सुपौल में बेमौसम बारिश और ओलावृष्टि से फसलें तबाह, किसानों ने बढ़े मुआवजे की मांग उठाई

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सुपौल में बेमौसम बारिश और ओलावृष्टि से फसलें तबाह, किसानों ने बढ़े मुआवजे की मांग उठाई


सुपौल, 23 मार्च (हि.स.)। बिहार के कई जिलों में हाल के दिनों में हुई बेमौसम बारिश, तेज आंधी और ओलावृष्टि ने किसानों की मेहनत पर पानी फेर दिया है।

खासकर सुपौल, मधेपुरा, सहरसा, भागलपुर और खगड़िया जिलों में गेहूं, मक्का समेत अन्य फसलें भारी नुकसान की चपेट में आ गई हैं। सीमांचल क्षेत्र में कई जगहों पर बिजली के तार गिरने से मक्का की फसल को अतिरिक्त क्षति हुई है। इस आपदा के बाद किसानों में आक्रोश बढ़ता जा रहा है। उनका कहना है कि खेती की लागत पहले ही काफी बढ़ चुकी है, लेकिन सरकार द्वारा दिया जा रहा कृषि इनपुट अनुदान पर्याप्त नहीं है। ऐसे में नुकसान की भरपाई करना मुश्किल हो रहा है।

किसानों ने आरोप लगाया कि मुआवजा पाने की प्रक्रिया भी जटिल और समस्याओं से भरी है। ऑनलाइन आवेदन में अप-टू-डेट रसीद की अनिवार्यता, बंटाईदार किसानों को योजना से बाहर रखना और फसल क्षति के आकलन में लापरवाही जैसी दिक्कतें सामने आ रही हैं। कई स्थानों पर जांच के नाम पर भ्रष्टाचार की शिकायतें भी मिली हैं, जिससे वास्तविक किसानों तक सहायता नहीं पहुंच पा रही है।

इसी मुद्दे को लेकर कोशी नव निर्माण मंच ने मुख्यमंत्री नीतीश कुमार से हस्तक्षेप की मांग की है। मंच ने सरकार से अपील की है कि प्रभावित किसानों को शीघ्र राहत दी जाए, अनुदान राशि बढ़ाई जाए और बंटाईदार किसानों को भी इसका लाभ दिया जाए।

साथ ही, मंच ने कृषि इनपुट अनुदान के आवेदन की प्रक्रिया को सरल बनाने और फसल क्षति के निष्पक्ष आकलन के लिए सख्त निगरानी व्यवस्था लागू करने की मांग की है।

इधर, समाजसेवी सुभाष कुमार यादव ने भी जिला प्रशासन से हस्तक्षेप कर जिलाधिकारी से किसानों को शीघ्र मुआवजा दिलाने की मांग की है।

किसानों को उम्मीद है कि राज्य सरकार उनकी समस्याओं को गंभीरता से लेते हुए जल्द राहत प्रदान करेगी।

हिन्दुस्थान समाचार / विनय कुमार मिश्र

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