राघोपुर सिंचाई विभाग परिसर में बन रही चारदीवारी पर सवाल, घटिया ईंट लगाने का आरोप
सुपौल, 07 मार्च (हि.स.)। जिले के राघोपुर स्थित सिंचाई विभाग परिसर में बन रही चारदीवारी को लेकर स्थानीय लोगों में नाराजगी और संदेह का माहौल बन गया है। ग्रामीणों का आरोप है कि निर्माण कार्य बिना किसी सूचना बोर्ड के कराया जा रहा है और काम से जुड़ी कोई आधिकारिक जानकारी भी सार्वजनिक नहीं की गई है। इससे निर्माण कार्य की पारदर्शिता और गुणवत्ता दोनों पर सवाल उठने लगे हैं।
स्थानीय लोगों का कहना है कि विभाग की ओर से मनमाने तरीके से निर्माण कार्य कराया जा रहा है। ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि चारदीवारी के निर्माण में घटिया किस्म की ईंटों का इस्तेमाल किया जा रहा है, जिससे निर्माण कार्य की गुणवत्ता प्रभावित हो सकती है। लोगों का यह भी कहना है कि हर वर्ष “वार्षिक रिपेयरिंग” के नाम पर सरकारी राशि खर्च की जाती है, लेकिन काम की गुणवत्ता पर गंभीरता से ध्यान नहीं दिया जाता और सरकारी धन के दुरुपयोग की आशंका बनी रहती है।
ग्रामीणों ने पूरे मामले को लेकर सुपौल के जिलाधिकारी से निष्पक्ष जांच की मांग की है। उनका कहना है कि सरकारी पैसों से होने वाले निर्माण कार्य में पूरी पारदर्शिता होनी चाहिए। यदि किसी प्रकार की अनियमितता सामने आती है तो संबंधित अधिकारियों और ठेकेदार के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जानी चाहिए। ग्रामीणों ने व्यवस्था पर तंज कसते हुए कहा कि हालात “अंधेर नगरी चौपट राजा” जैसे हो गए हैं, जहां नियम-कायदे और गुणवत्ता की अनदेखी की जा रही है।
निर्माण कार्य के दौरान मौके पर सिंचाई विभाग के जूनियर इंजीनियर पवन कुमार सिंह मौजूद थे और उनकी निगरानी में काम कराया जा रहा था। इस संबंध में जेई पवन कुमार सिंह ने बताया कि यह कार्य विभाग की वार्षिक रिपेयरिंग योजना के तहत कराया जा रहा है। उन्होंने कहा कि कार्यालयीय मरम्मत से जुड़े ऐसे कार्यों में आमतौर पर सूचना बोर्ड लगाने या विस्तृत जानकारी सार्वजनिक करने की आवश्यकता नहीं होती।
ठेकेदार गुड्डू साह ने बताया कि करीब साढ़े आठ लाख रुपये की लागत से यह काम कराया जा रहा है, जिसमें तीन से चार अलग-अलग कार्य शामिल हैं। उन्होंने कहा कि पुरानी दीवार की मरम्मत के साथ नई ईंट भी लगाई जा रही है। घटिया ईंट लगाने के आरोप पर उन्होंने पहले सफाई देते हुए कहा था कि खराब ईंटों को हटवा दिया जाएगा।
हालांकि स्थानीय लोगों का आरोप है कि जिन ईंटों को घटिया बताकर हटाने की बात कही गई थी, उन्हीं ईंटों से बाद में चारदीवारी का निर्माण कर दिया गया। ऐसे में अब सवाल उठ रहा है कि सरकारी रुपये का इस तरह उपयोग क्यों किया जा रहा है। ग्रामीणों ने पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कर दोषियों पर कार्रवाई की मांग की है।
हिन्दुस्थान समाचार / विनय कुमार मिश्र

