आस्था, इतिहास और रहस्य का अनोखा संगम, सुलतानगंज का प्राचीन अजगैबीनाथ धाम

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आस्था, इतिहास और रहस्य का अनोखा संगम, सुलतानगंज का प्राचीन अजगैबीनाथ धाम


भागलपुर, 17 अगस्त (हि.स.)। जिले के सुल्तानगंज स्थित उत्तरवाहिनी गंगा के तट पर विशाल ग्रेनाइट की चट्टान पर विराजमान बाबा अजगैबीनाथ धाम आस्था, इतिहास और रहस्य का एक अनोखा केंद्र है। सावन के पवित्र महीने में देश-विदेश से लाखों श्रद्धालु और कांवड़िए बाबा अजगैबीनाथ के दर्शन के लिए यहाँ पहुँचते हैं। धार्मिक मान्यता है कि देवघर में बाबा बैद्यनाथ को जल अर्पित करने से पहले सुलतानगंज के बाबा अजगैबीनाथ पर जल चढ़ाना अनिवार्य है, तभी भक्तों की मनोकामना पूरी होती है।

अजगैबीनाथ धाम से जुड़ी सबसे चर्चित और रहस्यमयी मान्यता यहाँ के महंतों को लेकर है। ऐसा कहा जाता है कि इस मठ के महंत कभी देवघर (बाबा बैद्यनाथ धाम) नहीं जाते। मान्यता के अनुसार, यदि कोई भी महंत देवघर जाने का प्रयास करता है, तो उसकी आंखों की रोशनी प्रभावित होने लगती है। वर्तमान महंत प्रेमानंद गिरि के अनुसार, उन्होंने स्वयं एक बार देवघर जाने की कोशिश की थी, जिसके बाद उनकी आंखों की रोशनी कम होने लगी थी।

इस घटना के बाद उन्होंने अपना इरादा बदल दिया। अजगैबीनाथ मठ का इतिहास हजारों वर्ष पुराना बताया जाता है, जहाँ अब तक कुल 18 महंत हो चुके हैं।

कथाओं के अनुसार, मठ के पहले महंत सिद्धार्थ नाथ भारती और केदारनाथ प्रतिदिन सुलतानगंज की उत्तरवाहिनी गंगा से जल लेकर पैदल बाबा बैद्यनाथ धाम जाया करते थे। एक दिन भगवान भोलेनाथ ने स्वयं एक ब्राह्मण का रूप धारण किया और दोनों महंतों के साथ चल पड़े। रास्ते में शिव जी ने उन्हें अपने वास्तविक स्वरूप के दर्शन दिए। भगवान के साक्षात दर्शन पाकर दोनों महंतों ने उनके चरणों में ही स्थान मांग लिया। इसी मान्यता के तहत आज भी अजगैबीनाथ शिवलिंग के समीप दो अन्य शिवलिंग स्थापित हैं, जिन्हें इन दोनों महंतों का प्रतीक माना जाता है।

अजगैबीनाथ धाम की पूजा परंपरा भी बेहद खास और अनुठी है। यहाँ सुबह की पहली पूजा बाबा बैद्यनाथ के नाम से की जाती है। इसके बाद जब सरकारी पूजा संपन्न होती है, तब जाकर बाबा अजगैबीनाथ की मुख्य पूजा-अर्चना शुरू होती है। मान्यता है कि प्रथम महंतों (सिद्धार्थ नाथ भारती और केदारनाथ) के बाद से आज तक किसी भी महंत ने देवघर जाने का साहस नहीं किया है। सावन के महीने में लाखों कांवड़ियों का अटूट विश्वास और बाबा के प्रति अगाध श्रद्धा इस प्राचीन शिवधाम की महिमा को और अधिक भव्य और खास बना देती है।

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हिन्दुस्थान समाचार / बिजय शंकर

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