सिमरिया कल्पवास मेला: सांस्कृतिक संध्या में कथक कलाकार निभाश मोदी ने बांधा समां, तालियों से गूंजा पंडाल

WhatsApp Channel Join Now
सिमरिया कल्पवास मेला: सांस्कृतिक संध्या में कथक कलाकार निभाश मोदी ने बांधा समां, तालियों से गूंजा पंडाल


सिमरिया कल्पवास मेला: सांस्कृतिक संध्या में कथक कलाकार निभाश मोदी ने बांधा समां, तालियों से गूंजा पंडाल


भागलपुर, 04 नवंबर (हि.स.)।

बेगूसराय के प्रसिद्ध सिमरिया धाम में आयोजित राजकीय कल्पवास मेला एक बार फिर अपनी समृद्ध सांस्कृतिक विरासत और कलात्मक प्रस्तुतियों को लेकर चर्चा में है।

मेला परिसर में कला एवं संस्कृति विभाग, बिहार तथा जिला प्रशासन, बेगूसराय के संयुक्त तत्वावधान में सांस्कृतिक संध्या का आयोजन किया जा रहा है।

इसी कड़ी में आठवें सत्र में एकता कला मंच, भागलपुर की ओर से दी गई सांस्कृतिक प्रस्तुतियों ने दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया।

इस दौरान भागलपुर के उभरते कथक कलाकार निभाश चंद्र मोदी की शानदार शास्त्रीय नृत्य प्रस्तुति विशेष आकर्षण का केंद्र रही। कार्यक्रम का शुभारंभ निभाश चंद्र मोदी ने कथक नृत्य के मंगलाचरण से किया।

इसके बाद उन्होंने शास्त्रीय नृत्य की पारंपरिक विधा में एकताल, झपताल और धमार ताल पर आधारित भावपूर्ण एवं तकनीकी रूप से आकर्षक प्रस्तुतियां दीं। उनके नृत्य में लय, ताल, भाव और पद संचालन का अद्भुत समन्वय देखने को मिला। प्रस्तुति का सबसे खास आकर्षण तबला और घुंघरू के बीच सवाल-जवाब की अनूठी जुगलबंदी रही।

तबले की थाप के साथ घुंघरुओं की झंकार और पैरों की सधी हुई थिरकन ने दर्शकों को झूमने पर मजबूर कर दिया। तालों की जटिलता के बीच निभाश मोदी ने जिस सहजता और कुशलता के साथ अपनी नृत्य कला का प्रदर्शन किया, उसकी दर्शकों ने तालियों की गड़गड़ाहट से सराहना की। इसी सांस्कृतिक संध्या में ‘उगना’ नृत्य नाटिका एवं अंग प्रदेश की प्रसिद्ध लोकगाथा ‘सती बिहुला विषहरी’ की भी शानदार प्रस्तुति हुई। राजेश कुमार झा के निर्देशन में प्रस्तुत ‘उगना’ के माध्यम से महाकवि विद्यापति और भगवान शिव की अनूठी भक्ति कथा का भावपूर्ण मंचन किया गया।

इसमें उगना की भूमिका महेश प्रसाद साह तथा कवि विद्यापति की भूमिका स्वयं राजेश कुमार झा ने निभाई, जबकि डॉ. जयंत जलद ने सहायक की भूमिका अदा की। वहीं बिहुला विषहरी की प्रस्तुति ने अंग प्रदेश की समृद्ध लोकसंस्कृति और परंपराओं को मंच पर जीवंत कर दिया। सफल कार्यक्रम का संचालन रामसुंदर गांधी ने किया, जबकि मंच व्यवस्था में मनीष कौशिक एवं उनके सहयोगियों की महत्वपूर्ण भूमिका रही। कार्यक्रम के समापन पर जिला कला एवं संस्कृति पदाधिकारी श्याम कुमार सहनी ने सभी कलाकारों को अंगवस्त्र एवं स्मृति चिह्न प्रदान कर सम्मानित किया। सिमरिया धाम की इस सांस्कृतिक संध्या ने यह साबित कर दिया कि भागलपुर और अंग क्षेत्र की धरती पर शास्त्रीय व लोक कला की परंपरा आज भी पूरी ऊर्जा और समर्पण के साथ आगे बढ़ रही है।

---------------

हिन्दुस्थान समाचार / बिजय शंकर

Livevns.news Desk
Livevns.news Desk

772051 Articles

Share this story