कटनी से मुक्त किए गए 144 बच्चों के मामले में परिजनों और संगठनों में आक्रोश

WhatsApp Channel Join Now
कटनी से मुक्त किए गए 144 बच्चों के मामले में परिजनों और संगठनों में आक्रोश


अररिया 28 अप्रैल(हि.स.)।

जिले के 144 समेत सीमांचल के अन्य जिलों से कुल 163 बच्चों को महाराष्ट्र के कटनी में पुलिस द्वारा तस्करी के उद्देश्य से ले जाए जाने के आरोप में केस दर्ज किए जाने को लेकर अभिभावक समेत अन्य संगठन अब मुखर होने लगे हैं।

शहर के एक होटल के सभागार में जन जागरण शक्ति संगठन के बैनर तले आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में बच्चों की मुक्ति को लेकर प्रशासनिक रवैया पर आपत्ति व्यक्त किया गया। मदरसा शिक्षा के लिए पलायन कर रहे बच्चों की प्रशासनिक रोकथाम, बाल संरक्षण प्रक्रियाओं और कानूनी पहलुओं पर चर्चा करते हुए संगठन के आशीष रंजन, अधिवक्ता नवाज हासन और रमीज रेजा ने प्रशासन, बाल कल्याण समिति और जीआरपी द्वारा दर्ज एफआईआर पर सवाल उठाए।

इस दौरान बच्चों के परिजन भी मौजूद थे, जिनमें नरपतगंज फरही वार्ड 5 की अंजुमन, बैरगाछी के मो आसिफ, बगडाहरा के जलाल और पूर्व मुखिया मो इम्तियाज आलम शामिल थे। परिजनों ने आरोप लगाया कि अल्पसंख्यक समुदाय के बच्चों को निशाना बनाया जा रहा है। उन्होंने कहा कि अन्य जगहों-जैसे कोटा या देहरादून पढ़ने जाने वाले बच्चों को नहीं रोका जाता, लेकिन गरीब मुस्लिम परिवारों के बच्चों को मदरसा जाने पर रोक दिया जाता है।

परिजनों ने यह भी बताया कि कटनी में बच्चों को बाल कल्याण समिति के पास भेजे जाने के बाद उनसे मिलने में भी काफी कठिनाई हुई। उनका कहना था कि स्थानीय मदरसों और सरकारी शिक्षण संस्थानों में गुणवत्तापूर्ण शिक्षा और हॉस्टल सुविधाओं की कमी के कारण वे अपने बच्चों को बाहर भेजते हैं, जहां रहने, खाने और पढ़ाई की व्यवस्था मुफ्त होती है।

पूर्व मुखिया मो.इम्तियाज आलम ने आरोप लगाया कि धर्म विशेष के कारण इस तरह की कार्रवाई हो रही है।

इमारते शरिया अररिया शाखा के प्रमुख काजी अतिकुल्लाह रहमानी ने कहा कि बिहार के मदरसों में पढ़ाई होती है, लेकिन हॉस्टल सुविधाओं की कमी के कारण बच्चों को बाहर भेजा जाता है। उन्होंने भी इसे समुदाय विशेष को निशाना बनाने का मामला बताया।

अधिवक्ता नवाज हासन ने कहा कि यह सही है कि मानव तस्करी के मामले होते हैं, लेकिन हालिया घटना में मदरसा पढ़ाई के लिए जा रहे बच्चों को गलत तरीके से तस्करी का मामला दिखाकर एफआईआर दर्ज की गई। उन्होंने कहा कि वास्तविक तस्करी मामलों को साबित करने में प्रशासन अक्सर विफल रहता है।

संगठन ने इस मामले की स्वतंत्र एजेंसी से जांच कराने की मांग की।साथ ही जिम्मेदार अधिकारियों से जवाबदेही तय करने और प्रभावित बच्चों को मुआवजा दिए जाने की मांग की गई।

हिन्दुस्थान समाचार / राहुल कुमार ठाकुर

Share this story