विक्रमशिला सेतु मरम्मत: क्षतिग्रस्त स्लैब काटने का काम तेज, एनजीटी की शर्तों के तहत मलबे को गंगा से बाहर निकालने की सख्त कवायद
भागलपुर, 13 अक्टूबर (हि.स.)। उत्तर और दक्षिण बिहार को आपस में जोड़ने वाले अति महत्वपूर्ण विक्रमशिला सेतु के स्थायी जीर्णोद्धार का कार्य इन दिनों तेजी से प्रगति पर है।
सेतु के पिलर नंबर 133 के पास तीन कमजोर स्लैबों को कटर मशीनों के जरिए काटकर हटाने की प्रक्रिया चल रही है। 1 अक्टूबर से पुल पर परिचालन पूरी तरह बंद किए जाने के बाद, निर्माण एजेंसी तीन पालियों में 24 घंटे कर्मियों की तैनाती कर काम को अंजाम दे रही है ताकि तय समय सीमा में कार्य पूरा किया जा सके।
इस बार मरम्मत कार्य में गति के साथ-साथ पर्यावरणीय सुरक्षा का भी पूरा ध्यान रखा जा रहा है। राष्ट्रीय स्वच्छ गंगा मिशन की गाइडलाइन के कड़े अनुपालन को लेकर बिहार राज्य पुल निर्माण निगम के प्रबंध निदेशक जितेंद्र कुमार ने आधिकारिक तौर पर स्पष्ट किया है कि स्लैब काटने के दौरान नदी को स्वच्छ रखने और गांगेय डॉल्फिनों की सुरक्षा के लिए जलशक्ति मंत्रालय और एनएमसीजी के तय मानकों का पूरी तरह ध्यान रखा जा रहा है।
कंक्रीट और लोहे के मलबे का एक भी टुकड़ा गंगा नदी में नहीं गिरने दिया जाएगा। इसके लिए नदी के ऊपर जालीनुमा लोहे का विशेष सुरक्षा मचान तैयार किया गया है। सुरक्षा और गति दोनों हमारी प्राथमिकता हैं।
पुल निर्माण निगम के सहायक अभियंता के अनुसार, कटर मशीनों से स्लैब के साथ पीसीसी गर्डर को भी काटा जा रहा है, ताकि पुराना क्षतिग्रस्त हिस्सा सुरक्षित बाहर निकाला जा सके। सुरक्षा के लिहाज से रेस्क्यू नावों की भी तैनाती की गई है। कार्य एजेंसी द्वारा उपलब्ध कराई गई तकनीकी रिपोर्ट के मुताबिक पहला स्लैब काटकर हटाने का काम लगभग पूरा किया जा चुका है। वर्तमान में दूसरे स्लैब और उसकी रेलिंग को कटर मशीनों से काटा जा रहा है। दूसरा हिस्सा साफ होते ही तीसरे कमजोर स्लैब को हटाने की कार्रवाई शुरू होगी।
वहीं प्रशासन और पुल निर्माण निगम ने सर्दियों के मौसम और कोहरे की तकनीकी चुनौतियों को देखते हुए मरम्मत कार्य के लिए समय-सारणी निर्धारित की है। जिसके मुताबिक तीनों क्षतिग्रस्त स्लैबों की कटिंग आगामी 15 दिनों के अंदर पूरी कर ली जाएगी। बेयरिंग कोट की सफाई और नए बेयरिंग फिटिंग प्रत्येक पिलर पर 4 नए बेयरिंग और एक्सपेंशन ज्वाइंट्स, स्टील गर्डर फिटिंग और डेक स्लैब ढलाईनवंबर के प्रथम सप्ताह में पूरा कर लिया जाएगा। सेतु पर दोबारा पूर्ण आवागमन बहाल करने का लक्ष्य 31 दिसंबर 2026 रखा गया है।
वहीं पुल पूरी तरह बंद होने के कारण भागलपुर और नवगछिया के बीच आने-जाने वाले यात्रियों को आवागमन में परेशानी हो रही है। जिला प्रशासन ने आम लोगों से सहयोग की अपील की है और नदी पार करने के लिए वैकल्पिक नौका (फेरी) सेवाओं के साथ-साथ मुंगेर गंगा पुल और अन्य रूट डायवर्जन का इस्तेमाल करने का सुझाव दिया है।
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हिन्दुस्थान समाचार / बिजय शंकर

