतरी में प्रकृति, रोमांच, संस्कृति और स्थानीय समुदाय को जोड़ने की दिशा में प्रयास किए जा रहे हैं। गंगरेल जलाशय के विस्तृत जलक्षेत्र के मध्य स्थित द्वीप पर पहली बार आइलैंड कैंपसाइट विकसित किया गया है। 17 और 18 सितंबर को टूर ऑपरेटर्स के लिए आयोजित एफएएम ट्रिप के दौरान गंगरेल बांध, जलक्षेत्र, द्वीपों तथा आसपास के प्राकृतिक और सांस्कृतिक परिवेश का प्रत्यक्ष अनुभव कराया गया। इसके बाद 19 और 20 सितंबर को छत्तीसगढ़ की ट्रैवल कंपनी ने कार्यक्रम आयोजित किया, जिसमें छत्तीसगढ़ के साथ ओडिशा और तमिलनाडु से आए पर्यटकों ने हिस्सा लिया।

द्वीप तक पहुंचने वाली करीब 40 मिनट की बोट यात्रा से शुरू हुआ रोमांच नाइट कैंपिंग, ट्रेकिंग, फिशिंग, स्विमिंग, बोनफायर, आउटडोर कुकिंग, बर्ड वॉचिंग और स्टार गेजिंग जैसी गतिविधियों तक पहुंचा। खुले आसमान के नीचे तारों को निहारना और रात के शांत जलक्षेत्र के बीच कैंप में ठहरना पर्यटकों के लिए सामान्य भ्रमण से अलग यादगार अनुभव बना। गंगरेल का द्वीप धमतरी की पर्यटन संभावनाओं की केवल एक झलक है।

गंगरेल एडवेंचर स्पोर्ट्स जल पर्यटन और रोमांच का अनुभव देते हैं, वहीं ठेमली आइलैंड द्वीप पर्यटन की नई संभावनाएं सामने ला रहा है। नरहरा वाटरफॉल प्रकृति और ट्रेकिंग, सिहावा आध्यात्मिकता, प्रकृति और विरासत, जबकि रूद्री कॉरिडोर और कायकिंग महानदी तट के नए अनुभवों से जोड़ रहे हैं। हरफर, मेचका और जबर्रा जैसे क्षेत्र सामुदायिक एवं इको-टूरिज्म की संभावनाओं को सामने लाते हैं, वहीं निरई माता श्रद्धा और प्रकृति के अनूठे समन्वय का अनुभव कराती है। इन स्थलों को व्यापक पर्यटन परिपथ से जोड़ने पर पर्यटक एक ही यात्रा में जल, जंगल, रोमांच, आस्था, संस्कृति और ग्रामीण जीवन का अनुभव कर सकेंगे।

पर्यटन का वास्तविक लाभ तब दिखाई देता है, जब उसका फायदा स्थानीय समुदाय तक पहुंचे। बोटिंग, स्थानीय गाइड, कैंप प्रबंधन, आतिथ्य, भोजन व्यवस्था, ट्रेकिंग, हस्तशिल्प और स्थानीय उत्पादों से जुड़े कार्यों में युवाओं तथा महिला समूहों की भागीदारी रोजगार और स्वरोजगार के नए अवसर पैदा कर सकती है। स्थानीय व्यंजन स्वाद का अनुभव, हस्तशिल्प स्मृति और गांवों की जीवनशैली स्वयं पर्यटन आकर्षण बन सकती है। वहीं पर्यटन विकास के साथ प्रकृति संरक्षण को प्राथमिकता देना भी जरूरी है। स्वच्छता, सुरक्षा, जैव विविधता संरक्षण, जल संरक्षण और स्थानीय समुदाय की भागीदारी के माध्यम से जिम्मेदार एवं टिकाऊ पर्यटन को बढ़ावा दिया जा सकता है।

विश्व पर्यटन दिवस की थीम डिजिटल तकनीक और कृत्रिम बुद्धिमत्ता के बढ़ते महत्व की ओर भी संकेत करती है। डिजिटल प्लेटफॉर्म, स्मार्ट यात्रा योजना, डिजिटल मैपिंग, वर्चुअल अनुभव और ऑनलाइन पर्यटक सुविधाओं की जानकारी के माध्यम से धमतरी के पर्यटन स्थलों को देश-दुनिया तक पहुंचाने की व्यापक संभावनाएं हैं। गंगरेल का द्वीप इसी नई पर्यटन पहचान की शुरुआत का प्रतीक बन रहा है। धमतरी अब केवल घूमने की जगह नहीं, बल्कि प्रकृति से जुड़ने, रोमांच महसूस करने, संस्कृति जानने और स्थानीय जीवन से संवाद करने का अनुभव देने वाली जगह के रूप में अपनी पहचान बना रहा है।

हिन्दुस्थान समाचार / रोशन सिन्हा

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