विक्रमशिला सेतु मेगा ब्लॉक: उफनती गंगा में थमी रफ्तार, बदला नावों का समय

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विक्रमशिला सेतु मेगा ब्लॉक: उफनती गंगा में थमी रफ्तार, बदला नावों का समय


विक्रमशिला सेतु मेगा ब्लॉक: उफनती गंगा में थमी रफ्तार, बदला नावों का समय


भागलपुर, 03 अक्टूबर (हि.स.)। भागलपुर और कोसी-सीमांचल क्षेत्र की जीवन रेखा माने जाने वाले विक्रमशिला सेतु को स्थायी मरम्मत कार्य के लिए वाहनों के परिचालन हेतु पूरी तरह बंद कर दिया गया है। सड़क मार्ग ठप होने के बाद अब गंगा की लहरें ही भागलपुर और नवगछिया के बीच आवागमन का एकमात्र सहारा बची हैं। हालांकि, गंगा के बढ़ते जलस्तर और यात्रियों की भारी भीड़ को देखते हुए जिला प्रशासन ने नियमों और समय-सारणी में बड़ा बदलाव किया है।

यात्रियों और वाहनों को सुरक्षित गंगा पार कराने के लिए जिला प्रशासन और बिहार राज्य पुल निर्माण निगम ने सरकारी जहाजों को सेवा में उतारा है। इसके साथ ही आपदा प्रबंधन की सुरक्षा व्यवस्था को सुदृढ़ करने के लिए गंगा नदी में एनडीआरएफ की 5 और एसडीआरएफ की 11 विशेष बोट (कुल 16 सुरक्षा नावें) लगातार पेट्रोलिंग और स्कॉर्टिंग कर रही हैं। सुरक्षा कारणों से आम और सामान्य छोटी नावों के संचालन पर जिला प्रशासन ने पूरी तरह प्रतिबंध लगा दिया है। वर्तमान में गंगा का जलस्तर काफी बढ़ा हुआ है और पानी का बहाव बेहद तेज है। जलस्तर में अचानक हुई इस वृद्धि के कारण सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए जिला प्रशासन ने नाव और जहाज सेवा के समय में बड़ा बदलाव किया है। नए आदेश के अनुसार, बियाडा, बाबूपुर और जाह्नवी चौक घाटों पर शाम 5:30 बजे के बाद किसी भी प्रकार की नाव, फेरी या कार्गो जहाज का परिचालन पूरी तरह बंद रहेगा।

प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि शाम 5:30 बजे तक जो मुसाफिर घाट परिसर में प्रवेश कर जाएंगे, केवल उन्हें ही पार कराया जाएगा। वहीं बढ़ते जलस्तर के कारण ही सबौर के बाबूपुर घाट से भारी व्यावसायिक मालवाहक (कार्गो) जहाजों के परिचालन को तीन दिनों के लिए स्थगित कर समीक्षा के दायरे में रखा गया है। पुल बंद होने के बाद पहले ही दिन घाटों पर यात्रियों की भारी भीड़ उमड़ पड़ी, जिससे मुसाफिरों को दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। गंगा की तेज धार और उफान के कारण जहाजों को बियाडा घाट से जाह्नवी चौक पहुंचने में उम्मीद से काफी अधिक समय लग रहा है। शाम के समय घाट बंद होने की समय-सीमा के कारण बियाडा घाट पर यात्रियों की भारी भीड़ जमा हो रही है, जिससे अफरा-तफरी की स्थिति उत्पन्न हो गई है। लगातार बढ़ रहे पानी के कारण घाटों के संपर्क पथों पर कीचड़ और जलजमाव हो गया है, जिससे पैदल चलने वाले यात्रियों को जहाजों तक पहुंचने में भारी कठिनाई हो रही है। मुसाफिरों की इन परेशानियों को दूर करने और सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए जिलाधिकारी अलंकृता पांडेय और एसएसपी स्वयं लगातार घाटों का औचक निरीक्षण कर रहे हैं। सरकार के निर्देश पर आम यात्रियों, पैदल चलने वालों, उनके सामान, साइकिल और मोटरसाइकिल के लिए यह जहाज यात्रा पूरी तरह निशुल्क (फ्री) रखी गई है। किसी भी संभावित हादसे को रोकने के लिए नवगछिया के तिनटंगा में एनडीआरएफ और भागलपुर के बियाडा में एसडीआरएफ की टीमें तैनात हैं। जहाज के रवाना होते ही सुरक्षा नावें मुसाफिरों को स्कॉर्ट करती हैं।

यात्रियों की सुविधा के लिए घाटों पर बड़े टेंट/जर्मन हैंगर पंडाल, बैठने की कुर्सियां, पर्याप्त रोशनी और शुद्ध पेयजल की व्यवस्था की गई है। दोनों ओर के घाटों पर निःशुल्क मेडिकल कैंप लगाए गए हैं। साथ ही यात्रियों के भोजन के लिए 'जीविका दीदी की रसोई' के काउंटर भी चालू कर दिए गए हैं। आपातकालीन स्थिति और किसी भी प्रकार की सहायता के लिए 24 घंटे कार्यरत जिला आपदा नियंत्रण कक्ष को एक्टिव कर हेल्पलाइन नंबर जारी कर दिए गए हैं। डीएम अलंकृता पांडेय ने कहा है कि विक्रमशिला सेतु के मेंटेनेंस के कारण यातायात बंद किया गया है। यात्रियों की सुरक्षा सर्वोपरि है। सुरक्षा के नजरिए से अधिक सुरक्षित और बड़े क्रूज का इंतजाम किया गया है। आम मुसाफिरों, साइकिल और मोटरसाइकिल के लिए यह सेवा पूरी तरह मुफ्त रखी गई है। गंगा का जलस्तर बढ़ा हुआ है, इसलिए सुरक्षा नियमों का सख्ती से पालन कराया जा रहा है। घाटों पर सुरक्षा और सुविधा के सभी पुख्ता इंतजाम किए गए हैं। वहीं एसएसपी प्रमोद कुमार का कहना है कि पुल बंद होने के बाद सुरक्षा और रूट पेट्रोलिंग के लिए विशेष प्लान तैयार किया गया है। बियाडा घाट से लेकर जीरोमाइल तक और नवगछिया के जाह्नवी चौक घाट से मुख्य राष्ट्रीय राजमार्ग तक लाठीधारी और हथियारबंद सशस्त्र बलों की निरंतर गश्त सुनिश्चित की गई है। इसका मुख्य उद्देश्य मुसाफिरों के साथ किसी भी तरह की छिनतई या लूटपाट को रोकना, वाहनों की ओवरलोडिंग पर लगाम कसना और घाटों को पूरी तरह जाम मुक्त रखना है। पुलिस बल 24 घंटे अलर्ट मोड पर है। प्रशासन ने आम जनता से अपील की है कि वे गंगा के उफान को देखते हुए शाम 5:30 बजे की समय-सीमा का ध्यान रखें और यात्रा के लिए अतिरिक्त समय लेकर ही घरों से निकलें।

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हिन्दुस्थान समाचार / बिजय शंकर

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