श्रेष्ठ भावना से संस्कृत की साधना करें छात्र, हीन भावना से नहीं: कुलपति
दरभंगा 13 जुलाई (हि.स.)। रमेश्वर लता संस्कृत महाविद्यालय, दरभंगा का 120वां स्थापना दिवस सोमवार को समारोहपूर्वक मनाया गया।
कार्यक्रम के मुख्य अतिथि प्रो. लक्ष्मीनिवास पांडेय ने कहा कि छात्रों को हीन भावना से नहीं, बल्कि श्रेष्ठ भावना के साथ संस्कृत की साधना करनी चाहिए। उन्होंने कहा कि शास्त्रों के पारंपरिक ज्ञान के साथ-साथ आधुनिक ज्ञान-विज्ञान की नई विधाओं को भी आत्मसात करना समय की आवश्यकता है।उन्होंने 'गुरुशुश्रूषया विद्या' की प्रासंगिकता पर प्रकाश डालते हुए महाविद्यालय को भविष्य में क्लस्टर सेंटर बनाए जाने की संभावना भी व्यक्त की।
विशिष्ट अतिथि डॉ. दिनेश झा ने महाविद्यालय के 120 वर्षों के गौरवशाली इतिहास, दरभंगा राज परिवार की दानशीलता तथा संस्कृत प्रेम पर विस्तार से प्रकाश डाला। सारस्वत अतिथि डॉ. वरुण कुमार झा ने संस्थान के पूर्ववर्ती विद्वान छात्रों का स्मरण करते हुए महाविद्यालय की शैक्षणिक परंपरा और उपलब्धियों को रेखांकित किया।
स्वागत भाषण विश्वविद्यालय के वित्त पदाधिकारी डॉ. पवन कुमार झा ने दिया। उन्होंने छात्रों को नियमित स्वाध्याय के महत्व से अवगत कराया। छात्राओं सुप्रीता, सर्वज्ञा, अंशु एवं नैन्सी ने स्वागत गीत प्रस्तुत किया, जबकि अंकित कुमार ने भगवती वंदना और सुप्रीता एवं सर्वज्ञा ने 'रमेश्वर-लता-वैभवगीत' का गायन किया।
समारोह के दौरान विभिन्न कक्षाओं में उत्कृष्ट अंक प्राप्त करने वाले छात्रों को सम्मानित किया गया। साहित्य विभाग के सहायक प्राचार्य डॉ. मुरारी कुमार मिश्र का महाविद्यालय परिवार में शामिल होने पर अभिनंदन किया गया।
अध्यक्षीय उद्बोधन में प्रभारी प्राचार्य डॉ. ममता पांडेय ने महाविद्यालय के सतत विकास की योजनाओं पर प्रकाश डालते हुए सभी अतिथियों के प्रति आभार व्यक्त किया। धन्यवाद ज्ञापन डॉ. सुनील कुमार ने किया तथा मंच संचालन डॉ. प्रमोद कुमार मिश्र ने किया। कार्यक्रम में विश्वविद्यालय एवं महाविद्यालय के अनेक शिक्षक, कर्मचारी और छात्र-छात्राएं उपस्थित रहे।
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हिन्दुस्थान समाचार / Krishna Mohan Mishra

