बत्तुकम्मा उत्सव नौ दिनों की आराधना के बाद हर्षोल्लास के साथ हुआ संपन्न

WhatsApp Channel Join Now
बत्तुकम्मा उत्सव नौ दिनों की आराधना के बाद हर्षोल्लास के साथ हुआ संपन्न


बीजापुर, 19 अक्टूबर (हि.स.)। फूलों की रंग-बिरंगी सजावट, लोकगीतों की मधुर गूंज, तालियों की थाप और पारंपरिक नृत्य की मनमोहक छटा… इन सबके बीच बीजापुर जिले में नौ दिनों तक मनाया गया बत्तुकम्मा उत्सव आज साेमवार काे हर्षोल्लास के साथ संपन्न हुआ। आज अलसुबह महिलाओं ने पारंपरिक रीति-रिवाजों के अनुसार पूजा-अर्चना कर फूलों से सजी बत्तुकम्मा का विसर्जन किया। भोपालपटनम, बीजापुर, भैरमगढ़ और उसूर ब्लॉक के अनेक गांवों में उत्सव की रौनक देखने को मिली।

बत्तुकम्मा उत्सव की शुरुआत तुलसी स्थापना और पूजा-अर्चना के साथ हुई। नौ दिनों तक महिलाओं ने तुलसी चौरे और पूजा स्थल की साफ-सफाई, लिपाई-पोताई तथा आकर्षक रंगोली से परिसर को सजाया। फूलों से सजी बत्तुकम्मा के सामने दीप प्रज्ज्वलित कर आरती की गई। शाम होते ही महिलाएं पारंपरिक वेशभूषा और साज-श्रृंगार में एकत्रित होतीं तथा लोकगीतों, भजनों और सामूहिक नृत्य के माध्यम से अपनी सांस्कृतिक परंपरा को जीवंत करती रहीं। उत्सव की खास बात यह रही कि इसमें महिलाओं के साथ बच्चे, बुजुर्ग और परिवार के अन्य सदस्य भी उत्साहपूर्वक शामिल हुए। ढोलक, तालियों और संगीत की धुनों के बीच पूरा माहौल भक्तिमय और उल्लासपूर्ण बना रहा। समापन अवसर पर आज साेमवार सुबह पारंपरिक विधि-विधान के साथ फूलों की बत्तुकम्मा का नदी में विसर्जन किया गया।

नवरात्रि के दौरान मनाया जाने वाला बत्तुकम्मा उत्सव महिलाओं के लिए श्रद्धा, आनंद और सामूहिक सहभागिता का विशेष अवसर है। नवरात्रि उपवास और पूजा-अर्चना के बाद शाम को महिलाएं एक साथ जुटकर उत्सव मनाती हैं। दीपक की लौ, फूलों की सजावट और पारंपरिक गीतों के बीच नौ दिनों तक चलने वाली यह परंपरा नई पीढ़ी को अपनी सांस्कृतिक विरासत से जोड़ने का माध्यम भी बन रही है। क्षेत्र में बत्तुकम्मा उत्सव का सामाजिक महत्व भी खास है। अलग-अलग परिवारों और समुदायों के लोग आयोजन में सहयोग करते हैं। इससे आपसी मेल-जोल बढ़ता है और महिलाओं को अपनी परंपराओं को सामूहिक रूप से आगे बढ़ाने का अवसर मिलता है।

जिले के भोपालपटनम, बीजापुर, भैरमगढ़ और उसूर ब्लॉक के अनेक गांवों में विभिन्न स्थानों पर बत्तुकम्मा उत्सव आयोजित किया गया। बस्तर संभाग के बीजापुर सहित सुकमा, दंतेवाड़ा, नारायणपुर और जगदलपुर क्षेत्र में भी यह परंपरा सांस्कृतिक पहचान और सामुदायिक सहभागिता से जुड़ी हुई है। बत्तुकम्मा उत्सव के दौरान विभिन्न राजनीतिक दलों के प्रतिनिधि भी अलग-अलग स्थानों पर आयोजित कार्यक्रमों में शामिल हुए। महिलाओं ने पारंपरिक तरीके से आरती उतारकर उनका स्वागत किया। जनप्रतिनिधियों ने महिलाओं और क्षेत्रवासियों को शुभकामनाएं देते हुए सुख-समृद्धि, खुशहाली और क्षेत्र की उन्नति की कामना की।

---------------

हिन्दुस्थान समाचार / राकेश पांडे

Livevns.news Desk
Livevns.news Desk

763588 Articles

Share this story