सब हिमालयन रिसर्च इंस्टीट्यूट द्वारा ज्ञान संगम लिटरेरी कल्चरल फेस्टिवल का शुभारंभ

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सब हिमालयन रिसर्च इंस्टीट्यूट द्वारा ज्ञान संगम लिटरेरी कल्चरल फेस्टिवल का शुभारंभ


सब हिमालयन रिसर्च इंस्टीट्यूट द्वारा ज्ञान संगम लिटरेरी कल्चरल फेस्टिवल का शुभारंभ


पूर्णियां, 24 अप्रैल (हि.स.)।

सब हिमालयन रिसर्च इंस्टीट्यूट द्वारा आयोजित तीन दिवसीय ज्ञान संगम लिटरेरी कल्चरल फेस्टिवल का शुभारंभ विद्या विहार आवासीय विद्यालय के रमेश चंद्र मिश्रा सभागार में मृत्युंजय कुमार सिंह, प्रो मणीन्द्रनाथ ठाकुर, प्रो रत्नेश्वर मिश्र, डॉ के श्रीनिवास राव, प्रो देवेंद्र कुमार चौबे, सन्तोष सिंह, राजेश मिश्रा, गिरिन्द्रनाथ झा, रंजीत कुमार पॉल इत्यादि द्वारा आज विधिवत दीप प्रज्ज्वलन कर किया गया।

ज्ञान संगम लिटरेरी कल्चरल फेस्टिवल के अतिथियों का अभिनंदन विद्या विहार समूह के राजेश मिश्रा, सब हिमालयन रिसर्च इंस्टीट्यूट के डॉ रमन, राजेश मिश्रा जी द्वारा किया गया। उद्घाटन सत्र की शुरुआत डॉ मदनेश्वर मिश्र एवं डॉ श्यामानन्द सिंह के तैलचित्र पर पुष्पांजलि अर्पित कर की गयी। स्वागत अभिभाषण को सम्बोधित करते हुए मणीन्द्रनाथ ठाकुर ने कहा कि पूर्णिया की मिट्टी में ऐसी बात है, ऐसी खुशबू है कि लोग दुनिया के किसी कोने में रहे पूर्णियां को बढ़ाने का कार्य कर रहे है। इस लिटरेरी फेस्टिवल से हम अच्छे मानवीय गुण लेकर जाएंगे।

प्रो मदनेश्वर मिश्र की स्मृति में आयोजित आख्यान की अध्यक्षता साहित्य अकादमी के सचिव रह चुके डॉ के श्रीनिवास राव ने किया तथा पैनल स्पीकर के रूप में मंच पर प्रो रत्नेश्वर मिश्र उपस्थित थे। प्रो रत्नेश्वर मिश्र ने अपने सम्बोधन में कहा कि सामान्य परिवार में जन्म होने के बावजूद भी जीवन भर सामान्य रहना बड़ी बात होती है। बीज वक्ता के रूप में उपस्थित प्रोफेसर देवेन्द्र कुमार चौबे ने अपने सम्बोधन में कहा कि आयोजक के प्रति आभार करते हुए उन्होंने कहा कि समाजिक विकास के दौर में ऐसे लोग भी है आज बौद्धिक वातावरण बनाने के लिए प्रयासरत है। आप इसलिए नही लिखते है कि आप जिंदा है बल्कि समय के साथ सत्य के सवाल आपको लिखने के लिए बाध्य करती है।

फणीश्वरनाथ रेणु ने इस क्षेत्र विशेष की विशेषता को बिना भय के लिखते रहे आँचलिक प्रवाह के साथ। सभा में डॉ के श्रीनिवास राव ने सभा मे उपस्थित लेखक, कवि, स्कॉलर, छात्र- छात्राओं, शिक्षण संस्थानों, शोधार्थियों, सिविल सोसाइटी, प्रकाशन समूहो, गणमान्य नागरिक, विद्जनो को सम्बोधित करते हुए कहा कि सीमांचल और पूर्णियां साहित्यिक दृष्टि से काफी उर्वर रही और विचित्र भी रही है क्यूंकि यहां हिंदी के साहित्यकार के साथ साथ उर्दू के भी बड़े शायर और साहित्यकार हुए है साथ ही बंगाल के समीपवर्ती होने के कारण बंग्ला साहित्य के भी बड़े साहित्यकार एक ही जगह होना अनूठी बात है।

बनैली स्टेट कुमार श्यामानन्द सिन्हा पर भारत सरकार द्वारा जारी डाक टिकट एवं उनकी स्मारिका भी कार्यक्रम में प्रदर्शित की गई।

सभागार परिसर में पुस्तक स्टॉल जिनमे राजकमल प्रकाशन, सेतु प्रकाशन, प्रगतिशील प्रकाशन, वाणी प्रकाशन, रचनाकार, प्रखर गूंज प्रकाशन, अद्वेत प्रकाशन की हजारों पुस्तको से सुसज्जित स्टॉल, मणिपुरी बैम्बू आर्किटेक्चर के आर्ट वर्क, गुल्लू गैलरी की टिंकी कुमारी की चित्रकला प्रदर्शनी, किलकारी बाल भवन द्वारा चित्रकला प्रदर्शनी, टेक्सटाइल कला, लिप्पन पेंटिंग, किलकारी पत्रिका एवं क्राफ्ट की प्रदर्शनी, वीवीआईटी की चित्रकला प्रदर्शनी ज्ञान संगम लिटरेरी फेस्टिवल के आकर्षण के केंद्र रहे।

द्वितीय सत्र में कुमार श्यामानन्द सिंह की स्मृति में आयोजित संगीत संध्या पश्चिम बंगाल की मशहूर शास्त्रीय संगीत गायिका महुआ चटर्जी, सनातन गोस्वामी, शोभीक सरकार द्वारा मनमोहक प्रस्तुति दी गयी। व्यक्तिगत डोनर के रूप में गुलाब नारायण झा एवं प्रशांत कुमार झा डालू स्मृति न्यास, इवेंट पार्टनर स्टेट बैंक ऑफ इंडिया, वीवीआईटी, वीवीआरएस, कैरियर प्लस, पावरग्रिड, इंटेक, एचडीएफसी बैंक, आईसीआईसीआई बैंक, आईडीबीआई बैंक, जनमन फाउंडेशन तथा उपस्थित आगन्तुको के प्रति धन्यवाद ज्ञापन विद्या विहार ग्रुप के राजेश मिश्रा ने तथा मंच संचालन डॉ रमन तथा स्वागत गान का नेतृत्व सुप्रिया मिश्र एवं विद्यालयों के छात्राओं द्वारा किया गया। उक्त जानकारी सब हिमालयन रिसर्च इंस्टीट्यूट के सदस्य सुमित प्रकाश तथा वीवीआरएस के राहुल सांडिल्य ने दी ।

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हिन्दुस्थान समाचार / नंदकिशोर सिंह

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