चौक-चौराहों पर आवारा कुत्तों का जमावड़ा, राहगीर बेहाल, मांस-मछली दुकानों के पास सबसे ज्यादा आतंक
भागलपुर, 20 अगस्त (हि.स.)। सिल्क सिटी और स्मार्ट सिटी के रूप में विकसित हो रहे भागलपुर के शहरी क्षेत्रों में इन दिनों आवारा कुत्तों का आतंक इस कदर बढ़ गया है कि सड़कों पर चलना दूभर हो गया है।
शहर के मुख्य चौक-चौराहों, गलियों और विशेषकर वैसी जगहों पर जहां मांस, मुर्गा और मछली की दुकानें हैं, वहां सुबह से लेकर देर रात तक दर्जनों कुत्तों का झुंड जमा रहता है। दुकानों से फेंकने वाले वेस्ट (कचरे) के लालच में ये कुत्ते वहां आक्रामक हो जाते हैं और जरा सी आहट पर राहगीरों तथा मोटरसाइकिल चालकों पर हमला कर देते हैं।
शहर के भीखनपुर, मुंदीचक, परबत्ती, खलीफाबाग, बरारी, और नाथनगर जैसे प्रमुख इलाकों में जहां मीट-मछली की दुकानें हैं, वहां कुत्तों की भीड़ सबसे अधिक देखी जा रही है। दुकानदारों द्वारा सड़क किनारे फेंके जाने वाले अवशेषों के कारण कुत्तों के बीच अक्सर हिंसक झड़पें होती हैं। इस दौरान वहां से गुजरने वाले पैदल राहगीर, महिलाएं और खासकर दोपहिया वाहन चालक इनके सीधे निशाने पर आ जाते हैं। मोटरसाइकिल चालकों को देखते ही कुत्ते दूर तक उनका पीछा करते हैं, जिससे घबराहट में कई लोग गाड़ी से गिरकर गंभीर रूप से घायल हो रहे हैं। हाल ही में जिले में डॉग बाइट और कुत्तों के हमलों की घटनाओं में भारी इजाफा हुआ है।
बीते 1 अगस्त कै नवगछिया के हरना चौक पर एक आवारा कुत्ते ने सड़क पर खेल रहे 6 वर्षीय मासूम सुग्रीव सिंह पर अचानक जानलेवा हमला कर दिया। इस खौफनाक हमले में बच्चे के दाहिने हाथ की एक उंगली कटकर पूरी तरह अलग हो गई, जिसे गंभीर स्थिति में मायागंज अस्पताल रेफर किया गया। इसके अलावा शहर के मायागंज और सदर अस्पताल में रोजाना पालतू एवं आवारा कुत्तों के काटने के शिकार हुए दर्जनों मरीज एंटी-रेबीज वैक्सीन लगवाने पहुंच रहे हैं। एनिमल बर्थ कंट्रोल (डॉग्स) रूल्स, 2023 और सुप्रीम कोर्ट के हालिया निर्देशों के अनुसार, स्थानीय प्रशासन आवारा कुत्तों को सीधे मार या हमेशा के लिए विस्थापित नहीं कर सकता।
नियमों के तहत नगर निगमों को अनिवार्य रूप से एनिमल बर्थ कंट्रोल प्रोग्राम के तहत कुत्तों को पकड़कर उनकी नसबंदी और एंटी-रेबीज टीकाकरण करना होगा। नसबंदी के बाद कुत्तों को उसी सटीक स्थान पर वापस छोड़ना अनिवार्य है जहां से उन्हें पकड़ा गया था।
सुप्रीम कोर्ट के आदेशानुसार स्कूल, कॉलेज, अस्पताल, और सरकारी दफ्तरों जैसे सार्वजनिक परिसरों से कुत्तों को हटाकर शेल्टर होम में रखने का प्रावधान है।
वहीं कुत्तों के बढ़ते हमलों के बाद आखिरकार भागलपुर नगर निगम ने एक बड़ा कदम उठाया है। निगम के आधिकारिक सर्वे के अनुसार, शहर में वर्तमान में लगभग 10,225 आवारा कुत्ते हैं।
समस्या के स्थायी समाधान के लिए नगर निगम ने 1.36 करोड़ रुपये का टेंडर पास किया है, जिसके तहत राजस्थान की 'संतुलन जीव कल्याण संस्था' को दो वर्षों के लिए काम सौंप दिया गया है। एजेंसी के अधिकारी भागलपुर पहुंच चुके हैं। सितंबर के दूसरे सप्ताह से शहर के सभी वार्डों से कुत्तों को पकड़कर उनका बंध्याकरण और टीकाकरण करने का महा-अभियान युद्धस्तर पर शुरू हो जाएगा। अस्थाई रूप से भूतनाथ मंदिर रोड स्थित एमआरएफ सेंटर में सेटअप लगाया जा रहा है। इसके साथ ही, कनकैथी में 1.10 करोड़ रुपये की लागत से एक आधुनिक और स्थायी डॉग शेल्टर सह एबीसी सेंटर भी छह महीने के भीतर तैयार किया जाएगा, जिसमें 100 से अधिक बीमार और हिंसक कुत्तों को रखने और उनके इलाज की व्यवस्था होगी।
वहीं नगर प्रशासन ने मांस-मछली विक्रेताओं को भी कड़े निर्देश दिए हैं कि वे दुकानों का कचरा खुले में न फेंकें, ताकि इन हॉटस्पॉट्स पर कुत्तों का जमावड़ा कम किया जा सके।
हिन्दुस्थान समाचार / बिजय शंकर

