आस्था की पराकाष्ठा, घुटनों के बल बाबा धाम की यात्रा पर निकले सुबोध
भागलपुर, 04 अगस्त (हि.स.)। सुल्तानगंज से देवघर तक के कांवड़िया पथ पर आस्था के अलग-अलग रंग हर कदम पर नजर आ रहे हैं। कोई नंगे पांव, कोई दंडवत तो कोई कठिन तपस्या के साथ बाबा बैद्यनाथ के दरबार की ओर बढ़ रहा है। इसी बीच कांवड़िया पथ पर एक ऐसी तस्वीर सामने आई है, जिसने हर श्रद्धालु को भावुक कर दिया है।
लखीसराय के रहने वाले श्रद्धालु सुबोध कुमार घुटनों के बल बाबा बैद्यनाथ धाम की कठिन यात्रा कर रहे हैं। उनकी इस तपस्या का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि पिछले पांच से सात दिनों में वह महज सात किलोमीटर की दूरी ही तय कर सके हैं। यदि उनकी यही रफ्तार रही, तो उन्हें देवघर पहुंचने में दो महीने से भी अधिक का समय लग सकता है।
इस बेहद कठिन यात्रा में सुबोध कुमार का बेटा हर कदम पर उनका सहारा बना हुआ है। वह अपने पिता के आगे-आगे रास्ते पर फोम बिछाता चलता है ताकि पिता के घुटनों को कुछ राहत मिल सके। लेकिन पथरीले और गर्म रास्ते के कारण, महज पांच किलोमीटर की यात्रा में ही सुबोध कुमार के दोनों घुटने बुरी तरह छिल चुके हैं। घाव और सूजन के कारण उनका दर्द लगातार बढ़ता जा रहा है। इस असहनीय शारीरिक पीड़ा के बावजूद सुबोध कुमार के हौसले और संकल्प में कोई कमी नहीं आई है।
बाबा के प्रति अपनी अटूट भक्ति को प्रकट करते हुए उन्होंने कहा, चाहे जितना भी समय लगे और चाहे कितनी भी तकलीफ सहनी पड़े, मैं बाबा भोलेनाथ के दरबार तक पहुंचकर ही दम लूंगा।
कांवड़िया पथ पर सुबोध कुमार की यह तपस्या वहां से गुजरने वाले हर श्रद्धालु के लिए आस्था, संकल्प और अटूट विश्वास की एक अनूठी मिसाल बन गई है। भोलेनाथ के प्रति असीम श्रद्धा रखने वाले इस 'हठी बम' को देखकर हर कोई उनकी भक्ति को नमन कर रहा है।
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हिन्दुस्थान समाचार / बिजय शंकर

