नालंदा जिले में इंडिया थिंक टैंक फोरम के 8वें संस्करण का शुभारंभ
बिहारशरीफ, 12 जनवरी (हि.स.)।
नालंदा विश्वविद्यालय में सोमवार को ऑब्ज़र्वर रिसर्च फ़ाउंडेशन के सहयोग से इंडिया थिंक टैंक फोरम के 8वें संस्करण का शुभारंभ किया गया।
दो दिवसीय इस फोरम में देशभर के प्रमुख नीति-विशेषज्ञ, शिक्षाविद् और संस्थागत प्रतिनिधि “बदलती दुनिया में भारत: आंतरिक सुदृढ़ता का निर्माण” विषय पर मंथन किया गया । यह विषय तेज़ी से बदलते वैश्विक परिदृश्य को दर्शाता है और इस बात पर ज़ोर देता है कि इन परिवर्तनों तथा उन पर भारत की प्रतिक्रियाओं को केवल अकादमिक दृष्टि तक सीमित न रखा जाए।
उद्घाटन सत्र में स्वागत वक्तव्य के दौरान वैश्विक चुनौतियों के समाधान हेतु एकात्म दृष्टि और साझा उत्तरदायित्व की आवश्यकता पर बल दिया गया, जो नालंदा की संवाद और विमर्श की प्राचीन परंपरा से प्रेरित है। 20 वर्ष: ब्रिक्स” विषय पर आयोजित विशेष संवाद सत्र में प्रो. सचिन चतुर्वेदी, कुलपति, नालंदा विश्वविद्यालय तथा डॉ. समीर सरन, अध्यक्ष, ऑब्ज़र्वर रिसर्च फ़ाउंडेशन के बीच विचार-विमर्श हुआ, जिसका संचालन डॉ. हर्ष वी. पंत, उपाध्यक्ष, ने किया।
इस चर्चा में आचार्य नागार्जुन, चतुष्कोटि और शून्यता की अवधारणा के माध्यम से प्राकृतिक और मानवीय विज्ञानों के बीच की दूरी को पाटने पर प्रकाश डाला गया है वक्ताओं ने नालंदा की बौद्धिक परंपरा, वाद-विवाद संस्कृति के पुनर्जीवन, “ज्ञान भारतम्” के विमोचन, नालंदा विश्वविद्यालय पुस्तकालय की समृद्ध विरासत तथा जलवायु परिवर्तन और सततता को विश्वविद्यालय की मूल प्रतिबद्धता के रूप में रेखांकित किया है ।
ब्रिक्स, जलवायु वित्त, बहुपक्षीय विकास बैंकों और वैश्विक दक्षिण पर केंद्रित चर्चाओं में ब्राज़ील शिखर सम्मेलन में प्रधानमंत्री के वक्तव्यों का उल्लेख करते हुए सहयोग-आधारित लचीलापन, आंदोलन, वैज्ञानिक-सामाजिक उत्तरदायित्व और नवाचार-सततता के समन्वय पर जोर दिया गया है।
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हिन्दुस्थान समाचार / प्रमोद पांडे

