सीवान की 200 वर्ष पुरानी पांडुलिपियां आईं सामने, आर्थिक इतिहास का खुला अहम अध्याय

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सीवान की 200 वर्ष पुरानी पांडुलिपियां आईं सामने, आर्थिक इतिहास का खुला अहम अध्याय


सीवान, 26 अप्रैल (हि.स.)।

ज्ञान भारतम् मिशन के तहत चल रहे पांडुलिपि सर्वेक्षण में सीवान जिले को एक महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल हुई है। बाबुनिया रोड स्थित डिस्ट्रिक्ट स्पोर्ट्स एसोसिएशन के पूर्व अध्यक्ष मुहम्मद फरीद के आवास ‘रूह आफ़जा मंजिल’ से करीब 200 वर्ष पुरानी दुर्लभ पांडुलिपियां सामने आई हैं। ये पांडुलिपियां वर्ष 1800 से 1950 के बीच सीवान की आर्थिक गतिविधियों का विस्तृत और प्रमाणिक विवरण प्रस्तुत करती हैं।

जिलाधिकारी विवेक रंजन मैत्रेय ने स्वयं मौके पर पहुंचकर पांडुलिपियों का अवलोकन किया और संबंधित अधिकारियों को इन्हें ज्ञान भारतम् पोर्टल पर अपलोड करने का निर्देश दिया। उन्होंने आम नागरिकों से अपील की कि वे अपने घरों में सुरक्षित 75 वर्ष या उससे अधिक पुरानी हस्तलिखित पांडुलिपियों को खोजकर साझा करें, ताकि जिले की ऐतिहासिक और सांस्कृतिक विरासत को संरक्षित किया जा सके।

इन पांडुलिपियों से यह जानकारी सामने आई है कि तत्कालीन सीवान ‘साल्टपीटर’ (शोरा) के उत्पादन में अग्रणी था। इसका उपयोग गन पाउडर और कपड़ा धोने के पाउडर के निर्माण में होता था। तैयार उत्पाद को रघुनाथपुर के रास्ते सरयू नदी के माध्यम से कोलकाता होते हुए इंग्लैंड तक निर्यात किया जाता था, जिससे स्थानीय व्यापारी समृद्ध हुए थे।

मुहम्मद फरीद ने बताया कि वर्ष 1940 में नेताजी सुभाष चंद्र बोस भी उनके आवास पर आए थे। लगभग 1880 के आसपास साल्टपीटर व्यापार की पूरी संरचना का उल्लेख इन पांडुलिपियों में मिलता है।

डीएम ने इस कार्य में सहयोग के लिए फरीद परिवार, रसमंजरी फाउंडेशन, सामाजिक कार्यकर्ता गणेश दत्त पाठक एवं केंद्रीय विद्यालय के शिक्षक चंदन कुमार की सराहना की। इस दौरान स्थानीय पार्षद राज कुमार बांसफोर सहित अन्य गणमान्य लोग भी उपस्थित रहे।

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हिन्दुस्थान समाचार / Amar Nath Sharma

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