राजभवन मार्च राजद और तेजस्वी यादव की घटती राजनीतिक स्वीकार्यता का प्रमाण : संजय सरावगी

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राजभवन मार्च राजद और तेजस्वी यादव की घटती राजनीतिक स्वीकार्यता का प्रमाण : संजय सरावगी


पटना, 19 अगस्त (हि.स.)। भारतीय जनता पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष संजय सरावगी ने राजद के राजभवन मार्च पर तीखा हमला बोलते हुए कहा कि यह मार्च जनसमर्थन का प्रदर्शन नहीं, बल्कि तेजस्वी यादव के राजनीतिक करियर को बचाने की एक और असफल कोशिश साबित हुआ है। राजभवन मार्च के नाम पर राजद ने अपनी राजनीतिक ताकत दिखाने का प्रयास किया, लेकिन जमीन पर न तो अपेक्षित जनसमर्थन दिखाई दिया और न ही कार्यकर्ताओं में वह उत्साह नजर आया, जिसका दावा राजद लगातार करता रहा है।

सरावगी ने कहा कि तेजस्वी यादव ने मार्च तो निकाल दिया, लेकिन उनके साथ न छात्र खड़े हुए, न आम जनता और न ही राजद के कार्यकर्ताओं में कोई खास उत्साह दिखा। जिस युवा शक्ति और जनसमर्थन की बात तेजस्वी यादव लगातार करते हैं, राजभवन मार्च में उसकी वास्तविक तस्वीर बिहार की जनता ने देख ली। यह मार्च राजद और तेजस्वी यादव की घटती राजनीतिक स्वीकार्यता का प्रमाण है।

उन्होंने कहा कि तेजस्वी यादव की राजनीति अब जनता के वास्तविक मुद्दों से कटकर केवल विरोध, आरोप और कैमरे के सामने प्रदर्शन तक सीमित रह गई है। बिहार के युवा रोजगार, गुणवत्तापूर्ण शिक्षा, बेहतर अवसर और विकसित बिहार चाहते हैं। जनता यह जानना चाहती है कि बिहार के विकास में उनका ठोस विजन क्या है, लेकिन तेजस्वी यादव के पास इन सवालों का कोई स्पष्ट जवाब नहीं है।

प्रदेश अध्यक्ष ने कहा कि राजनीति में जनता के दिल में जगह बनानी पड़ती है। तेजस्वी यादव को यह समझना चाहिए कि केवल मार्च निकालने और सरकार के खिलाफ नारे लगाने से बिहार की जनता का विश्वास वापस नहीं पाया जा सकता। जनता अब काम और परिणाम के आधार पर नेताओं का मूल्यांकन करती है।

उन्होंने कहा कि राजद को पहले अपने भीतर झांकना चाहिए। जिस पार्टी के शीर्ष नेतृत्व को अपने ही संगठन में लगातार असंतोष, कार्यकर्ताओं की दूरी और घटते जनाधार की चिंता करनी पड़ रही हो, वह बिहार की जनता को राजनीतिक पाठ पढ़ाने की कोशिश न करे। राजद का राजभवन मार्च इसी राजनीतिक बेचैनी का प्रतिबिंब नजर आया।

उन्होंने कहा कि तेजस्वी यादव को बार-बार ‘मार्च की राजनीति’ करने के बजाय जनता के बीच जाकर अपने कार्यकाल, अपने वादों और अपने राजनीतिक विजन का हिसाब देना चाहिए। बिहार की जनता को यह बताया जाना चाहिए कि सत्ता में रहते हुए उन्होंने युवाओं, किसानों, महिलाओं, शिक्षा और रोजगार के क्षेत्र में क्या ठोस काम किया।

उन्होंने कहा कि बिहार अब नकारात्मक राजनीति और राजनीतिक ड्रामे से आगे निकल चुका है। प्रदेश की जनता विकास, सुशासन, रोजगार, शिक्षा, निवेश और बेहतर भविष्य चाहती है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व और बिहार में मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी के विकास कार्यों के कारण जनता का विश्वास विकास की राजनीति में लगातार मजबूत हुआ है।

उन्होंने कहा कि राजद और तेजस्वी यादव को अब यह स्वीकार कर लेना चाहिए कि केवल विरोध की राजनीति के सहारे जनता का विश्वास हासिल नहीं किया जा सकता। राजभवन मार्च ने एक बार फिर यह स्पष्ट कर दिया है कि तेजस्वी यादव की राजनीति में जनविश्वास लगातार कमजोर हो रहा है।

प्रदेश अध्यक्ष ने कहा कि राजभवन मार्च तेजस्वी यादव की ताकत का प्रदर्शन नहीं, बल्कि उनकी घटती राजनीतिक स्वीकार्यता का सार्वजनिक प्रमाण है। बिहार की जनता अब भाषण और प्रदर्शन नहीं, काम और परिणाम देखना चाहती है। तेजस्वी यादव को राजनीति के इस बदले हुए मिजाज को समझना चाहिए।

हिन्दुस्थान समाचार / सुरभित दत्त

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