सरकारी डॉक्टरों की निजी प्रैक्टिस पर रोक के खिलाफ सुपौल में डॉक्टरों की बैठक

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सरकारी डॉक्टरों की निजी प्रैक्टिस पर रोक के खिलाफ सुपौल में डॉक्टरों की बैठक


सरकारी डॉक्टरों की निजी प्रैक्टिस पर रोक के खिलाफ सुपौल में डॉक्टरों की बैठक


सुपौल, 14 मई (हि.स.)। बिहार सरकार द्वारा सरकारी डॉक्टरों की निजी प्रैक्टिस पर रोक लगाने की तैयारी को लेकर राज्यभर के चिकित्सकों में नाराजगी बढ़ती जा रही है।

इसी मुद्दे पर गुरुवार को सुपौल सदर अस्पताल परिसर स्थित सीएस कार्यालय वेश्म में जिले के सरकारी डॉक्टरों की एक महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई। बैठक में जिले के विभिन्न अस्पतालों से बड़ी संख्या में चिकित्सक शामिल हुए और सरकार के प्रस्तावित फैसले पर कड़ी आपत्ति जताई।

बैठक के दौरान डॉक्टरों ने कहा कि सरकार बिना चिकित्सकों से संवाद किए एकतरफा निर्णय लेने की कोशिश कर रही है, जिससे डॉक्टरों के बीच असंतोष का माहौल बन गया है। चिकित्सकों ने कहा कि किसी भी बड़े फैसले से पहले संबंधित पक्षों से चर्चा करना जरूरी होता है, लेकिन इस मामले में ऐसा नहीं किया गया।

डॉक्टरों ने स्पष्ट कहा कि सरकारी अस्पतालों में पहले से ही संसाधनों की कमी, मरीजों का अत्यधिक दबाव और लंबी ड्यूटी जैसी कई चुनौतियां मौजूद हैं। ऐसे में निजी प्रैक्टिस पर पूरी तरह रोक लगाने का निर्णय व्यावहारिक कठिनाइयों को और बढ़ा सकता है। उनका कहना था कि सरकार को चिकित्सकों की कार्य परिस्थितियों और आवश्यकताओं को भी समझना चाहिए।

बैठक में मौजूद चिकित्सकों ने कहा कि यदि सरकार बातचीत के जरिए कोई समाधान निकालती तो स्थिति बेहतर हो सकती थी। डॉक्टरों ने यह भी कहा कि वे स्वास्थ्य सेवाओं के प्रति अपनी जिम्मेदारी समझते हैं, लेकिन उनकी समस्याओं और मांगों की अनदेखी उचित नहीं है। चिकित्सकों ने बताया कि इस फैसले के विरोध में आगामी 17 मई को पटना में राज्यस्तरीय सम्मेलन आयोजित किया जाएगा, जिसमें बिहार के विभिन्न जिलों से सरकारी डॉक्टर शामिल होंगे। सम्मेलन में आगे की रणनीति तय की जाएगी और सरकार के समक्ष चिकित्सकों की मांगों को मजबूती से रखा जाएगा। डॉक्टरों ने संकेत दिया कि यदि उनकी मांगों पर विचार नहीं किया गया तो आंदोलन को और व्यापक रूप दिया जा सकता है।

इस मामले में सुपौल के सिविल सर्जन ने कहा कि सरकारी डॉक्टरों की निजी प्रैक्टिस पर रोक को लेकर अभी तक विभाग की ओर से कोई आधिकारिक निर्देश प्राप्त नहीं हुआ है। उन्होंने कहा कि सिविल सर्जन, संगठन के पदेन अध्यक्ष होते हैं और यदि डॉक्टरों की ओर से कोई लिखित मांगपत्र या सूचना दी जाती है, तो उसे सरकार तक पहुंचाने का प्रयास किया जाएगा।

हिन्दुस्थान समाचार / विनय कुमार मिश्र

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