मखाना उत्पादन से बदलेगी किसानों की तकदीर, वैज्ञानिकों का मखाना खाना पर हुई चर्चा

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मखाना उत्पादन से बदलेगी किसानों की तकदीर, वैज्ञानिकों का मखाना खाना पर हुई चर्चा


बेतिया, 29 मार्च (हि.स.)। पश्चिम चंपारण का कृषि विज्ञान केंद्र माधोपुर द्वारा मखाना उत्पादन पर पकड़िया पंचायत में किसानों के बीच एकदिवसीय प्रशिक्षण का आयोजन किया गया। 'मखाना उत्पादन की तकनीक और प्रसंस्करण' पर एक दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य किसानों को पारंपरिक खेती के साथ-साथ जल-जमाव वाले क्षेत्रों के बेहतर उपयोग के लिए जागरूक करना था।प्रशिक्षण के दौरान केवीके माधोपुर के वरिष्ठ वैज्ञानिक एवं प्रधान डॉक्टर अभिषेक प्रताप सिंह ने कहा कि वर्तमान जलवायु परिवर्तन की चुनौतियों को देखते हुए जल-जमाव वाले क्षेत्रों में मखाना की खेती एक वरदान साबित हो रही है।इससे कम लागत में उच्च गुणवत्ता वाली पैदावार प्राप्त की जा सकती है।

क्षेत्रीय अनुसंधान केंद्र माधोपुर के प्रभारी अधिकारी डाक्टर नीरज कुमार ने किसानों को संबोधित करते हुए बताया कि मखाना उत्पादन में बिहार देश का निर्विवाद रूप से अग्रणी राज्य है। देश के कुल उत्पादन का 85% से 90% हिस्सा अकेले बिहार से आता है। इसमें दरभंगा, मधुबनी, पूर्णिया, कटिहार, अररिया और किशनगंज मुख्य जिले हैं। जिनमें मधुबनी जिला अकेले लगभग 20% का योगदान देता है।डॉक्टर जगपाल ने 'मखाना-सह-मछली पालन' तकनीक पर विशेष जानकारी दी।

उन्होंने कहा कि केवल मखाना पर निर्भर रहने के बजाय एक ही तालाब में मछली पालन का मॉडल अपनाना चाहिए। इससे एक ही जल स्रोत से दोहरी आय प्राप्त होती है। मछलियों का अपशिष्ट मखाना के पौधों के लिए प्राकृतिक खाद का काम करता है। जिससे उर्वरक की लागत में भारी कमी आती है। डाक्टर चेलपुरी रामुलु ने मखाना की कटाई और प्रसंस्करण में होने वाली शारीरिक मेहनत को कम करने के लिए आधुनिक कृषि यंत्रों के उपयोग की सलाह दी। उन्होंने बताया कि उन्नत हार्वेस्टिंग इंप्लीमेंट्स से न केवल समय बचता है। बल्कि बीजों की गुणवत्ता भी बनी रहती है।

वहीं तकनीकी सत्र में डाक्टर सौरभ दुबे ने बताया कि मखाना अब केवल गहरे तालाबों तक सीमित नहीं है। आधुनिक 'खेत-आधारित' तकनीक के माध्यम से इसे सामान्य खेतों में भी सफलतापूर्वक उगाया जा रहा है। जो किसानों की आय दोगुनी करने की दिशा में एक बड़ा कदम है।मौके पर किसान राघोशरण प्रसाद,किशुन महतो,जमुना प्रसाद,जहागिर मियां,शिवजी प्रसाद,सहित पकड़िया और आसपास के गांवों के बड़ी संख्या में प्रगतिशील किसान मौजूद रहे।

हिन्दुस्थान समाचार / अमानुल हक

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