विलुप्त होती गौरैया के संरक्षण के लिए बच्चों ने बनाए इको-फ्रेंडली घोंसले

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विलुप्त होती गौरैया के संरक्षण के लिए बच्चों ने बनाए इको-फ्रेंडली घोंसले


नालंदा, बिहारशरीफ 21 मार्च (हि.स.)।

नालंदा जिले के पयर्टक स्थल राजगीर स्थित जू सफारी के तत्वावधान में शनिवार ‘विश्व गौरैया दिवस’ के अवसर पर मध्य विद्यालय, राजगीर में एक भव्य कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इस कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य नई पीढ़ी को विलुप्त होती गौरैया के संरक्षणके प्रति जागरूक करना और प्रकृति के प्रतिउनको बढ़ाना था।

इस अवसर पर स्कूली बच्चों के बीच ‘गौरैया घोंसला निर्माण प्रतियोगिता’ आयोजित की गई। प्रतियोगिता में छात्रों ने बड़े ही उत्साह के साथ भाग लिया और गत्ते, जूट, सूखी घास व अन्य प्राकृतिक सामग्रियों का उपयोग कर आकर्षक व सुरक्षित घोंसले बनाए। बच्चों की रचनात्मकता ने उपस्थित सभी लोगों का मन मोह लिया।विशेषज्ञ संबोधन: गौरैया का हमारे जीवन में महत्वकार्यक्रम की अध्यक्षता राजगीर जू सफारी के पशु चिकित्सक डॉ. संजीत ने की। बच्चों को संबोधित करते हुए डॉ. संजीत ने गौरैया के पारिस्थितिक महत्व पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा:

”गौरैया हमारे पर्यावरण का एक अभिन्न अंग है। बढ़ते शहरीकरण और मोबाइल टावरों के विकिरण के कारण इनकी संख्या में भारी कमी आई है। हमें अपने घरों के बाहर पानी और दाना रखकर व कृत्रिम घोंसले लगाकर इन्हें वापस बुलाना होगा।”इस पूरे कार्यक्रम का सफल समन्वय वन रक्षी राज कुमार मंडल और प्रिंस कुमार द्वारा किया गया। उन्होंने बच्चों को घोंसला बनाने की तकनीक सिखाई और पर्यावरण संरक्षण में युवाओं की भूमिका पर चर्चा की।

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हिन्दुस्थान समाचार / प्रमोद पांडे

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