पूर्व नियोजित शिक्षकों के हक की लड़ाई तेज, शिक्षा विभाग को कार्रवाई का निर्देश

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पूर्व नियोजित शिक्षकों के हक की लड़ाई तेज, शिक्षा विभाग को कार्रवाई का निर्देश


किशनगंज, 22 अक्टूबर (हि.स.)। बिहार के सरकारी विद्यालयों में वर्षों तक सेवा देने के बाद बीपीएससी के माध्यम से विद्यालय अध्यापक बने पूर्व नियोजित शिक्षकों के हक और सम्मान की लड़ाई अब आगे बढ़ती नजर आ रही है। किशनगंज के सांसद डॉ. मोहम्मद जावेद आजाद की पहल पर मुख्यमंत्री सचिवालय ने इस मामले में शिक्षा विभाग को आवश्यक कार्रवाई करने का निर्देश दिया है। सचिवालय ने पूर्व नियोजित शिक्षकों की पूर्व सेवा की गणना, सेवा निरंतरता, वित्तीय उन्नयन, प्रोन्नति और वरीयता से जुड़े मुद्दों की छानबीन कर समुचित निर्णय लेने तथा की गई कार्रवाई की जानकारी उपलब्ध कराने को कहा है।

सांसद डॉ. जावेद ने 12 अक्टूबर 2026 को मुख्यमंत्री को पत्र लिखकर इस विषय पर हस्तक्षेप करने का आग्रह किया था। इसके बाद मुख्यमंत्री सचिवालय के उप सचिव मो. इमरान ने 22 अक्टूबर 2026 को शिक्षा विभाग के सचिव को पत्र भेजकर नियमानुसार कार्रवाई करने का निर्देश दिया।

सचिवालय ने सांसद को भी इसकी सूचना प्रेषित की है। सांसद ने अपने पत्र में कहा है कि वर्ष 2006 से 2022 के बीच पंचायत और प्रखंड स्तर पर नियोजित शिक्षकों ने सीमित मानदेय और संसाधनों के बावजूद राज्य की शिक्षा व्यवस्था को सुचारु बनाए रखने में महत्वपूर्ण योगदान दिया। इनमें बड़ी संख्या ऐसे शिक्षकों की है, जिन्होंने 15 से 20 वर्षों तक सेवा दी। बाद में बीपीएससी की TRE-1.0, TRE-2.0 और TRE-3.0 परीक्षाओं में सफल होकर वे विद्यालय अध्यापक बने।सांसद का कहना है कि नई नियुक्ति के बाद पूर्व सेवा का समुचित लाभ नहीं मिलने से अनुभवी शिक्षकों को निराशा का सामना करना पड़ रहा है। वर्षों तक शिक्षा विभाग में योगदान देने के बावजूद उन्हें नए नियुक्त शिक्षकों के समान मानने से उनके अनुभव और सेवाकाल का अपेक्षित लाभ नहीं मिल पा रहा है।

डॉ. जावेद ने मुख्यमंत्री से आग्रह किया है कि नियमानुसार पूर्व सेवा को गणना में शामिल कर सेवा निरंतरता, वित्तीय उन्नयन, प्रोन्नति और वरीयता का लाभ देने के लिए आवश्यक नीतिगत निर्णय लिया जाए। अब मुख्यमंत्री सचिवालय के निर्देश के बाद शिक्षकों की निगाहें शिक्षा विभाग के अगले कदम पर टिकी हैं। हालांकि, फिलहाल पूर्व सेवा का लाभ देने संबंधी कोई अंतिम निर्णय नहीं हुआ है। विभागीय जांच और निर्णय के बाद ही शिक्षकों को संभावित लाभ की स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।

हिन्दुस्थान समाचार / धर्मेन्द्र सिंह

Livevns.news Desk
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