सिरूआ पर्व पर सुल्तान पोखर में स्नान और सुल्तानी माई मंदिर में पूजा
अररिया, 15 अप्रैल(हि.स.)।
सिरूआ पर्व के मौके पर बुधवार को फारबिसगंज के ऐतिहासिक सुल्तान पोखर में बड़ी संख्या में महिलाओं ने स्नान कर मन्नतें मांगी।महिलाओं ने हिन्दू और मुस्लिम का प्रतीक सुल्तानी माई के मंदिर में पूजा अर्चना कर चढ़ावा चढ़ाया।
जानकार बताते हैं कि कि शाह सुल्तान के वारिश कतई मीर द्वारा 1857-58 में ब्रिटिश हुकूमत के समय पूरे सुल्तानपुर स्टेट को सर एलेक्जेण्डर हेनरी फोरबेस से कानपुर के सेठ जुगीलाल कमलापति द्वारा खरीदा गया था। लेकिन इससे पूर्व एक गरीब कन्या की सुंदरता पर मोहित होकर सुल्तान द्वारा हिन्दू-मुस्लिम के प्रतीक के रूप में सुल्तान पोखर खुदवाया गया था। पोखर आज फारबिसगंज की ऐतिहासिक धरोहर है। सुल्तान पोखर व सुल्तानी माई का मंदिर हिन्दू-मुस्लिम का सौहार्द का एक ऐसा प्रतीक माना जाता है जहां एक ही स्थान पर एक साथ दोनों समुदाय के लोग पूजा और इबादत करते हैं।
इस तालाब में स्नान कर मंदिर में आकर जो भी मन्नतें-मुरादें मांगी जाय, वह पूर्ण होती है।नि:संतान औरतें मुख्य रूप से औलाद की मन्नतें मांगने आती है। मुगलकाल की यह ऐतिहासिक धरोहर आज भी साम्प्रदायिक सौहार्द और अमन का पैगाम देती है। खासकर सिरूआ के मौके पर महिलाओं की काफ़ी भीड़ जुटती है।
हिन्दुस्थान समाचार / राहुल कुमार ठाकुर

