अपराधियों पर शिकंजा कसने का आदेश, अब थानेदारों की जवाबदेही
सीवान, 13 सितंबर (हि.स.)। अपराध पर लगाम कसने को लेकर सीवान पुलिस अधीक्षक ने जिले के थानेदारों को निर्देशों की लंबी फेहरिस्त थमा दी है। अब हत्या, हथियार, शराब, मादक पदार्थ और अन्य गंभीर अपराधों में फरार आरोपितों की गिरफ्तारी से लेकर लंबित मामलों के निष्पादन तक की जिम्मेदारी सीधे थाना स्तर पर तय होगी।
13 सितंबर को समाहरणालय सभागार में अगस्त माह की अपराध गोष्ठी में एसपी ने स्पष्ट कर दिया कि अपराध नियंत्रण के साथ पुलिस की कार्यशैली में भी सुधार जरूरी है।
गंभीर अपराधों में सिर्फ प्राथमिकी दर्ज कर फाइल दबाने के बजाय स्पीडी ट्रायल के जरिए त्वरित निष्पादन और आरोपितों को सजा दिलाने पर जोर दिया गया। सभी थानाध्यक्षों को सक्रिय अपराधियों, जेल से छूटे अपराधियों और फरार आरोपितों की सूची लगातार अद्यतन रखने तथा उनके खिलाफ कार्रवाई करने का निर्देश दिया गया। वारंट, सम्मन और कुर्की के लंबित मामलों के लिए विशेष अभियान चलाने को कहा गया है।
एसपी ने अपराध के प्रमुख मामलों में वांछित आरोपितों की गिरफ्तारी को प्राथमिकता देने के साथ असामाजिक तत्वों को चिह्नित कर भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता की संबंधित धाराओं और सीसीए के तहत निरोधात्मक कार्रवाई करने का निर्देश दिया। अपराध से अर्जित संपत्ति की जब्ती के लिए प्रस्ताव भेजने को भी कहा गया है।
पुलिस की सुस्ती पर भी निर्देश बेहद स्पष्ट रहे। आपातकालीन प्रतिक्रिया सहायता प्रणाली के तहत नियंत्रण कक्ष से मिलने वाली सूचना पर पुलिस को हर हाल में 15 मिनट के भीतर रिस्पांस करने को कहा गया।
थाने पहुंचने वाले फरियादियों के साथ शालीन व्यवहार और उनकी समस्याओं का त्वरित समाधान कराने का निर्देश भी दिया गया। प्रत्येक आगंतुक का नाम-पता आगंतुक पंजी में दर्ज करना अनिवार्य किया गया है।
रात्रि गश्ती और पैदल गश्ती को मजबूत करने, संवेदनशील स्थानों पर लगातार निगरानी रखने और सघन वाहन जांच चलाने का निर्देश दिया गया। शराब से जुड़े मामलों में गिरफ्तारी, मादक पदार्थ, पॉक्सो तथा एससी-एसटी अधिनियम के मामलों में त्वरित कार्रवाई पर भी जोर दिया गया।
थानों की आंतरिक व्यवस्था भी एसपी के निशाने पर रही। नियमित गुंडा परेड और चौकीदारी परेड, थाना परिसर की साफ-सफाई, पुलिसकर्मियों के नियमित व्यायाम और ड्यूटी के दौरान बेहतर वर्दी व टर्नआउट सुनिश्चित करने का निर्देश दिया गया। लंबित कांडों के समयबद्ध निष्पादन के लिए अंचल निरीक्षकों और पर्यवेक्षी पदाधिकारियों को भी जिम्मेदारी दी गई।
वैवाहिक, दीवानी और वाणिज्यिक विवादों में वरीय पदाधिकारी के आदेश के बाद प्रारंभिक जांच कर प्राथमिकी दर्ज करने का निर्देश दिया गया है। सरकारी पोर्टलों के नियमित संचालन पर भी निगरानी रखने को कहा गया। अपराध गोष्ठी में निर्देश तो कड़े दिए गए हैं, लेकिन अब सवाल जमीन पर कार्रवाई का है।
फरार अपराधियों की गिरफ्तारी, लंबित कांडों का निष्पादन, 15 मिनट में पुलिस रिस्पांस और संवेदनशील इलाकों में लगातार गश्ती जैसे निर्देश कितनी तेजी से लागू होते हैं, इसकी जवाबदेही अब थाना स्तर पर तय होगी. अपराध नियंत्रण के दावों की असली परीक्षा भी इन्हीं निर्देशों के अमल से होगी।
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हिन्दुस्थान समाचार / Amar Nath Sharma

