बारिश से किसानों की उम्मीद जगी, बिचड़ा डालने की तैयारी में जुटे किसान
भागलपुर, 01 जुलाई (हि.स.)। जिले में मानसून सक्रिय होने से किसानों में खुशी की लहर दौड़ गई है। बुधवार को हुई झमाझम बारिश के बाद किसान अब खेतों की जुताई कर धान का बिचड़ा डालने और रोपाई की तैयारी में जोर-शोर से जुट गए हैं।
भागलपुर में जून महीने में सूखे जैसे हालात और सामान्य से कम बारिश के कारण किसानों की चिंता बढ़ गई थी। अब मानसून ने पूरे बिहार को कवर कर लिया है, जिससे राहत मिली है। अच्छी बारिश के बाद खेतों में पर्याप्त नमी आ गई है। जिन इलाकों में किसान बोरिंग या निजी पंप सेट से बिचड़ा तैयार कर रहे थे, उन्हें अब सीधे तौर पर बड़ी राहत मिली है। खरीफ फसलों की अच्छी पैदावार के लिए बिहार कृषि विभाग द्वारा प्रमाणित बीज और खाद की पर्याप्त व्यवस्था सुनिश्चित की जा रही है।
खेतों में पानी भरने के साथ ही धान का बिचड़ा गिराने का काम अब रफ्तार पकड़ेगा। कृषि विभाग को उम्मीद है कि जुलाई के पहले सप्ताह तक बिचड़ा लगाने का लक्ष्य पूरा हो जाएग। किसान राजकुमार ने बताया कि खेत तैयार था पर बारिश नहीं हुई थी। अब बारिश हुई है, तो दो दिन में बिचड़ा गिरा देंगे। उन्होंने कहा कि बादल देख-देखकर थक गए थे। अब जान में जान आई है। डीजल महंगा है, बारिश से बड़ी राहत मिली है।
उधर बिहार कृषि विश्वविद्यालय सबौर और भारत मौसम विज्ञान विभाग ने संयुक्त बुलेटिन जारी कर अगले पांच दिनों तक जिले में आंधी के साथ झमाझम बारिश होने का पुख्ता पूर्वानुमान जताया है। बिहार कृषि विश्वविद्यालय, सबौर के ग्रामीण कृषि मौसम सेवा के नोडल पदाधिकारी डॉ. वीरेंद्र कुमार ने किसानों के लिए एडवाइजरी जारी की है। उन्होंने कहा कि मानसून की वर्तमान कमजोर स्थिति को देखते हुए जिन किसानों के पास निजी सिंचाई (पंपसेट/बोरिंग) की मुकम्मल सुविधा उपलब्ध है, वे बेझिझक मध्यम अवधि वाली धान की किस्मों का बिचड़ा खेतों में डाल दें।
इसके अलावा, तैयार बिचड़ों को सूखने से बचाने के लिए आवश्यकतानुसार जीवन रक्षक हल्की सिंचाई जरूर करें। किसान चाहें तो कम पानी में तैयार होने वाली ‘सबौर मोती धान’ और ‘सबौर सोना’ जैसी उन्नत किस्मों की सीधी बुआई भी कर सकते हैं। मौसम विभाग की इस नई चेतावनी के बाद जिला प्रशासन ने भी आपदा प्रबंधन विंग को अलर्ट कर दिया है, क्योंकि आंधी और बारिश के दौरान वज्रपात (ठनका) की घटनाएं बढ़ जाती हैं। लोगों से अपील की गई है कि वे बादलों की गड़गड़ाहट के समय खुले स्थानों और पेड़ों के नीचे जाने से बचें।
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हिन्दुस्थान समाचार / बिजय शंकर

