निजी स्कूलों की मनमानी पर जिला प्रशासन सख्त, खरसिया के चैतन्य टेक्नो स्कूल के विरुद्ध हुई बड़ी कार्रवाई
रायगढ़, 08 जुलाई (हि.स.)। जिले में निजी विद्यालयों के संचालन में पारदर्शिता और शासन के निर्देशों के कड़ाई से पालन सुनिश्चित करने के लिए जिला प्रशासन ने बुधवार काे जांच प्रतिवेदन के आधार पर श्री चैतन्य टेक्नो स्कूल (अंग्रेजी माध्यम) के विरुद्ध कार्रवाई करते हुए मान्यता समाप्त करने की अनुशंसा की गई है।
कलेक्टर ने जिला शिक्षा अधिकारी, जिला मिशन समन्वयक (डीएमसी), विकासखंड शिक्षा अधिकारियों (बीईओ) एवं बीआरसी को निजी विद्यालयों की विशेष निगरानी के निर्देश दिए गए हैं। विकासखंड शिक्षा अधिकारी खरसिया द्वारा ग्राम बाम्हनपाली स्थित श्री चैतन्य टेक्नो स्कूल (अंग्रेजी माध्यम) का औचक निरीक्षण किया गया।
निरीक्षण के दौरान विद्यालय में कई गंभीर अनियमितताएं सामने आने पर जांच प्रतिवेदन जिला शिक्षा अधिकारी को प्रस्तुत किया गया। इधर जिला शिक्षा अधिकारी ने बताया कि जांच प्रतिवेदन के आधार जिला शिक्षा अधिकारी ने संबंधित शैक्षणिक संस्थान को शोकाज नोटिश जारी किया गया है, लेकिन निर्धारित समय पर जवाब प्रस्तुत नहीं किया है। जिसके आधार पर विद्यालय के विरुद्ध बड़ी प्रशासनिक कार्रवाई करते हुए उसकी मान्यता समाप्त करने की अनुशंसा की कार्रवाई के लिए आगे प्रेषित की गई है।
जांच प्रतिवेदन के अनुसार विद्यालय प्रबंधन द्वारा स्वयं के प्रकाशन की पाठ्यपुस्तकों और कॉपियों का सीधे विद्यार्थियों एवं पालकों को विक्रय किया जा रहा था। पुस्तकों और कॉपियों पर विद्यालय का नाम मुद्रित पाया गया। इसके साथ ही विद्यालय परिसर में ही विद्यार्थियों को गणवेश भी बेचा जा रहा था, जबकि शिक्षा के अधिकार अधिनियम एवं शासन के निर्देशों के अनुसार इस प्रकार की व्यवस्था स्वीकार्य नहीं है।
जांच में यह भी सामने आया कि विद्यालय में अध्ययनरत अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति एवं अन्य पिछड़ा वर्ग के लगभग 230 विद्यार्थियों में से किसी भी छात्र-छात्रा को छात्रवृत्ति योजना का लाभ उपलब्ध नहीं कराया गया। विद्यालय द्वारा एक भी पात्र विद्यार्थी की छात्रवृत्ति स्वीकृत नहीं कराई गई, जिससे शासन की महत्वपूर्ण कल्याणकारी योजना का क्रियान्वयन पूरी तरह प्रभावित पाया गया।
निरीक्षण के दौरान यू-डाईस प्लस पोर्टल में दर्ज विद्यार्थियों के आंकड़ों में भी गंभीर विसंगतियां सामने आईं। विद्यालय में कक्षा 9वीं और 10वीं में वास्तविक रूप से मात्र 10-10 विद्यार्थी अध्ययनरत पाए गए, जबकि पोर्टल पर कक्षा 9वीं में 66 तथा कक्षा 10वीं में 33 विद्यार्थियों की ऑनलाइन प्रविष्टि दर्ज थी। जांच में यह तथ्य सामने आया कि अन्य विद्यालयों में अध्ययनरत विद्यार्थियों के नाम फर्जी तरीके से दर्ज कर उनके पेन (परमानेंट एजुकेशन नंबर) एवं अपार आईडी तैयार किए गए। इस संबंध में पूर्व में जारी स्पष्टीकरण नोटिस का भी विद्यालय द्वारा निर्धारित अवधि में कोई जवाब प्रस्तुत नहीं किया गया।
जिला प्रशासन को यह शिकायत भी प्राप्त हुई कि पालकों द्वारा स्थानांतरण प्रमाण-पत्र (टीसी) मांगे जाने पर विद्यालय प्रबंधन अनावश्यक रूप से टालमटोल करता है और समय पर टीसी जारी नहीं करता। इसके अतिरिक्त विद्यार्थियों से ‘इनफिनिटी मोबाइल एप्लीकेशन’ के नाम पर पाठ्यपुस्तकों के साथ 1300 से 2000 रुपये तक की अतिरिक्त राशि वसूले जाने की भी पुष्टि जांच में हुई।
जांच में यह भी पाया कि शासन के निर्देशानुसार संचालित किए जाने वाले यूथ एवं ईको क्लब सहित अन्य गतिविधियों का विद्यालय में प्रभावी संचालन नहीं किया जा रहा था। समग्र जांच में यह स्पष्ट हुआ कि विद्यालय प्रबंधन द्वारा शासन की विभिन्न गाइडलाइन एवं निर्देशों की लगातार अवहेलना की जा रही है।
जिला शिक्षा अधिकारी ने जांच प्रतिवेदन के आधार पर अभिमत व्यक्त किया है कि विद्यालय द्वारा शिक्षा के अधिकार अधिनियम की भावना के विपरीत पाठ्यपुस्तकों एवं गणवेश का विक्रय किया जा रहा है। विद्यालय की पुस्तकें एवं गणवेश स्थानीय बाजार अथवा ऑनलाइन उपलब्ध नहीं हैं, जिससे पालकों को विवश होकर विद्यालय से ही सामग्री खरीदनी पड़ती है। साथ ही छात्रवृत्ति जैसी महत्वपूर्ण योजना का क्रियान्वयन नहीं करना, यू-डाईस प्लस पोर्टल में कथित फर्जी प्रविष्टियां करना तथा शासन के निर्देशों की लगातार अनदेखी करना अत्यंत गंभीर अनियमितताएं हैं।
जिला प्रशासन ने सख्त निर्देश देते हुए कहा है कि जिले में निजी विद्यालयों द्वारा शासन के नियमों एवं विद्यार्थियों के हितों की अनदेखी किसी भी स्थिति में स्वीकार नहीं की जाएगी। कलेक्टर के निर्देशानुसार सभी निजी विद्यालयों की नियमित मॉनिटरिंग जारी रहेगी तथा नियमों का उल्लंघन करने वाले संस्थानों के विरुद्ध नियमानुसार कठोर कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी।
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हिन्दुस्थान समाचार / रघुवीर प्रधान

