सीमावर्ती किशनगंज में सेना के दो स्थायी कैंप बनाने की तैयारी तेज

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सीमावर्ती किशनगंज में सेना के दो स्थायी कैंप बनाने की तैयारी तेज


किशनगंज, 31 अक्टूबर (हि.स.)। सामरिक दृष्टि से महत्वपूर्ण सीमावर्ती किशनगंज जिले में भारतीय सेना की मौजूदगी बढ़ाने की तैयारी की चर्चा तेज हो गई है। विश्वस्त सूत्रों के अनुसार, जिले में दो अलग-अलग स्थानों पर सेना के स्थायी कैंप स्थापित करने की योजना पर विचार किया जा रहा है।ठाकुरगंज प्रखंड के भेलागुड़ी में आर्मी कैंप की स्थापना लगभग तय मानी जा रही है, जबकि दूसरे प्रस्तावित कैंप के लिए अब सकोर-नटुआपाड़ा की जगह ठाकुरगंज प्रखंड के सरायकुड़ी का नाम सामने आया है। यहां करीब 190 एकड़ जमीन पर सेना का स्थायी कैंप स्थापित किए जाने की चर्चा है। सूत्रों के मुताबिक, सरायकुड़ी में प्रस्तावित कैंप के लिए स्थान चयन में इसकी भौगोलिक स्थिति और बेहतर सड़क संपर्क को महत्वपूर्ण माना जा रहा है। यह इलाका किशनगंज-बहादुरगंज मुख्य मार्ग पर डे मार्केट से पौआखाली जाने वाले रास्ते में स्थित है। यहां से राष्ट्रीय राजमार्ग NH-327E भी नजदीक है। साथ ही सरायकुड़ी कोचाधामन और बहादुरगंज प्रखंड की सीमा के करीब है। ऐसे में सीमावर्ती क्षेत्रों तक पहुंच और आवाजाही के लिहाज से इस स्थान को महत्वपूर्ण माना जा रहा है। गौरतलब है कि इससे पहले बहादुरगंज और कोचाधामन अंचल की सीमा से जुड़े सकोर, सतभीट्टा और नटुआपाड़ा मौजा में 200 एकड़ से अधिक जमीन पर सेना कैंप स्थापित करने का प्रस्ताव चर्चा में था। हालांकि, प्रस्तावित जमीन का बड़ा हिस्सा उपजाऊ कृषि भूमि होने के कारण किसानों ने इसका विरोध किया था। किसानों का कहना था कि इस जमीन पर सैकड़ों परिवारों की आजीविका निर्भर है। भूमि अधिग्रहण से उनकी रोजी-रोटी पर संकट खड़ा हो सकता है। इस मुद्दे को लेकर बहादुरगंज के AIMIM विधायक तौसीफ आलम ने 24 दिसंबर 2025 को तत्कालीन जिलाधिकारी से मुलाकात कर ज्ञापन भी सौंपा था। उन्होंने स्पष्ट किया था कि उनका विरोध सेना या राष्ट्रीय सुरक्षा को लेकर नहीं, बल्कि किसानों की उपजाऊ जमीन और आजीविका बचाने के उद्देश्य से है। फिलहाल सरायकुड़ी में 190 एकड़ जमीन के चयन और भेलागुड़ी में कैंप स्थापना की चर्चा की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। भूमि अधिग्रहण की अधिसूचना और प्रशासनिक घोषणा भी सामने नहीं आई है। यदि दोनों स्थानों पर सेना के स्थायी कैंप स्थापित होते हैं, तो सीमावर्ती किशनगंज की सामरिक अहमियत और बढ़ सकती है।

हिन्दुस्थान समाचार / धर्मेन्द्र सिंह

Livevns.news Desk
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