आज से नगर निकाय कर्मियों की अनिश्चितकालीन हड़ताल शुरू, सफाई, पेयजल व अन्य शहरी सेवाओं पर पड़ सकता है असर

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आज से नगर निकाय कर्मियों की अनिश्चितकालीन हड़ताल शुरू, सफाई, पेयजल व अन्य शहरी सेवाओं पर पड़ सकता है असर


सुपौल, 30 जुलाई (हि.स.)। बिहार लोकल बॉडिज इम्प्लाइज फेडरेशन एवं बिहार राज्य स्थानीय निकाय कर्मचारी महासंघ (एक्टू) के संयुक्त संघर्ष मोर्चा के आह्वान पर गुरुवार 30 जुलाई से नगर परिषद सुपौल सहित राज्य के सभी नगर निकायों के दैनिक वेतनभोगी, संविदा, आउटसोर्सिंग एवं नियमित कर्मचारी अनिश्चितकालीन हड़ताल पर चले गए हैं।

हड़ताल की सूचना नगर परिषद सुपौल के कार्यपालक पदाधिकारी एवं मुख्य पार्षद को पूर्व में ही लिखित रूप से दे दी गई थी। संरक्षक मो अरशद आलम एवं कार्यकारी अध्यक्ष अमरेंद्र कुमार यादव ,सचिव राज कुमार यादव ने कहा कि सरकार के साथ कई दौर की वार्ता के बावजूद उनकी तीन सूत्री मांगों पर कोई ठोस निर्णय नहीं लिया गया, जिसके कारण उन्हें आंदोलन का रास्ता अपनाना पड़ा। संयुक्त संघर्ष मोर्चा की ओर से जारी पत्र में कहा गया है कि कर्मचारियों की लंबित समस्याओं के समाधान के लिए लंबे समय से सरकार से मांग की जा रही थी।

कई बार वार्ता और आश्वासन मिलने के बावजूद किसी भी प्रमुख मांग पर प्रभावी कार्रवाई नहीं हुई। इससे नगर निकाय कर्मियों में व्यापक असंतोष है और अब अनिश्चितकालीन हड़ताल ही अंतिम विकल्प बचा है। कर्मचारी संगठनों का कहना है कि नगर निगम, नगर परिषद और नगर पंचायतों में कार्यरत कर्मचारी शहरों की सफाई, पेयजल आपूर्ति, जल निकासी, स्ट्रीट लाइट व्यवस्था, राजस्व संग्रहण, जनस्वास्थ्य तथा अन्य आवश्यक नागरिक सेवाओं का संचालन करते हैं। इसके बावजूद बड़ी संख्या में कर्मचारी वर्षों से अस्थायी रूप से कार्य कर रहे हैं और उन्हें सेवा सुरक्षा, नियमित वेतनमान तथा अन्य सुविधाएं नहीं मिल रही हैं। संघर्ष मोर्चा ने अपनी तीन प्रमुख मांगों में सबसे पहले वर्षों से कार्यरत दैनिक वेतनभोगी, संविदा एवं अन्य अस्थायी कर्मियों के नियमितीकरण तथा सेवा सुरक्षा सुनिश्चित करने की मांग रखी है। कर्मचारियों का कहना है कि वे केवल सफाई कार्य ही नहीं, बल्कि अतिक्रमण हटाने, राजस्व वसूली, कार्यालयी कार्यों तथा विभिन्न सरकारी अभियानों में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। इसके बावजूद उन्हें स्थायी कर्मचारी का दर्जा नहीं दिया गया है।

दूसरी प्रमुख मांग नगर निकायों में लागू ठेका एवं आउटसोर्सिंग व्यवस्था समाप्त करने की है। कर्मचारी संगठनों का आरोप है कि इस व्यवस्था के कारण श्रमिकों का आर्थिक शोषण होता है तथा बिचौलिया व्यवस्था को बढ़ावा मिलता है। उन्होंने मांग की है कि जब तक आउटसोर्सिंग व्यवस्था समाप्त नहीं होती, तब तक कर्मचारियों का वेतन सीधे उनके बैंक खातों में भेजा जाए और समान कार्य के लिए समान वेतन का सिद्धांत लागू किया जाए। साथ ही एजेंसियों द्वारा की जाने वाली अवैध कटौती पर रोक लगाने की भी मांग की गई है।

तीसरी मांग नगर निकाय कर्मचारियों को एसीपी एवं एमएसीपी योजना का लाभ देने तथा बकाया राशि के भुगतान से संबंधित है। कर्मचारियों का कहना है कि अन्य सरकारी कर्मचारियों की तरह उन्हें भी समयबद्ध वित्तीय उन्नयन का लाभ मिलना चाहिए, ताकि वर्षों से पदोन्नति से वंचित कर्मचारियों को आर्थिक राहत मिल सके। हड़ताल से पहले 29 जुलाई को राज्यभर के नगर निकाय मुख्यालयों में मशाल जुलूस निकालकर सरकार के खिलाफ विरोध प्रदर्शन किया गया। अब हड़ताल की अवधि में कर्मचारी नगर निकाय मुख्यालयों पर शांतिपूर्ण धरना, प्रदर्शन, सभा और जनजागरण कार्यक्रम आयोजित करेंगे। उन्होंने स्पष्ट किया है कि मांगें पूरी होने तक आंदोलन जारी रहेगा।

हिन्दुस्थान समाचार / विनय कुमार मिश्र

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