नालंदा जिले में जैविक और कीट रोग प्रबंधन के लिए 40 तकनीकी सहायक को किया गया प्रशिक्षित
नालंदा, बिहारशरीफ 05 जून (हि.स.)। नालंदा जिले में खेत बचाओ अभियान के प्रभावी क्रियान्वयन एवं किसानों के बीच व्यापक जागरूकता प्रसार के उद्देश्य से जिला कृषि पदाधिकारी डाॅ नितेश कुमार की अध्यक्षता में शुक्रवार को जिला स्तरीय प्रशिक्षण एवं समीक्षा बैठक का आयोजन दीप प्रज्वलित कर किया गया।
कार्यक्रम में डाॅ सीमा कुमारी, वरीय वैज्ञानिक-सह-प्रधान, कृषि विज्ञान केन्द्र, हरनौत उमेश नारायण उमेश, वरीय वैज्ञानिक-सह-प्रधान, कृषि विज्ञान केन्द्र, हरनौत अभिमन्यु कुमार, उप निदेशक(कृषि अभियंत्रण) भुदेव राणा, सहायक निदेशक (शष्य), भूमि संरक्षण विशेषज्ञ के रूप में कृषि विज्ञान केंद्र के वैज्ञानिकों ने भाग लिया। इसके अतिरिक्त कृषि कर्मियों, कृषि समन्वयकों, किसान सलाहकारों, प्रगतिशील एवं उत्कृष्ट किसानों के साथ-साथ जिले के खाद विक्रेताओं तथा विभिन्न खाद आपूर्तिकर्ता कंपनियों के प्रतिनिधियों ने भी सक्रिय सहभागिता की।
जिला कृषि पदाधिकारी ने बताया कि कृषि भूमि, मृदा स्वास्थ्य एवं प्राकृतिक संसाधनों का संरक्षण वर्तमान समय की सबसे बड़ी आवश्यकता है। जिसके लिए 40 कृषि तकनीकी सहायक को प्रशिक्षण दिया गया है। उन्होंने कहा कि खेत बचाओ अभियान केवल एक सरकारी कार्यक्रम नहीं, बल्कि किसानों और कृषि क्षेत्र के सतत विकास से जुड़ा जन-आंदोलन है। इसके माध्यम से किसानों को मृदा संरक्षण, संतुलित उर्वरक उपयोग, जल संरक्षण, फसल अवशेष प्रबंधन तथा पर्यावरण-अनुकूल कृषि पद्धतियों के प्रति जागरूक किया जाना है।
कार्यक्रम के दौरान कृषि विज्ञान केंद्र के वैज्ञानिकों ने किसानों एवं कृषि कर्मियों को मृदा स्वास्थ्य प्रबंधन, फसल विविधीकरण, जलवायु-अनुकूल कृषि तकनीकों, जैविक एवं प्राकृतिक खेती, कीट एवं रोग प्रबंधन तथा आधुनिक कृषि तकनीकों के उपयोग संबंधी विषयों पर विस्तार से प्रशिक्षण दिया। वैज्ञानिकों ने बताया कि लगातार रासायनिक उर्वरकों एवं कीटनाशकों के असंतुलित प्रयोग से भूमि की उर्वरता प्रभावित होती है, जिससे उत्पादन क्षमता में कमी आती है। इसलिए किसानों को वैज्ञानिक अनुशंसाओं के अनुरूप कृषि कार्य करने की आवश्यकता है।
प्रशिक्षण सत्र के दौरान किसानों को मृदा जांच के महत्व, फसल चक्र अपनाने, हरी खाद के उपयोग, जैविक खाद निर्माण, सूक्ष्म पोषक तत्वों के संतुलित प्रयोग तथा वर्षा जल संरक्षण की तकनीकों की जानकारी दी गई। साथ ही उन्हें यह भी बताया गया कि बदलती जलवायु परिस्थितियों में कृषि उत्पादन को सुरक्षित रखने के लिए नवीन कृषि तकनीकों एवं वैज्ञानिक सलाह को अपनाना अत्यंत आवश्यक है।
बैठक में उपस्थित कृषि कर्मियों को निर्देश दिया गया कि वे अपने-अपने कार्यक्षेत्र में गांव स्तर पर विशेष जागरूकता अभियान चलाएं तथा खेत बचाओ अभियान के उद्देश्यों एवं लाभों की जानकारी प्रत्येक किसान तक पहुंचाएं। उन्हें किसानों के साथ नियमित बैठक, किसान चौपाल, प्रशिक्षण कार्यक्रम एवं जनसंपर्क गतिविधियों के माध्यम से अभियान को जन-जन तक पहुंचाने का दायित्व सौंपा गया।
कार्यक्रम के दौरान किसानों द्वारा कृषि संबंधी विभिन्न समस्याओं एवं सुझावों को भी रखा गया, जिनका विशेषज्ञों द्वारा समाधान प्रस्तुत किया गया।
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हिन्दुस्थान समाचार / प्रमोद पांडे

