अंबिकापुर: सरगुजा नेचुरल ब्रांड से ग्रामीण महिलाओं की आजीविका को नई उड़ान

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अंबिकापुर: सरगुजा नेचुरल ब्रांड से ग्रामीण महिलाओं की आजीविका को नई उड़ान


अंबिकापुर: सरगुजा नेचुरल ब्रांड से ग्रामीण महिलाओं की आजीविका को नई उड़ान


अंबिकापुर, 12 जनवरी (हि.स.)। राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन (एनआरएलएम) के तहत स्व सहायता समूहों द्वारा निर्मित शुद्ध और पारंपरिक उत्पादों को सशक्त पहचान दिलाने की दिशा में सरगुजा नेचुरल ब्रांड एक मजबूत उदाहरण बनकर उभरा है। प्रदेश स्तर पर 36 कला ब्रांड के माध्यम से राज्य स्तरीय प्रमोशन की रणनीति तैयार की गई है, जिसके अंतर्गत विभिन्न जिलों के लगभग 26 विशिष्ट उत्पादों का चयन कर उनके लिए एक समान मानकों पर ब्रांडिंग, पैकेजिंग, सर्टिफिकेशन, प्रमोशन और बिक्री की व्यवस्था सुनिश्चित की जा रही है।

इसी कड़ी में सरगुजा जिले से सरसों तेल का चयन किया गया है, जिसका उत्पादन बतौली और लुण्ड्रा विकासखंड के स्व सहायता समूहों द्वारा किया जा रहा है। इन समूहों द्वारा उत्पादित सरसों तेल की आधुनिक और आकर्षक ब्रांडिंग एवं पैकेजिंग जिला स्तर पर स्थापित ग्रोथ सेंटर के माध्यम से की जा रही है। यह ग्रोथ सेंटर न केवल सरगुजा बल्कि आसपास के जिलों में स्व सहायता समूहों के उत्पादों का गुणवत्ता परीक्षण कर वैल्यू एडिशन भी करता है, जिससे उपभोक्ताओं तक शुद्ध, सुरक्षित और भरोसेमंद उत्पाद पहुंच सकें।

ग्रामीण महिलाओं की आर्थिक आत्मनिर्भरता को सशक्त करने की दिशा में बिहान महिला किसान प्रोड्यूसर कंपनी लिमिटेड द्वारा संचालित “सरगुजा नेचुरल” ब्रांड तेजी से अपनी पहचान बना रहा है। “गांव की मिट्टी से आपकी रसोई तक” की सोच के साथ यह ब्रांड शुद्ध, गुणवत्तायुक्त और पारंपरिक स्वाद से भरपूर उत्पाद बाजार में उपलब्ध करा रहा है। यह पहल न केवल उपभोक्ताओं को सेहतमंद विकल्प दे रही है, बल्कि ग्रामीण महिलाओं को स्थायी आय का मजबूत जरिया भी प्रदान कर रही है।

वर्तमान में सरगुजा नेचुरल ब्रांड के अंतर्गत मिलेट्स आटा, गेहूं आटा, सत्तु, बरी, पापड़ सहित कुल 17 प्रकार के उत्पाद बाजार में उपलब्ध हैं। इन उत्पादों की बढ़ती मांग से एक ओर जहां उपभोक्ताओं को स्थानीय और शुद्ध उत्पाद मिल रहे हैं, वहीं दूसरी ओर स्व सहायता समूहों की महिलाओं की आय में लगातार वृद्धि हो रही है।

बिहान के सहयोग से विकसित सरगुजा नेचुरल आज गुणवत्ता, विश्वास और स्वावलंबन का प्रतीक बन चुका है, जो ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती देने के साथ-साथ “वोकल फॉर लोकल” की भावना को भी साकार कर रहा है।

हिन्दुस्थान समाचार / पारस नाथ सिंह

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