सुप्रीम कोर्ट के फैसले ने एसआईआर प्रक्रिया की संवैधानिक वैधता पर मुहर लगाई, विपक्ष बताए भ्रम फैलाने का आधार क्या था : संजय सरावगी

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पटना, 27 मई (हि.स.)। बिहार में एसआईआर को लेकर आए सुप्रीम कोर्ट के फैसले पर भाजपा बिहार प्रदेश अध्यक्ष संजय सरावगी ने कहा कि न्यायालय के निर्णय ने स्पष्ट कर दिया है कि चुनाव आयोग की प्रक्रिया पूरी तरह संवैधानिक दायरे में है और स्वतंत्र एवं निष्पक्ष चुनाव सुनिश्चित करने की भावना से जुड़ी हुई है। यह फैसला उन लोगों के लिए स्पष्ट संदेश है, जो राजनीतिक हितों के लिए चुनावी प्रक्रिया और संवैधानिक संस्थाओं पर लगातार सवाल उठाते रहे हैं।

प्रदेश अध्यक्ष संजय सरावगी ने कहा कि राहुल गांधी और तेजस्वी यादव को अब बिहार की जनता के सामने स्पष्ट करना चाहिए कि उन्होंने किस आधार पर चुनाव आयोग की प्रक्रिया को लेकर भ्रम, अविश्वास और आशंका का वातावरण बनाने का प्रयास किया। सुप्रीम कोर्ट के फैसले ने यह साबित कर दिया है कि चुनाव आयोग की शक्तियां और उसकी प्रक्रिया कानूनी रूप से मान्य और संवैधानिक हैं।

उन्होंने कहा कि विपक्ष के कुछ नेता लगातार संवैधानिक संस्थाओं पर प्रश्न उठाकर राजनीतिक लाभ लेने की कोशिश करते रहे हैं। जब फैसले उनके राजनीतिक हितों के अनुरूप नहीं आते, तब लोकतांत्रिक संस्थाओं की निष्पक्षता और विश्वसनीयता पर संदेह पैदा करने का प्रयास किया जाता है। यह प्रवृत्ति लोकतंत्र और संविधान की भावना के विपरीत है।

संजय सरावगी ने कहा कि लोकतंत्र में असहमति व्यक्त करना सभी का अधिकार है, लेकिन बिना तथ्य और आधार के संवैधानिक संस्थाओं की विश्वसनीयता पर हमला करना उचित नहीं माना जा सकता। जनता को गुमराह कर राजनीतिक वातावरण बनाने की राजनीति लोकतंत्र को कमजोर करती है।

उन्होंने कहा कि विपक्ष को यह स्पष्ट करना चाहिए कि उनका उद्देश्य चुनावी प्रक्रिया को मजबूत करना था या फिर भ्रम फैलाकर राजनीतिक लाभ प्राप्त करना। आज जब सर्वोच्च न्यायालय ने अपनी टिप्पणी और फैसले से स्थिति स्पष्ट कर दी है, तब राहुल गांधी और तेजस्वी यादव को अपनी पूर्व टिप्पणियों पर आत्ममंथन करना चाहिए।

प्रदेश अध्यक्ष ने कहा कि लोकतंत्र में जनता का विश्वास सबसे महत्वपूर्ण है और संवैधानिक संस्थाओं के प्रति विश्वास बनाए रखना सभी राजनीतिक दलों की जिम्मेदारी है।

हिन्दुस्थान समाचार / सुरभित दत्त

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