नालंदा जिले में पोर्टल के माध्यम से राजस्व अभिलेखों की सत्यापित प्रति प्राप्त करने की शुरुआत

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नालंदा जिले में पोर्टल के माध्यम से राजस्व अभिलेखों की सत्यापित प्रति प्राप्त करने की शुरुआत


नालंदा, बिहारशरीफ 20 जनवरी (हि.स.)।जिला मुख्यालय स्थित समाहरणालय कार्यालय स्थित भू अभिलेखागार में आज मंगलवार को पोर्टल के माध्यम से राजस्व अभिलेखों की सत्यापित प्रति प्राप्त करने की शुरुआत की गई है।

इस संबंध में जिला कार्यालय प्रतिनिधि ने बताया किनालंदा जिले में राजस्व अभिलेखों की सत्यापित प्रति प्राप्त करने के लिए संबंधित अभिलेखागार में बिहार अभिलेख हस्तक 1960 द्वारा प्रावधानित प्रपत्र में किसी भी सत्यापित प्रतिलिपि हेतु स्टाम्प शुल्क का भुगतान कर आवेदन दायर करने की प्रक्रिया की जाती है। इसके लिए आवेदक को आवेदन प्रपत्र में अपना नाम, पता के साथ वांछित कागजात, संबंधित कार्यालय जहां से सत्यापित प्रति प्राप्त करना है उसमें भी आवेदक का नाम पता कब तक दस्तावेज प्राप्त करना है जैसे विवरण भरकर कार्यालय में जमा करना होता है, जहां शुल्क के रूप में निर्धारित राशि एवं कुल पृष्ठ के हिसाब से निर्धारित राशि के बराबर का स्टाम्प आवेदन के साथ लगाने की सूचना कार्यालय द्वारा दी जाती है एवं आवेदन प्राप्त किया जाता है।

प्राप्त आवेदनों का विवरण एक पंजी में दर्ज करते हुए प्रभारी लिपिक द्वारा पदाधिकारी से आदेश प्राप्त करने के उपरान्त मूल दस्तावेज की छायाप्रति की सत्यापित प्रति जिसपर आवेदन प्राप्ति की शुल्क जमा करने की आवेदन निर्गत की शुल्क का ब्योरा अंकित होता है, जिसे आवेदक को हस्तगत कराई जाती है। इस पूरी प्रक्रिया में आवेदक को कई बार कार्यालय में आना पड़ता था एवं सत्यापित प्रति प्राप्त करने में सामान्यतः 7-14 दिनों का समय लग जाता है। जहां दूर-दराज के इलाके के लोगों को बहुत कठिनाई होती है।इस प्रक्रिया की सुधार के लिए भू अभिलेखागार मेंभू-अभिलेख पोर्टल के माध्यम से राजस्व अभिलेखों की स्कैन की गई प्रतियाँ उपलब्ध कराई गई हैं एवं उक्त पोर्टल के माध्यम से आवेदक आवश्यक शुल्क का भुगतान कर उक्त दस्तावेजों की डिजिटल हस्ताक्षरित प्रतियों प्राप्त कर सकते हैं एवं वर्तमान में बड़ी संख्या में आवेदकों द्वारा इस सुविधा का लाभ भी उठाया जा रहा है। राजस्व पर्षद, बिहार, पटना की अधिसूचना संख्या-831 के द्वारा बिहार अभिलेखागार हस्तक 1960 के अध्याय-8 अन्तर्गत नियम-297 (क) स्थापित किया गया है-297 (क) प्रमाणित प्रतिलिपियाँ - ऑनलाइन विधि से निर्गत किए जाने वाले सभी अभिलेखों आदि की उन प्रतियों को जो सक्षम पदाधिकारी द्वारा डिजिटली हस्ताक्षरित की गई हों उसे प्रमाणित प्रतिलिपि भी मानी जायेंगी।इसके अतिरिक्त भू-अभिलेख पोर्टल में यह व्यवस्था भी की गयी है कि यदि कोई वांछित राजस्व अभिलेख ऑनलाइन उपलब्ध नहीं है तो आवेदक ऑनलाइन ही उसकी माँग प्रेषित कर सकते हैं। उनकी माँग एवं उपलब्धता के आधार पर उक्त अभिलेख की डिजिटल हस्ताक्षरित प्रति उन्हें भू-अभिलेख पोर्टल के माध्यम से ही उपलब्ध करायी जाएगी।पूर्व से प्रचलित राजस्व अभिलेखों की सत्यापित प्रति (नकल) निर्गत करने संबंधित भौतिक प्रणाली को जारी रखने की अब कोई आवश्यकता भी नहीं है। इसके लिए चालु सत्र की 1जनवरी से राजस्व अभिलेखों के संदर्भ में उक्त व्यवस्था को समाप्त कर दिया गया है। वहीं 1जनवरी के पश्चात सभी प्रकार के राजस्व अभिलेखों की केवल डिजिटल हस्ताक्षरित प्रतियों ही भू-अभिलेख पोर्टल के माध्यम से निर्गत की जाएँगी, जो सत्यापित प्रति के रूप में विधिमान्य हैं।

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हिन्दुस्थान समाचार / प्रमोद पांडे

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