सड़क हादसों में घायलों को मिलेगा 1.50 लाख तक का कैशलेस इलाज, सुपौल के 18 अस्पताल होंगे शामिल

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सड़क हादसों में घायलों को मिलेगा 1.50 लाख तक का कैशलेस इलाज, सुपौल के 18 अस्पताल होंगे शामिल


सड़क हादसों में घायलों को मिलेगा 1.50 लाख तक का कैशलेस इलाज, सुपौल के 18 अस्पताल होंगे शामिल


सुपौल, 26 अक्टूबर (हि.स.)। सड़क दुर्घटना में घायल लोगों को समय पर बेहतर चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराने और आर्थिक तंगी के कारण इलाज में होने वाली देरी रोकने के लिए प्रधानमंत्री राहत योजना को प्रभावी ढंग से लागू करने की तैयारी तेज कर दी गई है। इसी को लेकर सोमवार को लहटन चौधरी सभागार में जिला प्रशासन एवं जिला परिवहन कार्यालय, सुपौल के संयुक्त तत्वावधान में जिला स्तरीय कार्यशाला आयोजित की गई। इसमें जिले के सरकारी एवं निजी अस्पतालों, पुलिस और संबंधित विभागों के अधिकारियों व कर्मियों को योजना की प्रक्रिया, पात्रता, लाभ और तकनीकी कार्यप्रणाली की जानकारी दी गई।

कार्यशाला में बताया गया कि योजना के तहत पात्र सड़क दुर्घटना पीड़ितों को निर्धारित नियमों एवं शर्तों के अनुसार अधिकतम 1.50 लाख रुपये तक का कैशलेस उपचार उपलब्ध कराने का प्रावधान है। यह सुविधा निर्धारित शर्तों के अधीन दुर्घटना की तारीख से अधिकतम सात दिनों की अवधि तक मिलेगी। इसका उद्देश्य दुर्घटना के बाद घायल व्यक्ति को तत्काल चिकित्सा सहायता उपलब्ध कराना और उपचार के खर्च की चिंता को कम करना है।

कार्यशाला में जानकारी दी गई कि जिले के 18 अस्पतालों में योजना के तहत कैशलेस उपचार की व्यवस्था की जा रही है। इनमें 10 सरकारी और आठ निजी अस्पताल शामिल हैं। अस्पताल प्रबंधन को योजना के दिशा-निर्देशों का पालन करने, पात्र मरीजों का आवश्यक विवरण दर्ज करने और उपचार में अनावश्यक विलंब नहीं करने पर जोर दिया गया। अस्पतालों के नोडल पदाधिकारियों एवं तकनीकी कर्मियों को योजना के संचालन की प्रक्रिया समझाई गई, ताकि जरूरत पड़ने पर पात्र दुर्घटना पीड़ितों को समय पर इसका लाभ मिल सके।

जिला परिवहन पदाधिकारी ने कार्यशाला में योजना के उद्देश्य, पात्रता, लाभ एवं क्रियान्वयन की विस्तृत जानकारी दी। पावरपॉइंट प्रस्तुति और लाइव डेमो के माध्यम से अस्पतालों को पोर्टल पर पंजीकरण, दुर्घटना पीड़ितों का विवरण दर्ज करने, पुलिस सत्यापन तथा आवेदन स्वीकार या अस्वीकार करने की प्रक्रिया समझाई गई। प्रतिभागियों को टीएमएस 2.0 एवं ई-डीएआर पोर्टल के संचालन, डेटा प्रविष्टि और सत्यापन संबंधी तकनीकी प्रक्रियाओं का प्रशिक्षण भी दिया गया। संबंधित विभागों के बीच बेहतर समन्वय स्थापित करने तथा तकनीकी और प्रक्रियागत समस्याओं का त्वरित समाधान करने पर विशेष जोर दिया गया।

कार्यशाला में अस्पताल प्रबंधन को निर्देश दिया गया कि पात्र सड़क दुर्घटना पीड़ित के पहुंचने पर आवश्यक उपचार में अनावश्यक देरी नहीं होनी चाहिए। मरीज का पंजीकरण, जरूरी विवरण दर्ज करने और योजना से संबंधित औपचारिकताओं को निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार पूरा करने पर बल दिया गया।

पुलिस की भूमिका के संबंध में दुर्घटना की सूचना मिलने पर आवश्यक कार्रवाई करने, घायल को अस्पताल पहुंचाने में सहयोग देने और ई-डीएआर पोर्टल पर दुर्घटना एवं पीड़ित से संबंधित विवरण दर्ज करने की प्रक्रिया समझाई गई। कार्यशाला में सिविल सर्जन, जिला परिवहन पदाधिकारी, पुलिस एवं यातायात पुलिस के प्रतिनिधि, जिला आयुष्मान नोडल पदाधिकारी, स्वास्थ्य विभाग के अधिकारी, सरकारी एवं निजी अस्पतालों के निदेशक, अधीक्षक, प्रबंधक और नोडल पदाधिकारी सहित एम्बुलेंस सेवा के प्रतिनिधि तथा तकनीकी कर्मी मौजूद रहे।

हिन्दुस्थान समाचार / विनय कुमार मिश्र

Livevns.news Desk
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