बिना ओटीपी निकले 50 हजार, एचडीएफसी बैंक धमतरी खाताधारक को लौटाएंगे राशि
धमतरी, 14 अगस्त (हि.स.)। साइबर ठगी के मामले में जिला उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग धमतरी ने आज एचडीएफसी बैंक लिमिटेड शाखा धमतरी की जवाबदेही तय करते हुए अहम फैसला सुनाया है। ग्राम जुनवानी निवासी नेकराम साहू (52) के खाते से बिना उनकी जानकारी के निकाली गई 50 हजार रुपये की राशि बैंक को लौटानी होगी।
जिला उपभोक्ता आयोग धमतरी से मिली जानकारी के अनुसार भखारा तहसील अंतर्गत ग्राम जुनवानी निवासी नेकराम साहू का एचडीएफसी बैंक लिमिटेड शाखा धमतरी रेस्ट हाउस के सामने रत्नाबांधा रोड में खाता संचालित है। चार जनवरी 2026 को उनके खाते से 50 हजार रुपये का लेनदेन उनकी जानकारी के बिना हो गया। नेकराम साहू के अनुसार उन्होंने न तो किसी व्यक्ति के साथ ओटीपी साझा किया था और न ही किसी लिंक पर क्लिक किया था। खाते से राशि निकलने की जानकारी मिलने के बाद उन्होंने बैंक पहुंचकर इसकी जानकारी दी। इसके बाद उन्होंने साइबर हेल्पलाइन 1930 पर शिकायत करने के साथ पुलिस अधीक्षक धमतरी, संबंधित थाना और बैंक को भी लिखित शिकायत दी। बैंक से राहत नहीं मिलने पर उन्होंने अधिवक्ता टिकेश कुमार के माध्यम से जिला उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग में परिवाद प्रस्तुत किया।
बैंक ने ग्राहक की लापरवाही का दिया तर्क
सुनवाई के दौरान बैंक की ओर से लेनदेन को थर्ड पार्टी ट्रांसफर बताते हुए ग्राहक की लापरवाही अथवा ओटीपी के माध्यम से लेनदेन स्वीकृत होने का तर्क रखा गया। आयोग ने मामले में प्रस्तुत दस्तावेजों और पक्षकारों के तर्कों का परीक्षण किया। आयोग ने बैंक के पास उपलब्ध इलेक्ट्रानिक अभिलेखों और तकनीकी जानकारी से जुड़े साक्ष्यों के आधार पर मामले पर विचार किया। आयोग ने परिवादी के आवेदन को आंशिक रूप से स्वीकार करते हुए बैंक को विवादित राशि लौटाने का आदेश दिया है।
जिला उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग के अध्यक्ष गोपाल रंजन पाणिग्रही, सदस्य रूपा शर्मा और सदस्य अरविंद सिंह परिहार की पीठ ने 22 जुलाई 2026 को आदेश पारित किया। आदेश के अनुसार एचडीएफसी बैंक को 45 दिवस के भीतर नेकराम साहू को 50 हजार रुपये अदा करने होंगे। इस राशि पर 17 मार्च 2026 से बैंक द्वारा रकम लौटाने तक छह प्रतिशत वार्षिक ब्याज देना होगा। इसके अलावा मानसिक पीड़ा के लिए सात हजार रुपये और वाद व्यय के रूप में पांच हजार रुपये अलग से देने का आदेश दिया गया है।जानकारी के अनुसार चार जनवरी 2026 - नेकराम साहू के खाते से 50 हजार रुपये का लेनदेन हुआ। पांच जनवरी 2026 - खाते में राशि निकलने की जानकारी मिलने के बाद बैंक से संपर्क कर शिकायत की। इसी दिन साइबर हेल्पलाइन 1930 में काल करके एवं पुलिस अधीक्षक धमतरी को लिखित शिकायत किया। छह जनवरी 2026 - थाना भखारा में शिकायत दर्ज किया। 27 जनवरी 2026 - थाना अर्जुनी और बैंक को डाक के माध्यम से शिकायत किया। दो फरवरी 2026 - पुलिस अधीक्षक धमतरी को दूसरी बार लिखित शिकायत किया। तीन फरवरी 2026 - अधिवक्ता के माध्यम से बैंक को नोटिस प्रेषित किया। 17 मार्च 2026 - जिला उपभोक्ता आयोग में परिवाद प्रस्तुत किया गया। 22 जुलाई 2026 - जिला उपभोक्ता आयोग ने फैसला सुनाते हुए बैंक को 50 हजार रुपये, छह प्रतिशत वार्षिक ब्याज, सात हजार रुपये मानसिक पीड़ा और पांच हजार रुपये वाद व्यय देने का आदेश दिया। आदेश के अनुसार बैंक को निर्धारित 45 दिवस के अवधि में भुगतान करना होगा।
समय-समय पर ई-केवाईसी अपडेट कराना चाहिए : अरविंद सिंह परिहार
जिला उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग के सदस्य अरविंद सिंह परिहार ने कहा कि साइबर धोखाधड़ी से बचने के लिए बैंक खाते से मोबाइल नंबर लिंक रखना जरूरी है। इससे खाते में होने वाले प्रत्येक लेनदेन की जानकारी तत्काल मोबाइल पर मिल सकेगी और किसी अनधिकृत लेनदेन का समय रहते पता लगाया जा सकता है। उन्होंने कहा कि बैंक ग्राहकों को समय-समय पर ई-केवाईसी अपडेट कराना चाहिए। किसी भी अनजान व्यक्ति के साथ ओटीपी, पासवर्ड अथवा बैंक खाते से जुड़ी गोपनीय जानकारी साझा नहीं करनी चाहिए। खाते से अनधिकृत लेनदेन की जानकारी मिलते ही बैंक को सूचना देने के साथ साइबर हेल्पलाइन 1930 पर शिकायत करनी चाहिए।
हिन्दुस्थान समाचार / रोशन सिन्हा

