आपातकाल दिवस को लेकर सेमिनार आयोजित

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आपातकाल दिवस को लेकर सेमिनार आयोजित


भागलपुर, 25 जून (हि.स.)। संवैधानिक अधिकार और लोकतांत्रिक मूल्यों की रक्षा के लिए वर्ष 1975 में व्यापक आंदोलन किया गया था। महंगाई बेरोजगारी और भ्रष्टाचार के मुद्दों पर केंद्रित आंदोलन चरम पर था। तत्कालीन सरकार यह अनुभव कर रही थी की देश में चुनाव होगा तो उसकी पराजय निश्चित है। इसीलिए नागरिकों के मौलिक अधिकारों को निलंबित करते हुए प्रेस की स्वतंत्रता पर पूर्ण प्रतिबंध लगाकर अपनी सत्ता कायम रखने के उद्देश्य से तत्कालीन सरकार की सिफारिश पर तत्कालीन राष्ट्रपति द्वारा आंतरिक अशांति का हवाला देते हुए आपातकाल की घोषणा की गई। यह आपातकाल भारतीय इतिहास का काला अध्याय है। उक्त बातें अंतर्राष्ट्रीय गांधी हिंदी विश्वविद्यालय वर्धा के पूर्व कुलपति, डॉ मनोज कुमार ने गांधी शांति प्रतिष्ठान केंद्र और संपूर्ण क्रांति आंदोलनकारी मंच भागलपुर द्वारा आपातकाल दिवस पर गुरुवार को आयोजित सेमिनार में कहा।

उन्होंने कहा कि आज पुनः उसी तरह का प्रयास चल रहा है, देश में अमर्यादित आचरण और व्यवहार धड़ल्ले से किये जा रहे हैं। इसलिए इसको समझने की आवश्यकता है और आपातकाल के दिनों को याद करते हुए भविष्य में इसकी पुनरावृत्ति ना हो इसके लिए लगातार कार्यक्रम चलाने की भी आवश्यकता है। इस अवसर पर बड़ी संख्या में उपस्थित जेपी आंदोलनकारी मंच के सदस्य और सामाजिक कार्यकर्ता के बीच सर्वसम्मति से प्रस्ताव पारित कर सरकार से मांग किया गया कि पेंशन प्राप्त कर रहे सभी जे पी सेनानियों को स्वतंत्रता सेनानी सह लोक सेवक का दर्जा प्रदान करते हुए सभी सुविधाएं प्रदान की जाय।

आंदोलन के दौरान अन्य धाराओं में जेल गए एवं भूमिगत जेपी सेनानियों के आवेदनों का समाधान करते हुए जेपी सेनानी का दर्जा प्रदान किया जाए। कार्यक्रम में भागलपुर जिला के लचर बिजली व्यवस्था पर चिंता व्यक्त की गई और मांग किया गया कि नियमित निर्बाध बिजली आपूर्ति किया जाए और जयप्रकाश नारायण सदर अस्पताल में चिकित्सा सुविधा सुदृढ़ की जाए।

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हिन्दुस्थान समाचार / बिजय शंकर

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