बस्तर दशहरा मिलन समारोह में अव्यवस्थाओं पर हुई चर्चा

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बस्तर दशहरा मिलन समारोह में अव्यवस्थाओं पर हुई चर्चा


जगदलपुर, 26 अक्टूबर (हि.स.)। बस्तर धाकड़ क्षत्रिय राजपूत समाज के तत्वावधान में आज साेमवार काे आयोजित दशहरा मिलन समारोह में बस्तर दशहरा की गौरवशाली परंपराओं, धार्मिक आस्था और पर्व की अव्यवस्थाओं पर विस्तार से चर्चा हुई।

समाज के संरक्षक कुमार जयदेव के नेतृत्व में आयोजित इस समारोह में जगदलपुर, दंतेवाड़ा, तोकापाल, लोहंडीगुड़ा, माड़पाल सहित विभिन्न क्षेत्रों से मांझी-चालकी, सिरहा-गुनिया, पुजारी, राजपूत समाज, उत्कल समाज एवं अन्य समाजों के प्रतिनिधि बड़ी संख्या में शामिल हुए। समारोह में बस्तर दशहरा पर्व से जुड़े लोगों का अभिनंदन किया गया तथा सांस्कृतिक कार्यक्रमों के माध्यम से सामाजिक एकता और आपसी सौहार्द का संदेश दिया गया।

दशहरा मिलन समारोह को संबोधित करते हुए संरक्षक कुमार जयदेव ने कहा कि बस्तर दशहरा किसी व्यक्ति या जाति विशेष का पर्व नहीं, बल्कि पूरे बस्तर वासियों की आस्था, संस्कृति और परंपरा का प्रतीक है। मां दंतेश्वरी बस्तर की आराध्य देवी हैं और उनके दरबार में सभी को पूजा-अर्चना का अधिकार है। इसलिए दशहरा की परंपराओं को सुरक्षित रखना और पर्व का आयोजन पारंपरिक मर्यादाओं के अनुरूप करना सभी की सामूहिक जिम्मेदारी है। उन्होंने कहा कि इस वर्ष दशहरा पर्व के दौरान कुछ व्यवस्थागत कमियां और ऐसी घटनाएं सामने आईं, जिनसे परंपराओं से जुड़े लोगों की भावनाएं आहत हुईं। इन घटनाओं पर गंभीरता से विचार-मंथन कर भविष्य में उनकी पुनरावृत्ति रोकने के लिए ठोस कदम उठाने की जरूरत है।

कुमार जयदेव ने मांग की कि बस्तर दशहरा के सुचारु और परंपरागत आयोजन के लिए एक समिति का गठन किया जाए, जिसमें मांझी-चालकी, पुजारी, सिरहा-गुनिया सहित दशहरा की परंपराओं से जुड़े सभी प्रमुख वर्गों को उचित प्रतिनिधित्व मिले। समिति पर्व से संबंधित व्यवस्थाओं की निगरानी करे और प्रशासन को पारंपरिक रीति-रिवाजों के संबंध में आवश्यक मार्गदर्शन दे। उन्होंने कहा कि प्रशासनिक अधिकारी अपने स्तर पर व्यवस्थाएं संभालते हैं, लेकिन पारंपरिक रीति-रिवाजों की पूरी जानकारी नहीं होने के कारण कभी-कभी ऐसी परिस्थितियां बन जाती हैं, जिससे पर्व की मूल परंपराएं प्रभावित होती हैं। इसलिए दशहरा की व्यवस्थाओं में परंपराओं के जानकारों की भागीदारी सुनिश्चित करना आवश्यक है।

कुमार जयदेव ने कह कि प्रशासनिक अधिकारियों को समय रहते दें, ताकि किसी भी निर्णय से धार्मिक आस्था और पारंपरिक व्यवस्था प्रभावित न हो। कुमार जयदेव ने दशहरा के दौरान रथ खींचने वाले लोगों को शराब उपलब्ध कराए जाने की व्यवस्था पर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि रथ खींचना मां दंतेश्वरी के प्रति आस्था और समर्पण से जुड़ी परंपरा है। ऐसे में शराब का सेवन धार्मिक भावना के अनुरूप नहीं है और इससे दुर्घटनाओं का खतरा भी बढ़ता है। उन्होंने इस वर्ष रथ खींचने के दौरान हुई एक व्यक्ति की मृत्यु का उल्लेख करते हुए शासन-प्रशासन से मांग की कि रथ खींचने की पूरी अवधि में शराब के सेवन और वितरण पर सख्ती से रोक लगाई जाए, ताकि श्रद्धालुओं की सुरक्षा सुनिश्चित हो सके और भविष्य में ऐसी दुखद घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकी जा सके।

दंतेवाड़ा स्थित मां दंतेश्वरी मंदिर के पुजारी परमेश्वर नाथ जिया ने दशहरा मिलन कार्यक्रम में हुई चर्चा का उल्लेख करते हुए कहा कि कुमार जयदेव के नेतृत्व में आयोजित दशहरा मिलन कार्यक्रम में आपसी मेल-मुलाकात के साथ बस्तर दशहरा की कमियों और व्यवस्थाओं की समीक्षा की गई। उन्होंने कहा कि बस्तर दशहरा बस्तर के लोगों का पर्व है और इसके आयोजन में स्थानीय लोगों की भागीदारी सुनिश्चित होनी चाहिए। धार्मिक परंपराओं और विधानों की जानकारी रखने वाले लोगों को आयोजन की व्यवस्था में उचित जिम्मेदारी मिलनी चाहिए। उन्होंने कहा कि दशहरा जैसे ऐतिहासिक और धार्मिक महत्व के पर्व में परंपराओं का पालन सर्वोपरि होना चाहिए। इस वर्ष कुछ घटनाएं ऐसी हुईं, जिन पर गंभीरता से विचार करने की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि परंपराओं की अनदेखी स्वीकार्य नहीं है और दशहरा पर्व का संचालन पारंपरिक मर्यादाओं के अनुसार ही होना चाहिए।

परमेश्वर नाथ जिया ने कुमार जयदेव की समिति गठन की मांग का समर्थन करते हुए कहा कि दशहरा पर्व की व्यवस्थाओं के लिए ऐसी समिति होनी चाहिए, जिसमें परंपराओं की जानकारी रखने वाले पुजारी और अन्य पारंपरिक पदाधिकारी शामिल हों। उन्हें पर्व की व्यवस्थाओं के संचालन और परंपराओं के संरक्षण का दायित्व दिया जाना चाहिए, ताकि दशहरा की गरिमा, मर्यादा और ऐतिहासिक परंपराएं सुरक्षित रह सकें। समारोह में उपस्थित विभिन्न समाजों के प्रतिनिधियों ने भी बस्तर दशहरा की परंपराओं के संरक्षण, व्यवस्थाओं में सुधार और सभी समाजों के बीच बेहतर समन्वय की आवश्यकता पर जोर दिया। अंत में आयोजकों ने सभी अतिथियों, समाज प्रमुखों, पुजारियों, पत्रकारों और उपस्थित जनसमुदाय के प्रति आभार व्यक्त किया।

हिन्दुस्थान समाचार / राकेश पांडे

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