सारण में संभावित बाढ़ व सुखाड़ से निपटने को प्रधान सचिव सह प्रभारी सचिव ने की समीक्षा बैठक
सारण, 02 जून (हि.स.)। जिले में संभावित बाढ़ और सुखाड़ की चुनौतियों से निपटने के लिए जिला प्रशासन ने तैयारियों को अंतिम रूप देने और कार्ययोजना की विस्तृत समीक्षा करने के उद्देश्य से समाहरणालय सभाकक्ष में एक महत्वपूर्ण बैठक का आयोजन किया गया। इस उच्चस्तरीय बैठक की अध्यक्षता प्रभारी सचिव सह प्रधान सचिव ग्रामीण विकास विभाग ने की।
बैठक के दौरान जिलाधिकारी वैभव श्रीवास्तव ने पावर पॉइंट प्रेजेंटेशन के माध्यम से जिले की तैयारियों का बिंदुवार ब्यौरा प्रस्तुत किया। उन्होंने बताया कि विगत 5 वर्षों के वर्षापात के आंकड़ों का गहन विश्लेषण करने के बाद आपदा प्रबंधन की एक व्यापक और पुख्ता योजना तैयार की गई है। मानक संचालन प्रक्रिया के तहत बाढ़ आपदा मानव संसाधन एवं क्रियान्वयन से जुड़ी सभी तैयारियां पूरी कर ली गई हैं और जिला स्तर पर उपलब्ध सभी आवश्यक संसाधनों की विस्तृत मैपिंग भी की जा चुकी है।
समीक्षा में बताया गया कि प्रमंडल का नोडल जिला होने के कारण छपरा के पास वर्तमान में 31,881 पॉलिथीन शीट्स उपलब्ध हैं। आवश्यकता पड़ने पर अन्य पड़ोसी जिलों को भी इसकी आपूर्ति की जाएगी, जिसके लिए निविदा के माध्यम से दर और आपूर्तिकर्ता का निर्धारण कर लिया गया है। इसके अतिरिक्त, बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में राहत कार्यों के लिए लाइफ जैकेट्स और महाजाल की समय पर आपूर्ति सुनिश्चित करने हेतु टेंडर प्रक्रिया पूरी कर आदेश जारी कर दिए गए हैं। बाढ़ के दौरान त्वरित आवागमन और रेस्क्यू ऑपरेशन के लिए प्रशासन ने 203 निजी नाव मालिकों के साथ विधिवत एकरारनामा कर उन्हें अलर्ट मोड पर रखा है।
प्रभावित परिवारों को तत्काल सहायता पहुंचाने के लिए ड्राई राशन और फूड पैकेट्स तैयार करने हेतु पैकिंग स्थलों को चिन्हित कर लिया गया है। विस्थापितों के रहने के लिए जिले में कुल 199 बाढ़ राहत शिविर स्थल और शुद्ध व गर्म भोजन के लिए 178 सामुदायिक रसोई स्थलों की पहचान की गई है। आपदा पीड़ितों को आर्थिक राहत देने के उद्देश्य से आपदा संपूर्ति पोर्टल के माध्यम से सीधे बैंक खाते में 7000 रुपये प्रति परिवार की दर से अनुग्रहिक अनुदान राशि भेजी जाएगी। इसके लिए पात्र परिवारों के सत्यापन का कार्य एडवांस में अपडेट किया जा रहा है। बाढ़ सुरक्षा के दृष्टिकोण से संवेदनशील माने जाने वाले कुल दस मुख्य स्थलों में से पांच पर काम पूरा हो चुका है। शेष पांच स्थलों पर काम तेजी से चल रहा है, जिसे हर हाल में 15 जून तक पूरा करने का कड़ा निर्देश दिया गया है। विशेष रूप से मकेर के हैज़लपुर में गंडक नदी और सोनपुर के सबलपुर पश्चिमी में गंगा नदी के तटबंधों पर जारी सुरक्षा कार्यों में अतिरिक्त संसाधन लगाकर गति बढ़ाने को कहा गया है।
जिले की कुल 4,298 नल-जल योजनाओं में से तकनीकी खराबी वाली 500 योजनाओं को मरम्मत के बाद चालू कर दिया गया है। पेयजल संकट की शिकायतों के त्वरित निवारण के लिए विशेष हेल्पलाइन नंबर 06152-244791 जारी किया गया है जो सुबह 7:00 बजे से रात्रि 9:00 बजे तक सक्रिय रहेगा।
स्वास्थ्य विभाग ने 162 स्टेटिक और 52 मोबाइल मेडिकल टीमों का गठन किया है, जो पर्याप्त दवाओं के स्टॉक के साथ तैनात रहेंगी। मवेशियों के चारे और इलाज के लिए 32 पशु राहत शिविर चिन्हित किए गए हैं। किसी भी आपातकालीन सूचना के लिए जिला नियंत्रण कक्ष का दूरभाष संख्या 06152-245023 चौबीसों घंटे 24X7 कार्यरत रहेगा।
दूसरी ओर, सुखाड़ की आशंका को देखते हुए किसानों के लिए डीजल अनुदान और आकस्मिक फसल योजना के तहत वैकल्पिक मुकम्मल व्यवस्था की गई है। जिले के कुल 330 राजकीय नलकूपों में से 159 चालू हैं, जबकि बंद पड़े 171 नलकूपों को प्राथमिकता के आधार पर तुरंत ठीक करने का निर्देश दिया गया है।
इस बैठक में जिलाधिकारी वैभव श्रीवास्तव, उप विकास आयुक्त लक्ष्मण तिवारी, अपर समाहर्ता विधि व्यवस्था प्रमोद कुमार पांडे सहित सभी अनुमंडल पदाधिकारी और भूमि सुधार उपसमाहर्ता उपस्थित थे।
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हिन्दुस्थान समाचार / धनंजय कुमार

