टीएमबीयू में अतिथि शिक्षकों का फूटा गुस्सा, सरकार और विश्वविद्यालय प्रशासन के खिलाफ किया उग्र प्रदर्शन

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टीएमबीयू में अतिथि शिक्षकों का फूटा गुस्सा, सरकार और विश्वविद्यालय प्रशासन के खिलाफ किया उग्र प्रदर्शन


भागलपुर, 27 जुलाई (हि.स.)। तिलकामांझी भागलपुर विश्वविद्यालय एक बार फिर आंदोलन की आग में सुलग उठा है। सोमवार को विश्वविद्यालय परिसर में अतिथि शिक्षकों ने अपनी मांगों को लेकर जोरदार धरना-प्रदर्शन किया।

इस दौरान शिक्षकों ने बिहार सरकार और विश्वविद्यालय प्रशासन के खिलाफ जमकर नारेबाजी की और अपनी आवाज बुलंद की। शिक्षकों के इस आंदोलन से विश्वविद्यालय की प्रशासनिक और शैक्षणिक गतिविधियों पर असर देखने को मिला।

अतिथि शिक्षक संघ के अध्यक्ष डॉ आनंद आजाद ने बताया कि यह आंदोलन मुख्य रूप से दो बड़े नीतिगत बदलावों के खिलाफ है। उन्होंने नई नियमावली के कई प्रावधानों पर गंभीर सवाल उठाए हैं।

शिक्षकों की अधिकतम आयु सीमा को 55 वर्ष से घटाकर 43 वर्ष करने का प्रस्ताव है, जिसका हमलोग विरोध कर रहे हैं। नियुक्ति प्रक्रिया में शोध पत्र और पूर्व के शिक्षण अनुभव को पर्याप्त महत्व नहीं दिया गया है।

नियमावली में डोमिसाइल नीति लागू नहीं की गई है, जिससे स्थानीय अभ्यर्थियों में नाराजगी है। उन्होंने कहा कि अतिथि शिक्षक वर्षों से विश्वविद्यालय में अपनी सेवा दे रहे हैं। लेकिन अतिथि शिक्षकों के समायोजन या भविष्य को लेकर कोई स्पष्ट नीति नहीं बनाई गई है।

उन्होंने साफ शब्दों में सरकार से इन सभी विवादित बिंदुओं पर तुरंत पुनर्विचार करने की मांग की है। शिक्षकों ने चेतावनी दी है कि यदि सरकार और प्रशासन ने उनकी मांगों पर जल्द ही कोई सकारात्मक निर्णय नहीं लिया, तो इस आंदोलन को और तेज किया जाएगा। आने वाले दिनों में इसे एक बड़े जनआंदोलन का रूप देकर सरकार को करारा जवाब दिया जाएगा।

हिन्दुस्थान समाचार / बिजय शंकर

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