विक्रमशिला सेतु पर युद्धस्तर पर पुनर्स्थापन कार्य जारी, दिसंबर तक स्थायी स्टील ट्रस ब्रिज से बहाल होगी आवाजाही
भागलपुर, 23 अक्टूबर (हि.स.)। उत्तर और दक्षिण बिहार के साथ-साथ सीमांचल को जोड़ने वाले ऐतिहासिक विक्रमशिला सेतु पर इन दिनों कायाकल्प का काम बेहद तेजी से चल रहा है। मई महीने में स्लैब क्षतिग्रस्त होने के बाद वैकल्पिक रूप से लगाए गए अस्थायी बेली ब्रिज को सितंबर के अंत में पूरी तरह हटा दिया गया है और अब 1 अक्टूबर से आगामी 3 महीनों के लिए पुल पर हर प्रकार के वाहनों का परिचालन पूरी तरह बंद कर दिया गया है।
पथ निर्माण निगम और विशेषज्ञ एजेंसियों की टीमें 24 घंटे काम कर रही हैं ताकि तय समय सीमा तक पुल को पूरी तरह सुरक्षित बनाकर दोबारा खोला जा सके। बिहार कैबिनेट द्वारा स्वीकृत 126.26 करोड़ रुपये के भारी-भरकम बजट से इस बार पुल की स्थायी मरम्मत की जा रही है। मरम्मत कार्य को बेहद आधुनिक और वैज्ञानिक तरीके से अंजाम दिया जा रहा है। महाराष्ट्र की विशेषज्ञ एजेंसी ‘मैटे एसोसिएट्स’ द्वारा चिन्हित कमजोर और क्षतिग्रस्त कंक्रीट स्लैबों को तोड़ने का काम पूरा कर लिया गया है। अब दिल्ली की विख्यात ‘मंगलम फर्म’ ने पुनर्स्थापन के अगले चरण का खाका खींचा है, जिसके तहत क्षतिग्रस्त हिस्सों पर एक मजबूत और स्थायी ‘स्टील ट्रस ब्रिज’ का निर्माण किया जा रहा है।
इसके अलावा पुल के सुपरस्ट्रक्चर का वजन कम करने के लिए वर्षों पुरानी आरसीसी रेलिंग और फुटपाथ को काटकर हटाया जा रहा है, जिसकी जगह सुहानी प्रोजेक्ट्स द्वारा हल्की और बेहद मजबूत स्टील रेलिंग लगाई जाएगी। इस बार प्रशासन केवल मरम्मत ही नहीं, बल्कि भविष्य की सुरक्षा को लेकर भी बेहद गंभीर है। पहली बार पुराने विक्रमशिला सेतु पर आधुनिक ‘ब्रिज हेल्थ मॉनीटरिंग सिस्टम’ लगाने का बड़ा फैसला लिया गया है। यह डिजिटल सिस्टम चौबीसों घंटे पुल की संरचनात्मक स्थिति और किसी भी संभावित खतरे (जैसे दरारें या झुकाव) पर बारीकी से नजर रखेगा। किसी भी प्रकार की गड़बड़ी होने पर यह सिस्टम प्रशासन को समय से पहले ही डिजिटल अलर्ट भेज देगा, जिससे भविष्य में बड़े हादसों को रोका जा सकेगा। वहीं सड़क मार्ग पूरी तरह ठप होने के कारण जिला प्रशासन द्वारा बियाडा, बाबूपुर और जाह्नवी चौक घाटों के बीच आम लोगों की सुविधा के लिए 12 जहाजों और रो-रो वेसल्स के माध्यम से मुफ्त स्टीमर सेवा संचालित की जा रही है।
मोटरसाइकिल और आम यात्री इसी जलमार्ग के सहारे गंगा पार कर रहे हैं। हालांकि, इस वैकल्पिक व्यवस्था पर अचानक संकट के बादल मंडराने लगे हैं। जहाज संचालकों और मालिकों ने जिला प्रशासन को चेतावनी दी है कि यदि उनके लगभग 50 लाख रुपये के पुराने बकाए का तुरंत भुगतान नहीं किया गया, तो वे किसी भी समय इस फेरी सेवा को ठप कर सकते हैं। यदि ऐसा हुआ, तो सीमांचल और उत्तर बिहार जाने वाले लाखों रेल और सड़क यात्रियों की परेशानी कई गुना बढ़ सकती है। भागलपुर जिला प्रशासन और पुल निर्माण निगम के अधिकारी लगातार मौके पर कैंप कर चौबीसों घंटे चल रहे कार्यों की मॉनीटरिंग कर रहे हैं। अधिकारियों का स्पष्ट कहना है कि मकर संक्रांति से पहले या दिसंबर के अंतिम सप्ताह तक हर हाल में स्थायी पुल पर यातायात सुचारू करने का लक्ष्य है। इसके साथ ही, समानांतर बन रहे नए फोरलेन पुल का काम भी तेजी से आगे बढ़ाया जा रहा है, जिसे साल 2027 तक पूरा करने का निर्देश दिया गया है ताकि भागलपुर वासियों को जाम और जर्जर पुलों की समस्या से हमेशा के लिए मुक्ति मिल सके।
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हिन्दुस्थान समाचार / बिजय शंकर

