युवा पीढ़ी के व्यक्तित्व निर्माण का सशक्त माध्यम है संस्कृत : प्रो. अर्कनाथ चौधरी

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युवा पीढ़ी के व्यक्तित्व निर्माण का सशक्त माध्यम है संस्कृत : प्रो. अर्कनाथ चौधरी


दरभंगा, 26 अगस्त (हि.स.)।

श्रीरामसुन्दर संस्कृत विश्वविद्यालय प्रतिष्ठानम् एवं केंद्रीय संस्कृत विश्वविद्यालय के संयुक्त तत्वावधान में बुधवार को ‘युवशक्तिविकासाय संस्कृतस्य महत्त्वम्’ विषय पर राष्ट्रीय संगोष्ठी आयोजित की गई।

संस्कृत सप्ताह के तहत आयोजित संगोष्ठी में संस्कृत भाषा एवं साहित्य के माध्यम से युवाओं के व्यक्तित्व, ज्ञान, संस्कार एवं कौशल विकास की संभावनाओं पर चर्चा हुई।

कार्यक्रम का शुभारंभ सरस्वती वंदना एवं मंगलाचरण से हुआ। प्राचार्य डॉ. कामेश्वर चौधरी ने अतिथियों का स्वागत करते हुए कहा कि संस्कृत केवल प्राचीन ज्ञान की भाषा नहीं, बल्कि युवाओं को भारतीय ज्ञान परंपरा से जोड़ने वाली सशक्त कड़ी है।

विशिष्ट अतिथि प्रो. कुलदीप शर्मा ने ऑनलाइन संबोधन में कहा कि संस्कृत अध्ययन से युवाओं में तार्किक चिंतन, अनुशासन, संस्कार एवं नेतृत्व क्षमता का विकास होता है। काशी हिंदू विश्वविद्यालय, वाराणसी के डॉ. प्रियव्रत मिश्र ने संस्कृत के शैक्षणिक एवं रोजगारपरक अवसरों पर प्रकाश डाला।

कामेश्वर सिंह दरभंगा संस्कृत विश्वविद्यालय के प्राध्यापक डॉ. रामसेवक झा ने कहा कि संस्कृत युवाओं को ज्ञान के साथ संस्कार भी प्रदान करती है। मुख्य अतिथि स्नातकोत्तर प्रभारी एवं विभागाध्यक्ष प्रो. दिलीप कुमार झा ने संस्कृत शिक्षा को समकालीन आवश्यकताओं के अनुरूप विकसित करने पर बल दिया।

इस अवसर पर पूज्य संत रामविनोद दास एवं संत ललितदास का विशेष सान्निध्य प्राप्त हुआ। दोनों संतों ने युवाओं को भारतीय संस्कृति, सदाचार एवं आध्यात्मिक मूल्यों से जुड़ने का संदेश दिया।

कार्यक्रम की अध्यक्षता पूर्व कुलपति एवं प्रबंध समिति के अध्यक्ष प्रो. अर्कनाथ चौधरी ने ऑनलाइन माध्यम से की। उन्होंने कहा कि संस्कृत युवा पीढ़ी के व्यक्तित्व निर्माण का सशक्त माध्यम है तथा युवाशक्ति के विकास में इसकी महती भूमिका है।

संगोष्ठी में डॉ. आशुतोष कुमार झा, डॉ. माधुरी राय, डॉ. श्रीनिवास मूर्ति, डॉ. राजकुमार मंडल, डॉ. नंदिनी चटर्जी, हीरानंद पाठक सहित शिक्षक, शोधार्थी, छात्र-छात्राएं, कर्मचारी एवं सामाजिक कार्यकर्ता उपस्थित रहे। संयोजक एवं मंच संचालन डॉ. पुष्कर आनंद ने किया, जबकि धन्यवाद ज्ञापन सहसंयोजक डॉ. रामानुज श्रीधर ने किया।

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हिन्दुस्थान समाचार / Krishna Mohan Mishra

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