जलांशों का पुनर्निर्धारण सिंचाई जल आवश्यकता एवं जल उपलब्धता के आधार पर किया जाए : उपेंद्र कुशवाहा

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जलांशों का पुनर्निर्धारण सिंचाई जल आवश्यकता एवं जल उपलब्धता के आधार पर किया जाए : उपेंद्र कुशवाहा


डेहरी आन सोन, 29 अगस्त (हि.स.)।

बिहार के हित में सोन बेसिन में वास्तविक अतिरिक्त जल का आकलन बाणसागर एकरारनामा 1973 के तहत केन्द्रीय जल आयोग की अध्यक्षता में गठित समिति द्वारा कराया जाए और राज्यों के बीच जलांशों का पुनर्निर्धारण सिंचाई जल आवश्यकता एवं जल उपलब्धता के आधार पर किया जाए।राष्ट्रीय लोक मोर्चा प्रमुख व राज्य सभा सदस्य उपेंद्र कुशवाहा ने केंद्रीय जल शक्ति मंत्री सी आर पाटिल व मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी को लिखें पत्र में उक्त बाते कही।

उपेंद्र कुशवाहा ने कहा कि सोन नदी बेसिन के जल को लेकर बिहार, उत्तर प्रदेश और मध्यप्रदेश के बीच 1973 के बाणसागर एकरारनामा के बाद एक बार फिर बड़ा विवाद खड़ा हो गया है। उत्तर प्रदेश ने सोन बेसिन में 5.3835, मिलियन एकड़ फीट (एम ए एफ )अतिरिक्त जल उपलब्ध होने का दावा करते हुए इसके पुनर्बंटवारे का प्रस्ताव केंद्रीय जल आयोग ( सी डब्लू सी ) में रखा हैl जो बिहार के हित में आपत्तिजनक है।

उन्होंने कहा है कि अगर यह प्रस्ताव मान लिया गया तो बिहार के लिए यह बेहद कठिन परिस्थिति होगी। उत्तर प्रदेश ने सोन में जल उपलब्धता का गलत अकड़ा केंद्रीय जल आयोग को दिया है l सम्पूर्ण सोन नदी बेसिन के जल का पुनर्निर्धारण किए बिना यह स्वीकार योग्य नहीं है। 1973 के एकरारनामा के आधार पर सभी राज्यों की सिंचाई आवश्यकता और जल उपलब्धता दोनों का पुनर्निर्धारण होना चाहिए।

उन्होंने कहा है कि उत्तर प्रदेश में रिहन्द डैम पर बिजली उत्पादन के क्रम में बिहार की मांग न रहने पर भी सोन में छोड़ा गया पानी व बाढ़ के पानी को भी आंकड़े में दर्शा कर बिहार को हिस्से से ज्यादा पानी देने की बाते कह रहा है lइन्द्रपुरी बराज पर उपलब्ध जल को बिहार के मानदंड के रूप में आंकना गलत होगा।

कुशवाहा ने कहा है कि इससे बिहार का हिस्सा आधा हो जाएगाl उन्होंने कहा है कि बाणसागर एकरारनामा 1973 के अनुसार बिहार-झारखण्ड सहित सोन बेसिन की सिंचाई आवश्यकता आठ एम ए एफ आंकलित थी, जिसमें बिहार को सोन से 7.75 एम ए एफ तथा गंगाजल उद्भव से 0.25 एम ए एफ मिलना था। जमानियां पम्प नहर योजना इसी 0.25 एम ए एफ में आती है, जिसका आज तक सीडब्लूसी से किलियरेन्स नहीं मिला l

उन्होंने कहा कि एन ओ सी प्रस्ताव लगभग डेढ़ वर्ष से उत्तर प्रदेश में लंबित है। एकरारनामा के अनुसार जल में कमी या वृद्धि होने पर मध्य प्रदेश,बिहार और उत्तर प्रदेश में 5.25 : 2.75 : 1.25 के अनुपात में समायोजन होना है। इस हिसाब से 5.3835 एम ए एफ अतिरिक्त जल में यूपी का औसत आगणित अंश 0.7273 एम ए एफ होगाl मध्य प्रदेश का 3.055 एम ए एफ होगा।

ऐसी स्थिति में बिहार का अंश 7.75 एम ए एफ से घटकर मात्र 3.973 एम ए एफ रह जाएगा। बिहार-झारखण्ड जल बंटवारे के बाद बिहार के पास शेष अंश घटकर केवल 1.973 एम ए एफ रह जाएगा, जो किसानों के लिए तबाही जैसा होगा।

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हिन्दुस्थान समाचार / उपेन्द्र मिश्रा

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