लम्बा संघर्ष की जीत: फिर खुली इटाढ़ी रेलवे गुमटी, बक्सर में लौटी मुस्कान

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लम्बा संघर्ष की जीत: फिर खुली इटाढ़ी रेलवे गुमटी, बक्सर में लौटी मुस्कान


बक्सर, 11 सितंबर (हि.स.)।

लंबे इंतजार, आंदोलन और लगातार बढ़ते जनदबाव के बाद आखिरकार शुक्रवार को इटाढ़ी रोड स्थित ऐतिहासिक रेलवे गुमटी आम लोगों के आवागमन के लिए फिर खोल दी गई।

समपार फाटक संख्या-70B के दोबारा खुलते ही बक्सर से इटाढ़ी-दिनारा क्षेत्र की ओर जाने वाले लोगों के चेहरे पर खुशी साफ दिखाई दी। करीब तीन महीने से बंद गुमटी के कारण परेशान स्कूली बच्चों, मरीजों, किसानों, व्यवसायियों और रोजमर्रा के यात्रियों को अब लंबा चक्कर लगाने की मजबूरी से राहत मिली है।

रेलवे प्रशासन ने 30 मई 2026 को इस गुमटी को स्थायी रूप से बंद कर दिया था। इसके विकल्प के तौर पर करीब 26.40 करोड़ रुपये की लागत से रोड ओवरब्रिज (आरओबी) का निर्माण कराया गया था। लेकिन उद्घाटन के कुछ ही दिनों बाद ओवरब्रिज के एक हिस्से में तकनीकी समस्या आने के बाद वहां से आवागमन रोक दिया गया। स्थिति यह बन गई कि एक तरफ रेलवे गुमटी बंद थी और दूसरी तरफ नया ओवरब्रिज भी लोगों के लिए उपयोगी नहीं रहा। इससे इटाढ़ी रोड और आसपास के इलाकों में आवागमन का संकट गहरा गया।

लोगों की परेशानी बढ़ी तो विरोध भी तेज होता गया। स्थानीय ग्रामीणों और विभिन्न संगठनों ने धरना-प्रदर्शन से लेकर रेल चक्का जाम तक आंदोलन किया। जनप्रतिनिधियों ने भी मामले को रेलवे के उच्च अधिकारियों और संसद तक पहुंचाया। लगातार बढ़ते दबाव और जनहित से जुड़े मामले को देखते हुए रेलवे बोर्ड ने गुमटी को दोबारा खोलने की सैद्धांतिक मंजूरी दी। इसके बाद आवश्यक मरम्मत और तैयारियों के बाद शुक्रवार को फाटक पर आवागमन बहाल कर दिया गया।

गुमटी खुलने की खबर से इटाढ़ी रोड के आसपास स्थित विद्यालयों में भी खुशी का माहौल रहा। लंबे समय से रास्ते की समस्या झेल रहे विद्यार्थियों और अभिभावकों ने राहत की सांस ली। मरीजों को अस्पताल पहुंचाने वाले परिजनों, किसानों और दैनिक यात्रियों के लिए भी यह फैसला बड़ी राहत लेकर आया है।

गुमटी खुलना सिर्फ एक रेलवे फाटक का खुलना नहीं, बल्कि बक्सर की जनता के लंबे संघर्ष और एकजुटता की जीत के रूप में देखा जा रहा है। शुक्रवार को इटाढ़ी रोड पर लोगों के चेहरों पर दिखाई दी खुशी ने यह संदेश दिया कि जनहित के मुद्दे पर संगठित और शांतिपूर्ण संघर्ष आखिरकार परिणाम तक पहुं

च सकता है।

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हिन्दुस्थान समाचार / Jitendra Kumar Mishra

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