नालंदा कॉलेज पहुंचे कुलपति ने देर से आने वाले शिक्षकों को लगाई फटकार

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नालंदा कॉलेज पहुंचे कुलपति ने देर से आने वाले शिक्षकों को लगाई फटकार


नालंदा, बिहारशरीफ 14 मई (हि.स.)। पाटलिपुत्र विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. उपेंद्र प्रसाद सिंह ने गुरुवार को नालंदा कॉलेज का औचक निरीक्षण किया। सुबह लगभग दस बजे कुलपति के अचानक महाविद्यालय पहुंचने से परिसर में हड़कंप की स्थिति उत्पन्न हो गई। निरीक्षण के दौरान उन्होंने कॉलेज की शैक्षणिक व्यवस्था, प्रशासनिक कार्यप्रणाली, विभागीय गतिविधियों तथा शिक्षकों की उपस्थिति का गहन जायजा लिया।कुलपति ने विभिन्न विभागों में जाकर विभागाध्यक्षों एवं शिक्षकों से शैक्षणिक गतिविधियों, कक्षाओं के नियमित संचालन, विद्यार्थियों की उपस्थिति तथा पठन-पाठन की गुणवत्ता के संबंध में विस्तृत जानकारी प्राप्त की।

निरीक्षण के दौरान समय से अनुपस्थित रहने वाले कुछ शिक्षकों को उन्होंने फटकार भी लगाई और नियमित रूप से समय पर उपस्थित होकर गुणवत्तापूर्ण शिक्षा देने का निर्देश दिया।इस दौरान कुलपति विशेष रूप से बीएड विभाग पहुंचे, जहां उन्होंने छात्र-छात्राओं के साथ संवाद स्थापित किया। उन्होंने लगभग 15 से 20 मिनट तक विद्यार्थियों को संबोधित करते हुए शिक्षा के बदलते स्वरूप, आधुनिक शिक्षण पद्धति तथा शिक्षक की भूमिका पर विस्तार से चर्चा की। उन्होंने कहा कि आज का शिक्षक केवल पाठ्यक्रम पूरा करने वाला व्यक्ति नहीं, बल्कि समाज निर्माण की आधारशिला होता है।अपने प्रेरणादायी संबोधन में कुलपति ने विद्यार्थियों को केवल परीक्षा पास करने तक सीमित नहीं रहने की सलाह दी।

उन्होंने कहा कि निरंतर अध्ययन, ज्ञानार्जन और आत्मविकास ही सफलता की वास्तविक कुंजी है। विद्यार्थियों को स्पष्ट लक्ष्य निर्धारित कर निरंतर मेहनत करने का आह्वान करते हुए उन्होंने कहा कि जिन युवाओं का लक्ष्य स्पष्ट होता है, वे कठिन परिस्थितियों में भी सफलता प्राप्त कर लेते हैं।कुलपति ने समय प्रबंधन के महत्व पर बल देते हुए विद्यार्थियों से नियमित अध्ययन करने, सकारात्मक सोच विकसित करने तथा अनुशासित जीवन अपनाने की अपील की। उन्होंने कहा कि आज के प्रतिस्पर्धात्मक दौर में केवल डिग्री हासिल कर लेना पर्याप्त नहीं है, बल्कि व्यक्तित्व विकास, व्यवहार कुशलता, नैतिकता और संवेदनशीलता भी उतनी ही आवश्यक है।

उन्होंने छात्र-छात्राओं को सामाजिक दायित्वों के प्रति सजग रहने तथा मानवीय मूल्यों को जीवन में आत्मसात करने की प्रेरणा दी। साथ ही उन्होंने कहा कि शिक्षा का उद्देश्य केवल रोजगार प्राप्त करना नहीं, बल्कि एक जिम्मेदार और जागरूक नागरिक तैयार करना भी है।निरीक्षण के दौरान कुलपति ने महाविद्यालय परिसर में स्वच्छता, अनुशासन और शैक्षणिक वातावरण को और अधिक मजबूत बनाने पर बल दिया। उन्होंने शिक्षकों को नियमित रूप से कक्षाएं संचालित करने तथा विद्यार्थियों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा उपलब्ध कराने का निर्देश दिया। साथ ही विद्यार्थियों के सर्वांगीण विकास के लिए सह-शैक्षणिक गतिविधियों को बढ़ावा देने की बात कही।

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हिन्दुस्थान समाचार / प्रमोद पांडे

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