विक्रमशिला सेतु ध्वस्त, सब्जी और केला कारोबार प्रभावित

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विक्रमशिला सेतु ध्वस्त, सब्जी और केला कारोबार प्रभावित


भागलपुर, 10 मई (हि.स.)। पूर्वी बिहार और सीमांचल का लाइफलाइन माने जाने वाले विक्रमशिला सेतु के क्षतिग्रस्त होने के बाद से भागलपुर की व्यापारिक व्यवस्था पूरी तरह बदल गई है। विशेषकर सब्जी और केला कारोबार पर इसका बड़ा असर पड़ा है।

उल्लेखनीय है कि भागलपुर हरी सब्जियों और केले का एक बड़ा बाजार है, जहां गंगा पार के इलाकों से रोजाना भारी मात्रा में सामान आता था। पहले प्रतिदिन हजारों क्विंटल सब्जियां गंगा पार से भागलपुर पहुंचती थीं, लेकिन पुल क्षतिग्रस्त होने के बाद स्थिति काफी खराब हो गई है। अब सब्जी और केला कारोबारियों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। कई व्यापारी कम दाम में ही गंगा पार के इलाकों में अपनी उपज बेचने को मजबूर हो गए हैं। गंगा पार से आने वाली अलग-अलग किस्म की सब्जियों की आवक लगभग ठप हो गई है। इतना ही नहीं, भागलपुर बाजार में केले के सबसे बड़े सप्लायर नवगछिया के किसान थे। पहले सुबह 6 बजे से ही केला व्यापारी पुल के रास्ते साइकिल और अन्य वाहनों से बाजार पहुंचने लगते थे, लेकिन अब यह व्यवस्था पूरी तरह प्रभावित हो चुकी है।

सब्जी कारोबारियों का कहना है कि भागलपुर उनके लिए सबसे बड़ा बाजार था। यहां की मंडियों में सुबह 4 बजे तक सब्जियां पहुंच जाती थीं, जहां से छोटे व्यापारी खरीदकर अलग-अलग जगहों पर बेचते थे। इससे सामान आसानी से बिक जाता था और अच्छे दाम भी मिलते थे। लेकिन अब सब्जी लाने में काफी परेशानी हो रही है। बहुत कम मात्रा में सब्जियां गंगा पार से आ पा रही हैं, जिसके कारण बाजार में कीमत काफी बढ़ गए हैं।

उल्लेखनीय है कि बिहार के भागलपुर में विक्रमशिला सेतु का एक हिस्सा (पिलर संख्या 133 के पास) 4 मई 2026 की रात टूटकर गंगा नदी में समा गया था। जिससे भागलपुर और नवगछिया के बीच सीधा संपर्क टूट गया है। इस मुख्य मार्ग के ठप होने से हरी सब्जी, दूध और केलों की भारी किल्लत हो गई है और दाम भी बढ़ गए हैं। नवगछिया से आने वाले हज़ारों क्विंटल सब्जी और केले का शहर आना बंद हो गया है। सब्जी और फल व्यापारियों को भारी नुकसान हो रहा है, माल समय पर न पहुंचने से कालाबाजारी की आशंका है। पुल के दोनों तरफ वाहनों की लंबी कतारें लग गई हैं। लोगों को नाव का सहारा लेना पड़ रहा है। उधर

जिलाधिकारी ने माल के आवागमन के लिए बड़े मालवाहक जहाज (स्टीमर) की व्यवस्था करने की योजना बनाई है, ताकि सब्जी और अन्य सामान की किल्लत कम की जा सके। पुल को चालू होने में 3-4 महीने तक का समय लग सकता है। प्रशासन ने लोगों से मुंगेर के रास्ते या नाव से यात्रा करने की सलाह दी है।

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हिन्दुस्थान समाचार / बिजय शंकर

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