विश्वविद्यालय विधेयक-2026 के खिलाफ सड़क पर उतरे शिक्षक, दी चरणबद्ध आंदोलन की चेतावनी
भागलपुर, 10 अगस्त (हि.स.)। बिहार सरकार द्वारा प्रस्तावित 'बिहार राज्य विश्वविद्यालय विधेयक - 2026' के विरोध में सोमवार को विश्वविद्यालय के शिक्षकों और शिक्षकेत्तर कर्मचारियों का गुस्सा फूट पड़ा। इस काले कानून के खिलाफ भारी संख्या में शिक्षक संघ के लोग सड़क पर उतरे और सरकार के खिलाफ जमकर नारेबाजी की।
तिलकामांझी भागलपुर विश्वविद्यालय (टीएमबीयू) के ओल्ड पीजी कैंपस स्थित दिनकर भवन से एक विशाल आक्रोश मार्च निकाला गया। यह मार्च विश्वविद्यालय के विभिन्न विभागों से होते हुए प्रशासनिक भवन तक पहुंचा, जहां शिक्षकों ने विरोध प्रदर्शन कर अपनी मांगों को बुलंद किया।
आंदोलन के समर्थन में आज पूरे बिहार के कॉलेजों में शिक्षकों और कर्मचारियों ने सामूहिक अवकाश (मास कैजुअल लीव) लिया, जिससे शिक्षण कार्य पूरी तरह ठप रहा। प्रदर्शन के दौरान महाविद्यालय शिक्षक संघ के सचिव प्रोफेसर निरलेश कुमार ने सरकार की नीतियों पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा, सरकार बिहार राज्य विश्वविद्यालय अधिनियम-1976 को पूरी तरह समाप्त कर नया 'बिहार राज्य विश्वविद्यालय विधेयक-2026' लाना चाहती है।
इस नए विधेयक के लागू होने से महाविद्यालयों और विश्वविद्यालयों की बची-खुची स्वायत्तता पूरी तरह समाप्त हो जाएगी। उच्च शिक्षा व्यवस्था सीधे तौर पर सरकारी नियंत्रण में आ जाएगी, जिसे किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। प्रोफेसर निरलेश ने आगे कहा कि आज का यह आक्रोश मार्च और सामूहिक अवकाश सिर्फ एक शुरुआत है। यह लड़ाई कॉलेज और विश्वविद्यालय की स्वायत्तता को बचाने की है।
शिक्षक संघ के नेताओं ने साफ चेतावनी दी है कि यदि सरकार ने इस जनविरोधी और शिक्षा विरोधी विधेयक को तुरंत वापस नहीं लिया, तो आने वाले दिनों में यह आंदोलन और उग्र रूप लेगा। संघ ने घोषणा की है कि विधेयक वापस न होने की स्थिति में पूरे बिहार में चरणबद्ध तरीके से बड़ा आंदोलन शुरू किया जाएगा, जिसकी पूरी जिम्मेदारी राज्य सरकार की होगी। इस मौके पर विश्वविद्यालय और विभिन्न कॉलेजों के सैकड़ों शिक्षक, कर्मचारी और संघ के पदाधिकारी मौजूद रहे।
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हिन्दुस्थान समाचार / बिजय शंकर

