89 करोड़ के धान खरीद घाेटाले काे समिति प्रबंधकाें की आड़ में लीपा-पाेती करने नहीं दिया जायेगा : उमाशंकर शुक्ला
जगदलपुर, 09 सितंबर । प्रदेश कांग्रेस के संयुक्त महासचिव उमाशंकर शुक्ला ने बुधवार काे बयान जारी कर छत्तीसगढ़ के भाजपा की विष्णुदेव सरकार में बस्तर संभाग में समर्थन मूल्य पर हुई धान खरीद के बाद 89 करोड़ 30 लाख 87 हजार रुपये के घाेटाले का आराेप लगाया है। उन्हाेंने कहा कि भाजपा की सरकार घाेटाले से बचने के लिए समितियों के प्रबंधकों और खरीद प्रभारियों पर घाेटाले का ठीकरा फाेड़कर समिति प्रबंधक और संबंधित धान खरीद प्रभारियों से वसूली करने में जुट गई है।
उन्हाेंने कहा कि भाजपा सरकार काे यह बताना पड़ेगा कि बस्तर के किसानाें का 89 करोड़ के धान खरीद घाेटाले में किसकाे कितना हिस्सा मिला। समिति प्रबंधक और संबंधित धान खरीद प्रभारियों की आड़ में 89 करोड़ के घाेटाले की लीपा-पाेती करने नहीं दिया जायेगा।
उन्हाेंने बताया कि वर्ष 2025-26 में बस्तर संभाग के 7 जिलों के 382 धान खरीद केंद्रों में हुई खरीद के भौतिक सत्यापन में कांकेर से 13,281 मीट्रिक टन, कोंडागांव से 6,642 मीट्रिक टन, बस्तर से 4,687 मीट्रिक टन, बीजापुर से 2,131 मीट्रिक टन, सुकमा से 1,501 मीट्रिक टन सहित कुल 28 हजार 243 मीट्रिक टन धान कम पाया गया है। इस धान की कीमत लगभग 89 करोड़ 30 लाख 87 हजार रुपये आंकी गई है। इस धान खरीद घाेटाले की तस्दीक करते हुए जगदलपुर जिला सहकारी बैंक के अतिरिक्त प्रबंधक एस. रजा के अनुसार बस्तर संभाग के 7 जिलों में धान बेचने के लिए 2 लाख 72 हजार 647 किसानों ने पंजीयन कराया था। इनमें से 2 लाख 28 हजार से अधिक किसानों ने समर्थन मूल्य पर धान बेचा। पूरे संभाग में कुल 13 लाख 74 हजार 383 मीट्रिक टन धान की खरीद की गई थी। खरीद के बाद मिलर्स द्वारा 13 लाख 46 हजार 138 मीट्रिक टन धान का उठाव किया गया। इसके बाद सभी खरीद केंद्रों का भौतिक सत्यापन कराया गया, जिसमें करीब 28 हजार 243 मीट्रिक टन धान का शॉर्टेज सामने आया।
उमाशंकर शुक्ला ने कहा कि मिली जानकारी के अनुसार 89 करोड़ के धान खरीद घाेटाले की वसूली के लिए संबंधित समितियों को नोटिस जारी कर समिति प्रबंधकों को राशि जमा करने के लिए तीन महीने का समय दिया गया है। निर्धारित अवधि में राशि जमा नहीं करने पर समिति प्रबंधक और संबंधित धान खरीद प्रभारियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराने की चेतावनी दी गई है। वहीं समिति प्रबंधकों का कहना है कि कई मामलों में निर्धारित समय पर मारफेड द्वारा धान का उठाव नहीं किए जाने के कारण खरीद केंद्रों में धान लंबे समय तक पड़ा रहा। ऐसे में शॉर्टेज का पूरा खामियाजा समिति प्रबंधकों और खरीद प्रभारियों पर डालना उचित नहीं है। उनका सवाल है कि यदि वेयर हाउस में चावल के शॉर्टेज पर सुखत का प्रावधान है तो धान खरीद के दौरान ऐसी व्यवस्था क्यों नहीं है? समिति प्रबंधकों का आरोप है कि समय पर धान का उठाव नहीं होने और संग्रहण केंद्रों में धान के खराब होने की स्थिति का असर अब खरीद समितियों पर डाला जा रहा है।
उमाशंकर शुक्ला ने कहा कि समिति प्रबंधक और संबंधित धान खरीद प्रभारियों के बचाव में पेश की जा रही दलील काे भी यदि सच मान लिया जाए ताे खरीद केंद्रों में धान लंबे समय तक पडे़ रहने से धान के खराब होने एवं सूखत का भी आंकलन किया जाए ताे 28 हजार 243 मीट्रिक टन धान की कमी आना संभव ही नहीं है। यह बस्तर संभाग के किसानाें के धान खरीद में बड़ा घाेटाले किए जाने की ओर स्पष्ट संकेत देता है, जिसकी परदर्शिता के साथ जांच कर 89 करोड़ के धान खरीद घाेटाले की तह तक पंहुचना आवश्यक है।
------------------
हिन्दुस्थान समाचार / राकेश पांडे

