टीआरई 4 अभ्यर्थियों द्वारा आक्रोश मार्च के साथ समाहरणालय घेराव कार्यक्रम आयोजित
सहरसा, 01 जून (हि.स.)। बीपीएससी टीआरई 4 शिक्षक बहाली को लेकर लंबे समय से नोटिफिकेशन जारी नहीं होने तथा पूर्व निर्धारित डेढ़ लाख सीटों में लगातार कटौती किए जाने के विरोध में सहरसा में सोमवार को बेरोजगार आक्रोश मार्च सह समाहरणालय घेराव कार्यक्रम आयोजित किया गया।
एनएसयूआई के पूर्व राष्ट्रीय संयोजक मनीष कुमार के नेतृत्व में आयोजित यह मार्च जिला परिषद प्रांगण से प्रारंभ होकर डीबी रोड, थाना चौक, वीर कुंवर सिंह चौक, रविदास चौक, चंद्रशेखर आजाद चौक, अंबेडकर चौक होते हुए इंदिरा चौक के रास्ते कलेक्ट्रेट पहुंचा, जहां प्रदर्शनकारियों ने जिलाधिकारी के माध्यम से मुख्यमंत्री, बिहार सरकार के नाम मांग पत्र सौंपा।
मार्च में शामिल अभ्यर्थियों एवं युवाओं ने सरकार के खिलाफ जोरदार नारेबाजी करते हुए कहा कि बिहार के लाखों छात्र-छात्राएं बीपीएससी टीआरई 4 शिक्षक बहाली अधिसूचना का लंबे समय से इंतजार कर रहे हैं, लेकिन अब तक नोटिफिकेशन जारी नहीं किया गया है।
इससे अभ्यर्थियों में भारी निराशा एवं आक्रोश व्याप्त है। प्रदर्शनकारियों की प्रमुख मांगों में बीपीएससी टीआरई-4 का नोटिफिकेशन अविलंब जारी करने, पूर्व निर्धारित डेढ़ लाख सीटों पर शिक्षक बहाली सुनिश्चित करने,बीपीएससी टीआरई-4 में पीटी एवं मेन्स की बाध्यता समाप्त करने, आंदोलनरत लगभग पांच हजार छात्रों पर दर्ज मुकदमे वापस लिए जाने की मांगें शामिल है।
बेरोजगार आक्रोश मार्च को संबोधित कर छात्र नेता मनीष कुमार ने कहा कि सरकार लगातार शिक्षक बहाली की सीटों में कटौती कर युवाओं के भविष्य के साथ खिलवाड़ कर रही है। बीपीएससी टीआरई 4 को लेकर यह लड़ाई अब निर्णायक मोड़ पर पहुंच चुकी है। पिछले तीन वर्षों से बहाली लंबित रहने के कारण लाखों अभ्यर्थियों की उम्र सीमा समाप्त हो चुकी है और छात्र अब “करो या मरो” की स्थिति में पहुंच गए हैं।
छात्र नेता मनीष ने कहा कि बिहार के विद्यालयों में लाखों शिक्षकों के पद खाली पड़े हैं तथा शिक्षकों की भारी कमी के बावजूद सरकार लगातार टीआरई-4 बहाली में देरी कर रही है। रोजगार और अपने अधिकार की मांग को लेकर शांतिपूर्ण प्रदर्शन कर रहे युवाओं पर पुलिस द्वारा की गई कार्रवाई बेहद दुर्भाग्यपूर्ण और अलोकतांत्रिक है।
छात्र नेता आशुतोष कुमार रितेश कहा कि अभ्यर्थियों को सड़कों पर घसीटकर पीटना तथा महिलाओं और युवाओं के साथ दुर्व्यवहार करना लोकतंत्र पर हमला है। बिहार के मेहनती और योग्य नौजवान नौकरी मांग रहे हैं, लेकिन सरकार उन्हें रोजगार देने के बजाय लाठियां दे रही है। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि सरकार जल्द मांगों पर निर्णय नहीं लेती है तो चरणबद्ध आंदोलन को और तेज किया जाएगा।
हिन्दुस्थान समाचार / अजय कुमार

