ज्ञान भारतम् मिशन के तहत सारण में 3400 दस्तावेजों का हुआ डिजिटलीकरण
सारण, 18 अप्रैल (हि.स.)। जिले की ऐतिहासिक और सांस्कृतिक विरासत को सहेजने की दिशा में जिला प्रशासन ने एक पहल की है। जिलाधिकारी वैभव श्रीवास्तव की अध्यक्षता में ज्ञान भारतम् मिशन के अंतर्गत पांडुलिपियों के संरक्षण और उनके डिजिटलीकरण को लेकर एक उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक आयोजित की गई। इस बैठक में जयप्रकाश विश्वविद्यालय के विशेषज्ञों, शोधार्थियों, विभिन्न धार्मिक संगठनों और सांस्कृतिक संस्थाओं के प्रतिनिधियों ने भाग लिया। बैठक को संबोधित करते हुए जिलाधिकारी ने स्पष्ट किया कि इस मिशन का उद्देश्य दुर्लभ और प्राचीन ज्ञान को नष्ट होने से बचाना है।
उन्होंने जनता की शंकाओं को दूर करते हुए आश्वस्त किया कि पांडुलिपियों का मूल स्वामित्व उनके धारकों के पास ही सुरक्षित रहेगा। प्रशासन केवल तकनीक के माध्यम से उन्हें डिजिटल लाइब्रेरी का हिस्सा बना रहा है, ताकि नमी और दीमक जैसी समस्याओं से हमारी विरासत खत्म न हो जाए। समीक्षा के दौरान बताया गया कि सारण जिले ने इस मिशन में अग्रणी भूमिका निभाई है। अब तक लगभग 3400 दुर्लभ पांडुलिपियों को सफलतापूर्वक डिजिटल प्लेटफॉर्म पर अपलोड किया जा चुका है। इस कार्य में सहयोग करने वाले आठ नागरिकों को जिलाधिकारी द्वारा प्रशस्ति पत्र देकर सम्मानित भी किया गया।
बैठक में विशेषज्ञों ने मिशन को और अधिक प्रभावी बनाने के लिए कई तकनीकी सुझाव दिए जिन्हें प्रशासन ने भविष्य की कार्ययोजना में शामिल करने का निर्णय लिया है।
जिलाधिकारी वैभव श्रीवास्तव ने सारण के आम जनमानस से अपील करते हुए कहा कि पांडुलिपियाँ हमारा गौरवशाली इतिहास है। वक्त की मार से इन्हें बचाने का एकमात्र तरीका डिजिटलीकरण है। उन्होंने अनुरोध किया कि यदि किसी भी व्यक्ति या संस्था के पास प्राचीन ग्रंथ पांडुलिपि या ऐतिहासिक दस्तावेज उपलब्ध है तो वह जिला प्रशासन से संपर्क करें। यह सहयोग आने वाली पीढ़ियों के लिए ज्ञान के भंडार को सुरक्षित रखने में मिल का पत्थर साबित होगा।
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हिन्दुस्थान समाचार / धनंजय कुमार

