धमतरी-जाति निवास प्रमाण पत्र नहीं होने से अटकी कमारों की सरकारी नौकरी

धमतरी-जाति निवास प्रमाण पत्र नहीं होने से अटकी कमारों की सरकारी नौकरी


धमतरी, 24 नवंबर (हि.स.)।वनोपज से अपनी जीविका चलाने वाले कमारों को समाज की मुख्यधारा में लाने के लिए शासन स्तर पर लंबे समय से कई शासकीय योजनाएं संचालित हैं, जिसका लाभ भी इन्हें समय-समय पर मिला है। वर्तमान में धमतरी जिले में निवासरत कमार परिवारों के 398 शिक्षित युवक- युवतियों में से 100 से अधिक शिक्षित बेरोजगारों के पास जाति-निवास प्रमाण पत्र नहीं है ।इसके चलते कमारों की सरकारी नौकरी अटक गई है। इसे लेकर आदिम जाति विकास भी ध्यान नहीं दे रहा है।

जिले में निवासरत कमार परिवारों के 398 शिक्षित युवक- युवतियों को सरकारी नौकरी देने के लिए सर्वे किया गया है, जिसमें 100 से अधिक बेरोजगारों के पास कमार जाति का जाति प्रमाण पत्र व निवास प्रमाण पत्र नहीं है।ऐसे लोग सरकारी नौकरी पाने के दौड़ में पिछड़ गए हैं। जाति प्रमाण पत्र के लिए आदिम जाति कल्याण विभाग की ओर से फिलहाल कोई पहल नहीं है, जो उनके भविष्य को बना सके। राज्य शासन के आदेशानुसार इन दिनों प्रदेश समेत धमतरी जिले में शिक्षित बेरोजगार युवक-युवतियों को जिला प्रशासन के विभिन्न विभागों में रिक्त चतुर्थ श्रेणी के पदों पर सीधी भर्ती के तहत सरकारी नौकरियां दी जा रही है। आदिम जाति कल्याण विभाग को जिलेभर के कमार युवक-युवतियों ने सालों से सरकारी नौकरी देने की मांग को लेकर आवेदन लगा रखा है, ऐसे युवक-युवतियों के सर्वे के आधार पर विभाग ने राज्य शासन को 398 लोगों के नाम भेजे हैं, लेकिन इनमें से 100 ऐसे युवक-युवती शामिल हैं, जिनके पास वर्तमान में जाति व निवास प्रमाण पत्र उपलब्ध नहीं है, जो सरकारी नौकरी पाने के दौड़ से पिछड़ चुके हैं। जाति व निवास प्रमाण पत्र समेत सभी प्रकार के दस्तावेजों व प्रमाण पत्र उपलब्ध होने वाले पात्र 35 बेरोजगारों को जिला प्रशासन ने आदिम जाति कल्याण विभाग के माध्यम से पिछले दिनों नौकरी के लिए काउंसिलिंग की है। जल्द ही इन युवक-युवतियों की पदस्थापना लिस्ट जारी हो जाएगी, इसके बाद वे नौकरी कर सकेंगे। हालांकि यह पद शिक्षित कमार युवक-युवतियों के लिए नहीं के बतौर है, क्योंकि धमतरी जिले में बड़ी संख्या में कमार युवक-युवतियों को पढ़ाई-लिखाई करने के बाद शासन के नियमानुसार सीधी भर्ती के तहत सरकारी नौकरी मिलने की आस है।

पढ़ाई-लिखाई करने के बाद बड़ी संख्या में कमार युवक-युवतियों को सरकारी नौकरी नहीं मिलने से उनकी उम्मीदें सरकार की योजनाओं से टूटने लगी है। गिनती के लोगों को नौकरी मिलने के बाद अधिकांश पढ़े लिखे कमार युवक-युवतियां पहले की तरह पुन: जंगलों के भीतर पैतृक कामकाज में जंगल के भीतर अपना भविष्य तराश रहे हैं, जिससे उनके व परिवार का भरण पोषण हो सके। कमारों को खेती के लिए जमीन मिलना भी बंद हो चुका है, ऐसे में अब वे जंगलों में लकड़ी, वन संपदा एकत्र कर जीवनयापन के लिए रोजी कमा रहे हैं।

जाति-निवास प्रमाण पत्र की जानकारी नहीं

आदिम जाति कल्याण विभाग से कई कमारों के पास जाति-निवास नहीं होने की जानकारी नहीं दी गई है। यदि ऐसा है, तो कमारों का जाति-निवास बनाने शीघ्र पहल की जाएगी, ताकि उन्हें सरकारी योजनाओं का लाभ मिल सके।

पीएस एल्मा, कलेक्टर, धमतरी

हिन्दुस्थान समाचार/ रोशन सिन्हा

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